Site iconSite icon AR Live News

मनरेगा की तरह शहरी गरीबों के लिए रोजगार गारंटी योजना लाए केन्द्र : मुख्यमंत्री गहलोत

CM Gehlot Suggestion of urban employment guarantee in PM Modi VC 1CM Gehlot Suggestion of urban employment guarantee in PM Modi VC 1

जयपुर,(ARLive news)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मनरेगा की तर्ज पर ही शहरी क्षेत्रों के लिए भी रोजगार की गारंटी देने वाली योजना शुरू करने का आग्रह किया है। गहलोत ने कहा कि लॉकडाउन के कारण दिहाड़ी पर गुजर-बसर करने वाले, गरीब, मजदूर एवं जरूरतमंद तबके की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्हें रोजगार मिलता रहे, इसके लिए जरूरी है कि केन्द्र मनरेगा की भांति ही शहरी क्षेत्र के लिए भी ऐसी योजना लाने पर विचार करे।

गहलोत सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंस में कोरोना से बचाव, लॉकडाउन तथा इस संकट से मुकाबला करने के लिए सुझावों के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दे रहे थे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत मजदूरों के लिए न्यूनतम 200 दिवस रोजगार उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस समय बेरोजगारी की दर 37.8 प्रतिशत हो गई है जो सर्वाधिक है। इसलिए सामाजिक सुरक्षा पर जोर देना होगा।

मिलकर लड़नी होगी अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने की जंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केन्द्र एवं राज्य सरकारों को दोहरे मोर्चे पर लड़ाई लड़नी है। एक तरफ कोरोना से जीवन बचाने की जंग तो दूसरी तरफ आजीविका बचाने और आर्थिक हालात पटरी पर लाने की लड़ाई। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण केन्द्र एवं राज्यों के राजस्व संग्रहण पर विपरीत असर पड़ा है। केन्द्र की मदद के बिना यह असंभव है कि राज्य इस संकट का मुकाबला कर सकें। इसके लिए जरूरी है कि केन्द्र जल्द से जल्द व्यापक आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध कराए। एमएसएमई, मैन्यूफैक्चरिंग, सर्विस, टूरिज्म, रियल एस्टेट सहित तमाम सेक्टर्स को संबल की जरूरत है। इकोनॉमिक रिवाइवल के लिए जरूरी है कि ऐसे उपाय हों जिससे लोगों की क्रय शक्ति बढे़, उन्हें रोजगार मिले तथा उद्योगों को भी राहत मिले।

राज्यों को मिले जोन निर्धारण की छूट

गहलोत ने कहा कि केन्द्र द्वारा घोषित लॉकडाउन का राज्य सरकारों और आमजन ने पूरी इच्छाशक्ति और संकल्प के साथ पालन किया है। अब अगले चरण में विभिन्न जोन के निर्धारण और प्रतिबंधों को लागू करने का अधिकार राज्यों को मिलना चाहिए। केन्द्र सरकार के मानक दिशा-निर्देशों के अनुरूप रहते हुए राज्यों को यह अधिकार मिले जिससे कि वे स्थानीय स्तर पर यह तय कर सकें कि किन गतिविधियों के लिए उन्हें छूट देनी है और किन को प्रतिबंधित रखना है।

यह सुझाव भी दिए

: किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले इसके लिए जरूरी है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं, चने एवं सरसों की खरीद की सीमा को कृषि उत्पादन के 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किया जाए।

: मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को प्रदेश में टिड्डी के प्रकोप की जानकारी दी और इसके नियंत्रण में सहयोग का आग्रह किया।

: उद्योग एवं व्यापार जगत को व्यापक आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज मिले।

: राज्यों को मिलने वाली ऋण सीमा 3 से बढ़ाकर 5 प्रतिशत हो

: जीएसटी क्षतिपूर्ति को 5 वर्ष और बढ़ाया जाए

: केन्द्रीय योजनाओं में आवश्यकता आधारित आवंटन करने की शर्त नहीं रखें

: 54 लाख लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ मिले

Exit mobile version