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कृषि कानून बिल : किसानों को दिल्ली पुलिस ने बाॅर्डर पर रोका तो उग्र हुआ आंदोलन, किसानों पर पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले छोड़े गए

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अंबाला,(ARLive news)। पंजाब में हरियाणा की सीमा पर विभिन्न जगहों पर गुरुवार को हजारों प्रदर्शनकारी किसान रात भर बारिश और सर्द हवाओं का सामना करते हुए इकट्ठा हुए। केंद्र के 3 कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ये लोग ‘दिल्ली चलो’ के तहत राष्ट्रीय राजधानी की ओर बढ़ रहे थे, जिन्हें हरियाणा पुलिस ने सीमा पर रोक लिया है। इसके बाद प्रदर्शन अंबाला-पटियाला बॉर्डर पर उग्र हो गया है। यहां किसानों ने बैरिकेडिंग को उखाड़ फेंका है, जिसके बाद किसानों पर पानी की बौछार की जा रही है, आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं।

बता दें कि पुलिस ने हरियाणा के लगभग 100 किसान नेताओं को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुमान के मुताबिक दोनों राज्यों के लगभग 3 लाख किसान ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन के तहत दिल्ली पहुंचने के लिए तैयार हैं। ये किसान 33 संगठनों से जुड़े किसान संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा हैं, जो 470 से अधिक किसान यूनियनों का अखिल भारतीय निकाय है। यह 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी में अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन में भाग लेंगे।

प्रदर्शनकारियों ने धमकी दी है कि अगर उन्हें राष्ट्रीय राजधानी जाने से रोका गया तो वो दिल्ली की ओर जाने वाली सभी सड़कों को बंद कर देंगे। वहीं हरियाणा में प्रवेश करने से रोके गए किसान संगठनों के नेताओं ने घोषणा की है, कि वे एक सप्ताह के लिए बठिंडा और सिरसा जिलों के बीच डबवाली बैरियर पर ‘धरना’ देंगे।

कॉपोर्रेट संस्थानों की ‘दया’ पर निर्भर हो जाएंगे किसान

बीकेयू (उग्राहन) के अध्यक्ष जोगिंदर उग्राहन ने कहा, “अगर हमें गुरुवार को हरियाणा और दिल्ली की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो हम एक हफ्ते तक सीमाओं पर विरोध करेंगे।” दिल्ली पुलिस ने किसानों को दिल्ली में प्रवेश नहीं करने के लिए कहा है, क्योंकि उनके पास शहर में विरोध करने की अनुमति नहीं है।

हरियाणा पुलिस ने भी ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर यात्रियों को पंजाब और दिल्ली के साथ राज्य की सीमाओं के साथ कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने से बचने के लिए कहा है। प्रदर्शनकारी 4 प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों अंबाला से दिल्ली, हिसार से दिल्ली, रेवाड़ी से दिल्ली और पलवल से दिल्ली के जरिए यहां आना चाहते हैं। कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों ने आशंका व्यक्त की है कि ये कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को खत्म कर देंगे, जिससे वे बड़े कॉपोर्रेट संस्थानों की ‘दया’ पर निर्भर हो जाएंगे।

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