एसीबी की कार्यवाही में एक महीने के दौरान उदयपुर के थाना एसएचओ का रिश्वत मांगने का यह दूसरा मामला
उदयपुर,(ARLive news)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को उदयपुर के झल्लारा थाने के एसएचओ (थानेदार) रमेश चन्द्र खटीक, हेडकांस्टेबल ब्रजमोहन मीणा और एक दलाल जितेन्द्र सुथार को 35 हजार रूपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। यह राशि ये परिवादी से उसका रेती का पकड़ा गया डम्पर छोड़ने की एवज में ले रहे थे।
एडि.एसपी सुधीर जोशी ने बताया कि परिवादी सागवाड़ा डूंगरपुर निवासी हजारीमल रेबारी ने एसीबी कार्यालय आकर शिकायत दी थी, कि 13 अक्टूबर को उसका एक रेती का डम्पर झल्लारा थाना पुलिस ने पकड़ लिया था, इस डम्पर को छोड़ने की एवज में 50 हजार रूपए रिश्वत मांगी जा रही है।
सत्यापन के दौरान ही बतौर पेशगी ले लिए थे 2000 रूपए
शिकायत पर एसीबी टीम ने 26 अक्टूबर को सत्यापन किया तो थानाधिकारी रमेश चन्द्र और हेडकांस्टेबल ब्रजमोहन मीणा ने रेती डम्पर को छोड़ने की एवज में 50 हजार रूपए रिश्वत की मांग की। परिवादी ने जब निवेदन किया तो 45 हजार रूपए में डम्पर छोड़ने के लिए तैयार हो गए। इसी दौरान हेडकांस्टेबल ब्रजमोहन मीणा ने 2000 रूपए तो बतौर पेशगी रिश्वत राशि ले भी ली। रिश्वत राशि मांगे जाने की पुष्टि होने पर आज एसीबी टीम झल्लारा पहुंची।
यहां हेडकांस्टेबल ने परिवादी हजारीमल रेबारी से 3000 रूपए रिश्वत के ले लिए, इसी के साथ 32 हजार रूपए रिश्वत दलाल जितेन्द्र सुथार ने थानेदार रमेश चन्द्र के कहने पर परिवादी से ले लिए। इसी दौरान एसीबी टीम ने मौके दबिश दी। रिश्वत राशि जब्त की और थानेदार रमेश चन्द्र, हेडकांस्टेबल ब्रजमोहन मीणा और दलाल जितेन्द्र सुथार को गिरफ्तार कर लिया है। जितेन्द्र सुथार पेशे से व्यापारी है और उसकी सेनट्री की दुकान है।
थानाधिकारी ने एमबीसी जवान के पिता से मांग ली थी रिश्वत
पिछले एक महीने में एसीबी की कार्यवाही में उदयपुर के थाना एसएचओ का रिश्वत मांगने का यह दूसरा मामला सामने आया है। झल्लारा एसएचओ रमेश चन्द्र से पहले गोवर्धन विलास थानाधिकारी चेनाराम के खिलाफ भी गत दिनों रिश्वत मांगने का मामला दर्ज हुआ है।
गोवर्धन विलास का यह मामला इसलिए भी चर्चित हुआ, क्यो कि इसमें थानाधिकारी ने रिश्वत भी मेवाड़ भील कोर (एमबीसी) के जवान को गिरफ्तार न करने की एवज में उसके पिता से मांग ली थी। एमबीसी के जवान पर पुलिस वाला बनकर खैर लकड़ी की तस्करी कर रहे व्यक्ति से रिश्वत राशि लेकर गाड़ी छोड़ने का आरोप था। इस मामले में थानाधिकारी चेनाराम रंगे हाथों गिरफ्तार होने से तो बच गए थे, लेकिन रिश्वत मांग की पुष्टि होने पर इनके खिलाफ एसीबी ने मामला दर्ज कर लिया था।

