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लापता संविदाकर्मी बुजुर्ग की मौत पुलिस के लिए बनी पहेली: परिजनों ने हत्या का अंदेशा जताया

Udaipur murder mystery in surajpol police stationUdaipur murder mystery in surajpol police station

मेडिकल बोर्ड से हुआ पोस्टमार्टम

उदयपुर,(ARLive news)। आरसीए कॉलेज में कार्यरत संविदाकर्मी बुजुर्ग मांगीलाल मेघवाल (उम्र 63) के 29 जून से लापता होने के बाद आज एकलिंगगढ़ छावनी के गेट के पास पहाड़ी की तरफ झाड़ियों में शव मिलना पुलिस के लिए एक पहेली बन गया है। परिवार सदस्य हालात और परिस्थितियों के अनुसार हत्या की आशंका जता रहे हैं। शव तीन दिन पुराना होने से काफी सड़ गया था, ऐसे में पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।मामला पेचीदा होने से आज मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया है।

एडि.एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने बताया कि वृद्ध आरसीए से सेवानिवृत होकर उसी में वापस संविदा पर काम कर रहे थे। 29 जून को दोपहर आरसीए से नौकरी पूरी कर घर जाने के लिए निकले थे। परिवार ने जो सीसीटीवी फुटेज चेक किए, उसमें वे आखिरी बार 29 जून दोपहर 2 बजे से 2.30 बजे के बीच रेती स्टैंड पर अपनी साइकिल से घर के रास्ते की ओर जाते हुए दिखायी दिए थे, लेकिन इसके बाद वे लापता हो गए। रेती स्टैंड से घर के रास्ते के बीच उनके साथ क्या हुआ, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है।

उनका शव एगलिंग गढ़ छावनी के गेट के पास पहाड़ी की तरफ बाउंड्री वॉल के दूसरी तरफ मिला है। कुछ कपड़े जले हुए हैं। मृतक के जूते, साइकिल नहीं मिली है, हालां कि उनका पर्स, घड़ी, कान में पहनी लौंग सब कुछ था। ऐसे में लूट के लिए हत्या जैसे साक्ष्य नहीं है। परिजनों का कहना है कि मांगीलाल मेघवाल रोज एक ही रास्ते से आते-जाते थे और एकलिंगगढ़ छावनी वाला रास्ता उनके रूट में नहीं था। ऐसे में उनका इस तरफ शव मिलना कई सवाल खड़े करता है। पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।

मृतक के बेटे निर्मल ने कहा, यकीन है, पिता जी की हत्या हुई है, वे उस जगह पहुंच ही नहीं सकते, जहां शव मिला है..!

मांगीलाल के बेटे निर्मल ने बताया कि पिताजी आरसीए से सेवानिवृत हुए थे और इसके बाद वापस आरसीए में ही संविदा पर काम करने लग गए थे। वे रोज सुबह 6 बजे घर से निकल जाते थे और दोपहर 2.30 बजे लौट आते थे। वे अपनी साइकिल से ही आते-जाते थे और उनके आने-जाने का रास्ता भी फिक्स था। बेहद सीधे और शांत स्वभाव होने से किसी के साथ ज्यादा उठना-बैठना नहीं था। वे अपने पास मोबाइल नहीं रखते थे।

हर रोज की तरह 29 जून की सुबह वे घर से निकले थे, उस दिन टिफिन लेकर नहीं गए थे और मां से यह कह गए थे कि टिफिन मत भिजवाना। हर रोज की तरह दोपहर 1.30 बजे वे कॉलेज से निकले। लेकिन घर नहीं पहुंचे। पहले मां ने सोचा कि रास्ते में हमारे नाना जी का घर पड़ता है, उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा है तो वहां चले गए होंगे। रात को मैं जब दुकान से आया तो पिता जी नहीं पाकर उनकी तलाश शुरू की।

सभी रिश्तेदारी में पूछा, वे कहीं नहीं मिले तो थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज करवायी। वे जिस रास्ते से आते-जाते थे, वहां की दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे चेक की तो वे 29 जून दोपहर 1.30 बजे से 2.15 दो बजे के बीच कुम्हारों का भट्टा, माली कॉलोनी वाले रूट पर अपनी साइकिल से घर के रास्ते की ओर आते दिखायी दिए। यह उनका फिक्स रूट था, जिससे वे रोज साइकिल से आते-जाते थे। उन्हें रेती स्टेंड तक तो देखा गया, लेकिन इसके बाद वे नहीं मिले।

किसी परिचित पर संदेह

मृतक के बेटे ने कहा कि पिता जी को उनके ही किसी परिचित ने मारा है। वे कभी किसी अनजान व्यक्ति से बात तक नहीं करते थे, तो रेती स्टेंड के बाद घर के रास्ते से दिन-दहाड़े कहां चले गए। संभव है उन्हें कोई परिचित रास्ते में मिला और वे उसके साथ चले गए। इसके बाद उनके साथ अनहोनि घटना को अंजाम दिया गया और उनका शव बाउंड्री वॉल के पीछे फेंक दी गयी। मृतक के बेटे ने कहा पिताजी इतनी उंची बाउंड्री वॉल चढ़ ही नहीं सकते थे। उन्हें किसी ने कहीं और मारा है और फिर यहां लाकर फेंक दिया।

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