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फतहसागर को नो-व्हीकल जोन बनाने की तैयारी: ऐसे तो हम हो जाएंगे फतहसागर से दूर..?

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उदयपुर,(ARLive news)। झीलों की नगरी के लिए विख्यात उदयपुर की फतहसागर झील सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि लोगों के दिलों और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है। कई लोग तो ऐसे भी हैं कि फतहसागर को सिर्फ देखभर लेने के लिए वहां जाते हैं और फिर निकल जाते हैं। बिना किसी टिकट और खर्चे की एक मात्र जगह “फतहसागर” पर अल्पआय वर्ग का व्यक्ति भी परिवार के साथ आने से हिचकिचाता नहीं हैं।

लेकिन उदयपुर ट्रेफिक पुलिस, यूआईटी और परिवहन विभाग ने पूरे फतहसागर के किनारों को नो-व्हीकल जोन बनाने की तैयार कर ली है। मतलब फतहसागर पर कोई वाहन नहीं जा सकेगा। शहर में एक मात्र बचा पर्यटन स्थल जहां कोई टिकट या खर्चा नहीं है, उस फतहसागर को भी नो-व्हीकल जोन बनाकर प्रशासन इसे अपनी कमाई का जरिया बनाना चाहता है। प्रशासन पार्किंग और ई-रिक्शा के जरिए कमाई करेगा और परेशानियां बढ़ने से उदयपुर की जनता का फतहसागर पर आना कम हो जाएगा।

फतहसागर को सिर्फ एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं नहीं देखा जा सकता है, क्यों कि उदयपुरवासियों का इससे भावनात्मक जुड़ाव भी है। क्यों कि जीवन के हर मुश्किल दौर, कठिन समय और खुशियों को लोग फतहसागर के साथ साझा करते हैं।

आमजन के सामने आ सकती हैं ये परेशानियां

: अल्पआय वर्ग जाने से कतराएगा : यूआईटी का तर्क है कि वे फतहसागर को नो-व्हीकल जोन बनाकर यहां लोगों के लिए ई-रिक्शा चलाएंगे। अब वहां ई-रिक्शा फ्री में तो चलेंगे नहीं। ई-रिक्शा में बैठने वाले को उसका किराया भी चुकाना पड़ेगा। उदयपुर का हर व्यक्ति तो रोज ई-रिक्शा वाले को रूपए दे नहीं सकता, तो उदयपुर के स्थानीय लोग यहां आने से कतराएंगे। फतहसागर भी सिर्फ एक पर्यटन स्थल बनकर रह जाएगा।

: पाल पर बढ़ जाएगी भीड़ : अभी काफी लोग पाल पर आने के बजाए सीधे मुंबईया बाजार, गुरूगोविंद सिंह पार्क, विवेकानंद पार्क और फतहसागर किनारे-किनारे आगे तक चले जाते हैं। लेकिन जब पार्किंग देवाली छोर होगी तो सारी भीड़ पाल पर आकर रूकेगी।

: ट्रेफिक जाम की नयी समस्या खड़ी हो सकती है : फतहपुरा चौकी से फतहसागर देवाली छोर तक सड़क काफी सकड़ी है, इससे यहां आमतौर पर यातायात जाम रहता है। जब फतहसागर के सभी वाहन देवाली छोर पर पार्क होंगे तो वहां ट्रेफिक जाम भारी समस्या हो जाएगी।

: कम हो सकती है मुंबईया बाजार की बिक्री : फतहसागर पर जब लोग आते हैं, तो अभी उनका वहां तक पहुंचने में कोई खर्चा नहीं होता है। इसका असर यह होता है कि लोग वहां मुंबईया बाजार में खाने-पीने पर पैसा खर्च करते हैं। लेकिन जब लोगों का फतहसागर तक पहुंचाना ही खर्चीला हो जाएगा तो उनका आना कम हो जाएगा। मुंबईया बाजार की बिक्री पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

जब यह व्यवस्था अभी है तो नयी व्यवस्था क्यों .?

फतहसागर पाल को नो-व्हीकल जोन बनाया था, जिसका लोगों ने स्वागत किया और और पूरे सम्मान के साथ इसको माना भी था। क्यों कि पाल पर लोग पैदल चलाना पसंद करते हैं और पाल के 800 मीटर पैदल चलने में उन्हें ज्यादा समस्या नहीं थी।

पुलिस ने फतहसागर को वन-वे करने का निर्णय लिया, जिसका भी लोगों ने विरोध नहीं किया। निर्णय स्वीकार किया कि ट्रेफिक की समस्या है, इसलिए यह जरूरी था।

प्रशासन ने सुबह 5 से 9 बजे तक टहलने वालों के लिए फतहसागर को नो-व्हीकल जोन बनाया। लोगों ने इसका भी स्वागत किया कि हां इस समय मॉर्निंग वॉकर्स को समस्या नहीं होनी चाहिए।

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