उदयपुर,(ARLive news)। उदयपुर पर्यटन नगरी में पर्यटकों की पसंदीदा एलीफेंट सफारी के चलते गजराज का झीलों की नगरी में खास महत्व है। लेकिन गत पांच महीनों से आमजन की तरह हाथी भी कोरोना लॉकडाउन की मार झेल रहे हैं। इसी का नतीजा हुआ कि एक गजराज इतने बीमार पड़ गए कि उनके पैरों में खुद का वजन सहने की ताकत नहीं बची और वे खड़े-खड़े गिर गए। अब गजराज हथिनी को हरिदास जी की मगरी में उनके स्थान पर ग्लूकोज की बोतलें चढ़ाई जा रही हैं और क्रेन के सहारे खड़ा किया गया है।
महावत सोहन दास ने बताया कि लॉकडाउन के बाद कमाई बिलकुल खत्म हो गयी। हर दिन हाथी जितना घूमते थे, लॉकडाउन में उनके घूमने को नहीं मिला और आमदनी नहीं होने से हाथियों को भोजन भी पर्याप्त मात्रा में नही मिला। इन दोनों कारणों से हथिनी सोहनकली बीमार हो गयी। पिछले दिनों कमजोरी इतनी ज्यादा हो गयी कि यह खड़े-खड़े ही गिर गयी और मरणासन्न हालात में पहुंच गयी है। हम वन विभाग और पषु विभाग की मदद से इसके उपचार की व्यवस्था की जा रही है।
क्रेन के सहारे खड़ा किया, ठीक नहीं हुई तो आगरा भेजेंगे
क्षेत्रीय पार्षद गिरीश भारती ने बताया कि महावत ने अपनी पूरी पीड़ा बतायी थी। इस पर पषु पालन विभाग और वन विभाग को इस संबंध में सूचना दी गयी है। डॉक्टर की टीम मौके पर आयी है। हाथी सोहन कली को क्रेन के सहारे खड़ा किया गया है और डॉक्टर ने उपचार शुरू कर दिया है। दो दिन इसे ऐसे ही क्रेन के सहारे खड़ा रखने का प्रयास करेंगे, ताकि गिरने के हुए घाव भी ठीक हो जाएं।
अगर दो दिन में यह ठीक हो जाती है, तो अच्छा है, अन्यथा विभाग की मदद से आगरा स्थित हाथी के अस्पताल में भेजेंगे। वन विभाग और पषु पालन विभाग ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। वन विभाग की टीम ने मौके पर पंचनामा भी बनाया है।

