उदयपुर,(ARLive news)। हिरणमगरी थाना क्षेत्र के सेक्टर-4 स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा के एटीएम से बैंक कर्मी द्वारा ही 2 सालों में 24 लाख 38 हजार रूपए चोरी करने का मामला सामने आया है। वारदात को बैंक का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दो साल तक अंजाम देता रहा और बैंक अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। जब कर्मचारी ने एक साथ 10 लाख रूपए चोरी किए तो बैंक अधिकारियों को चोरी का पता चला और मामले का खुलासा हुआ।
एसपी कैलाश चन्द्र विश्नोई ने बताया कि मुख्य अभियुक्त सेक्टर-4 स्थित पीएनबी बैंक में ही कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी टिम्बरवाड़ा धानमंडी निवासी अमित कश्यप पुत्र मोतीलाल और इसका साथी कुंजरवाड़ी धानमंडी निवासी यूसुफ उर्फ भोला पुत्र अहमद नूर कुरैशी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कुल 10 लाख 50 हजार 100 रूपए बरामद किए गए हैं। एडिएसपी गोपाल स्परूप मेवाड़ा, डीएसपी राजीव जोशी, थानाधिकारी हनुवंत सिंह के नेतृत्व में टीम ने वारदात का खुलासा किया, खुलासे में कांस्टेबल उपेन्द्र सिंह की मुख्य भूमिका रही है।
गुम होने का बहाना बनाकर चुरायी थी एटीएम मशीन की चाबी
एडि.एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने बताया कि 1 दिसंबर को पीएनबी बैंक मैनेजर विवेक मीणा ने एटीएम से दो ट्रे में रखे रूपए चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज करवायी थी। साथ ही अंदेशा जताया था कि चूंकि मशीन कहीं से डैमेज नहीं हुई है और न ही कोई सायरन बजा है, ऐसे में इस वारदात को बैंक का कोई कर्मचारी ही हो सकता है।
रिपोर्ट दर्ज होने पर बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की गयी। पता चला कि एटीएम की चाबी हैड कैशियर के पास रहती है, लेकिन एटीएम में पैसा डालने का काम मैंनेजर या सैकंड मैनेजर करते हैं और इस काम के लिए वे बैंक के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अमित की मदद लेते हैं। एटीएम की 3 चाबियां हैं, इसमें एक चाबी गुम हो चुकी है, दूसरी चाबी बैंक में हैं और तीसरी चाबी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अमित को दी थी, जिसने बताया कि चाबी गुम हो गयी है। अमित से पुलिस ने पूछताछ की तो उसने वारदात कबूल कर ली।
बैंक अधिकारियों का भरोसा जीत पता कर लिया पासवर्ड
डीएसपी राजीव जोशी ने बताया कि अमित पर शक गहराया तो उस पर नजर रखी, तो पता चला कि उसे आईपीएल सट्टा लगाने की भी आदत है। पूछताछ में अमित ने बताया कि वह 2018 से सेक्टर 4 पीएनबी बैंक में कार्यरत था। बैंक अधिकारी उस पर भरोसा करते थे। एटीएम में पैसे डालने जाते समय भी बैंक अधिकारी उससे मदद लेते थे, इसी दौरान उसने एटीएम मशीन का पासवर्ड पता कर लिया। उसे वारदात करने के लिए चाबी चाहिए थी, तो उसने एक चाबी चुरा ली और बैंक अधिकारियों को कह दिया कि चाबी गुम हो गयी है। बैंक अधिकारियों ने भी उस पर भरोसा कर लिया और बात आयीगयी हो गयी। इसके बाद उसने एटीएम से रूपए चोरी करना शुरू कर दिया।
2 साल से निकाल रहा था एटीएम से पैसे
थानाधिकारी हनुवंत सिंह ने बताया कि उसने 2018 से नवंबर 2020 तक कभी 50 हजार, कभी डेढ़ लाख ऐसे कर अलग-अलग समय में कुल 14 लाख 50 हजार रूपए चोरी कर लिए थे। बेहद शातिर तरीके से चोरी करने से बैंक अधिकारियों को भी इसकी भनक नहीं लगी। लेकिन अब अमित को यह डर सताने लगा था कि कहीं बैंक मैनेजर को इसकी भनक न लग जाए। इसलिए उसने अपने दोस्त के साथ मिलकर बड़ी चोरी करने की योजना बनायी। एटीएम मशीन के अंदर रखे करीब 10 लाख रूपए चोरी कर लिए। बड़ी राशि जाने से चोरी बैंक मैनेजर की नजर में आ गयी और मामले का खुलासा हो गया।
वारदात के खुलासे में इस टीम का रहा योगदान : एएसआई रघुवीर सिंह, हेड कांस्टेबल देवेन्द्र सिंह, कांस्टेबल उपेन्द्र सिंह, कुलदीप सिंह और राजमीलाल की टीम ने मामले का खुलासा किया।
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