2 घंटे से ज्यादा मोबाइल गेम खेलना है “खतरे की घंटी”
- केस 1 : 6 जून को कोटा में आर्मी पब्लिक स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र 14 वर्षीय आरएस यशवंत ने फांसी लगा ली। पुलिस को किशोर के परिजनों ने बताया कि बच्चा मोबाइल पर गेम खेलने का शौकीन था। 3 दिन पहले ही पबजी गेम डाउनलोड कर उसी को लगातार खेल रहा था। यहां तक कि वह सुसाइड से पहले भी देर रात 3 बजे तक मोबाइल पर गेम ही खेल रहा था।
- केस 2 : 29 मई को दौसा के कोतवाली थाना इलाके में आठवीं कक्षा के एक छात्र की टिक-टॉक पर फंदा लगाते हुए वीडियो बनाने के दौरान मौत हो गई। 15 वर्षीय विक्रम महावर को टिक-टॉक पर वीडियो बनाने का बेहद शौक था। विक्रम 29 मई रात लगभग 10 बजे अपने कमरे में टिकटॉक के लिए फंदे से लटकने का स्टंट वीडियो बना रहा था। इसी दौरान रस्सी का फंदा गले में कस गया और दम घुटने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
कई शहरों में बैन होने के बावजूद बच्चों के मोबाइल में है पबजी ..!
लकी जैन,(ARLive news)। कोरोना लॉकडाउन ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के साथ ही मोबाइल गेम्स का एडिक्ट भी बना दिया है। बच्चे पढ़ाई करने के बहाने पूरी-पूरी रात हाथ में मोबाइल रखते हैं और ऑनलाइन गेम खेलते रहते हैं। राजस्थान में 10 दिनों में बच्चों के सुसाइड करने के 2 मामले आए हैं, जिसमें एक में बच्चा पबजी खेलते-खेलते इतना एडिक्ट हो गया था कि उसने फांसी लगाकर सुसाइड किया और एक छात्र की टिक टॉक पर फंदा लगाते हुए वीडियो बनाने मौत हो गई
ऐसे में घरों में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ गयी है कि वे ध्यान रखें कि बच्चे अपने मोबाइल में क्या खेल रहे हैं और मोबाइल पर कितना समय बिता रहे हैं। गत वर्ष भारत के तेलंगाना, मुंबई, मध्यप्रदेश में पबजी गेम के कारण किशोर उम्र के बच्चों में अवसाद बढ़ने, सुसाइड करने या पबजी की लत के कारण दुर्घटनाओं का शिकार होने की घटनाएं हुई थीं और इनकी संख्या बढ़ी थी। इस पर मार्च 2019 में देश के कई शहरों में पबजी को प्रतिबंधित कर दिया गया था।
5 से 10 प्रतिशत बच्चों में इंटरनेट मोबाइल गेम का एडिक्शन होता है
एमबी हॉस्पिटल के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील खेराड़ा ने बताया कि मोबाइल पर इंटरनेट गेम खेलना भी शराब की लत की तरह होता है। 5 से 10 प्रतिशत बच्चों में इंटरनेट मोबाइल गेम का एडिक्शन होता है। बच्चे पहले तो कुछ देर खेलते हैं और धीरे-धीरे उनमें यह एडिक्शन बढ़ता चला जाता है। एडिक्ट होने पर बच्चा गेम में दिए जाने वाले इंस्ट्रक्शन फोलो करने लगता है और कभी-कभी बच्चे को गलत इंस्ट्रक्शन मिल जाए तो वे उसे टास्क मानकर सुसाइड का प्रयास तक का जोखिम भी उठा लेते हैं और इसमें कई बार बच्चे की जान तक चली जाती है।
2 घंटे से ज्यादा मोबाइल गेम खेलना खतरे की घंटी है
डॉ. सुशील खेराड़ा बताते हैं कि माता-पिता ध्यान दें कि बच्चे मोबाइल में क्या गेम्स खेल रहे हैं और कितनी देर खेल रहे हैं। बच्चा अगर अधिकतम 1 से 2 घंटे से ज्यादा समय मोबाइल पर इंटरनेट गेम खेलने में बिता रहा है तो यह खतरे की घंटी है। बच्चे को अगर शुरूआत में ही रोक दिया जाए तो वह इस एडिक्शन से बाहर आ सकता है। माता-पिता इस एडिक्शन से बच्चे को बचाने के लिए डॉक्टर्स से भी काउंसलिंग करवा सकते हैं।
लेकिन बच्चा दिन में 5 से 6 घंटे मोबाइल गेम्स खेलने में बिता रहा है तो उसकी यह लत छुड़वाना आसान नहीं होगा। मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों में मानसिक और शारीरिक तकलीफ भी होती है। इससे बच्चों के आखों और ब्रेन की मसल्स में खिंचवा आता है और बच्चों में सिर दर्द, गर्दन में दर्द, आखों में खुजली जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

