जयपुर (ARLive news)। लॉकडाउन श्रमिकों के लिए बहुत गम्भीर परिस्थिति लेकर आया है। भले ही राज्य और केन्द्र सरकारें दावा कर रही हों कि उन्होंने श्रमितकों के लिए बस और रेल चला दी हैं, लेकिन उसके बावजूद हजारों की संख्या में श्रमिक सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर हैं और सैकड़ों किलोमीटर के सफर पर पैदल निकले हुए हैं। इनके साथ गर्भवति महिलाएं भी हैं। गर्भावस्था में जहां एक कदम चलना मुश्किल होता है, वहां 8 और 9 महीने की गर्भवति महिलाएं गांव पहुंचने के लिए पति और बच्चों के साथ सड़कों पर पैदल चल रही हैं।
पैदल निकली, फिर कलेक्टर ने करवायी बॉर्डर तक की व्यवस्था
लंबे लॉकडाउन में आर्थिक हालात खराब होने से मजबूर श्रमिक दीपक कहार अपनी 8 माह की गर्भवती पत्नी सुनीता के साथ जयपुर से 800 किलोमीटर दूर होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) के लिए पैदल चल दिया। लेकिन समय रहते जिला कलक्टर डॉ. जोगाराम को इसकी सूचना मिल गयी। इस पर उन्होंने अन्य अधिकारी को भेजकर उन्हें बस से मध्यप्रदेश की सीमा पर छबड़ा तक भिजवाने की व्यवस्था करवाई।
दंपत्ति मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के रायपुर के रहने वाले हैं। मजदूरी की तलाश में सालभर पहले जयपुर आए थे। हाथोज में निर्माण कार्यों में बेलदारी काम करते थे। कोरोना के कारण जब यहां काम बंद हो गया,तो घर वापसी का फैसला किया। उसने हर जगह आवेदन कर रखा, लेकिन बहुत कोशिशों के बावजूद भी घर जाने का नंबर नहीं आ रहा था, न ही कोई साधन मिल रहा था। ऐसे में दम्पति ने पैदल चलने का फैसला किया।
9 माह की गर्भवती 6 दिन लगातार पैदल चली, चेकपोस्ट से गुजरी, पर मदद नहीं मिली
अहमदाबाद से एक महिला बापूडी ने 9 माह की गर्भवती होने के बावजूद 6 दिन लगातार पैदल चलकर 196 किमी का सफर तय किया है। उसके साथ पति और दो बच्चे थे। महिला और उसका परिवार मध्यप्रदेश में रतलाम जिले के सैलाना के गांव कूपडा के रहने वाले हैं। ये 6 दिन पहले अहमदाबाद से पैदल रवाना हुए थे। रतनपुर बॉर्डर से डूंगरपुर होते हुए टामटिया चेक पोस्ट पर पहुंचे। इस दौरान ये कई चाैकियाें और प्रशासनिक अफसरों के सामने से गुजरी। किसी ने भी इनकी मदद नहीं की। टामटिया चेक पोस्ट पर पहुंचने के बाद अफसरों ने इनके भोजन की व्यवस्था की। साथ ही गर्भवती की जांच एवं स्क्रीनिंग भी की गई। इसके बाद एम्बुलेंस से उनके घर पहुंचाया गया।

