चमगादड़ प्रकृति में परागण, बीज संवाहक एवं अन्य कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है
उदयपुर,(ARLive news)। देश के ख्यातनाम पक्षी विज्ञानी एवं राजपूताना सोसायटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री, राजस्थान के संस्थापक व सीईओ डॉ. एस.पी.मेहरा ने दावा किया है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से नहीं फैला है। बल्कि यह लैब में ही बना है। मेहरा ने कोविड-19 के वन्यजीवों के साथ संबंधों व प्रकृति आधारित हस्तक्षेप विषय पर अपने शोध के आधार पर यह दावा किया है। उनका मानना है कि कोरोना वायरस के मनुष्यों में संक्रमण के लिए चमगादड़ या अन्य वन्यजीव को जिम्मेदार मानना सही नहीं है।
उन्होंने डॉ. सरिता मेहरा के साथ किए गए अपने शोध समीक्षा में कोरोना वायरस के विभिन्न प्रकारों और इसके मानव पर प्रभावों का समीक्षात्मक विश्लेषण करते हुए बताया है कि वन्यजीवों को जिम्मेदार मानकर मनुष्य अपनी भूलों पर पर्दा डाल रहा है।
इधर वन विभाग भी चमगादड़ों के संरक्षण के लिए सक्रिय हो गया है। वनकर्मियों कोआदेश है कि वे लोगों को जागरूक करें, ताकि लोग क्षेत्र में मौजूद चमगादड़ों को मारें या भगाएं नहीं
सॉर्स और मर्स संक्रमण भी कोरोना वायरस का एक स्वरूप
डॉ. मेहरा ने बताया कि कोरोना वायरस विषाणु का एक स्ट्रेन है, जो मनुष्य के श्वसन तंत्र में संक्रमण फैलाता है। उन्होंने इक्कीसवीं सदी में कई वायरस के संक्रमण से मानव जाति पर आए हुए खतरे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में सॉर्स नामक संक्रमण ने कई देशों में महामारी फैलाई थी और इसके संक्रमण के लिए सॉर्स कोव-1 को जिम्मेदार माना गया जो कि कोरोना वायरस का एक प्रकार है। इस महामारी ने धीमी गति से अनेक देशों में 8 हजार से अधिक लोगों को संक्रमित किया।
इसी प्रकार वर्ष 2012 में मर्स (मिडिल ईस्ट रेसपिरेटरी सिंड्रोम) नामक संक्रमण ने अनेक मध्यपूर्वी अरेबियन देशों में महामारी को जन्म दिया। मर्स के लिए मर्स कोव वायरस जिम्मेदार माना गया, जो कि कोरोना वायरस का ही एक प्रकार है। इस महामारी से मध्य खाड़ी देशों के 2500 से अधिक लोग संक्रमित हुए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में कोरोना वायरस के एक और नए स्ट्रेन ने सदी के प्रारंभ को भयंकर महामारी में धकेल दिया, इसका कारण सार्स कोव-2 बताया गया। उन्होंने बताया कि सार्स, मर्स और कोरोना वायरस तीनों में तीन समानताएं हैं, एक वायरस, दूसरा श्वसन तंत्र पर संक्रमण तथा तीसरा इसका उत्पत्ति स्थल।
वन्यप्राणी इस वायरस को अपने भीतर रख फैलने से रोकते हैं
उन्होंने बताया कि वन्यप्राणी तो इस वायरस को अपने भीतर रखते हुए उसे फैलने से रोकते हैं। वन्यप्राणियों के किसी भी प्रकार से मनुष्य के सीधे संपर्क में आने पर भी इस वायरस की आक्रामकता नहीं होती है। क्यों कि यह वन्यप्राणी से सीधे मनुष्य में पहुंच ही नहीं सकता। इस स्थिति में चमगादड़ को कोरोना वायरस संक्रमण का जिम्मेदार नहीं हो सकता है।
यहां यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि संपूर्ण प्रकृति में अनेक प्रकार के विषाणु व जीवाणुओं की उपस्थिति है। उन्होंने विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ में उद्घाटित तथ्यों पर बताया है कि वर्तमान कोरोना वायरस मानव द्वारा प्रयोगशाला में तैयार करके सीधे ही मनुष्य में प्रवेश का माध्यम दिया गया अर्थात् यह संक्रमण मानवीय कृत्यों का परिणााम है न कि कोई प्राकृतिक आपदा।
वन विभाग लोगों को कर रहा जागरूक
इधर, वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिन्दम तोमर ने वन विभाग के समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आमजन चमगादड़ को अपने क्षेत्र से हटाने या भगाने का प्रयास कर रहे हैं। चमगादड़ प्रकृति में परागण, बीज संवाहक एवं अन्य कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि इस प्रकार की कोई प्रमाणिक शोध भी अब तक नहीं हुई है जिसमें चमगादड़ों को कोरोना वायरस का कारक माना गया हो। ऐसे में वनकर्मी लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए उन्हें जागरूक करें।

