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कोरोना बम पर भारत : दुनिया में भारत संक्रमण मामले में 17वें स्थान पर, टेस्ट में 146वें स्थान पर

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अमेरिका, इटली, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, यूके जिस अनुपात में टेस्ट कर रहे है, अगर वैसे ही टेस्ट इंडिया में होते तो संक्रमण की वास्तविक स्थिति का सही आंकलन हो पाता..

लकी जैन,(ARLive news)। दुनिया में जहां हर देश कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने की नीति अपना रहा है, वहीं इंडिया कम से कम टेस्ट कर रहा है। इंडिया का टेस्टिंग के मामले में अनुपात देखा जाए तो देश में 10 लाख लोगों पर मात्र 335 टेस्ट हो रहे हैं। जो दुनिया के 215 देशों में 10-12 छोटे-मोटे देश को छोडकऱ सबसे कम अनुपात है।

इसके बावजूद इंडिया कोरोना संक्रमण मामलों में दुनिया के सभी देशों की सूची में 17 वें स्थान पर है। ऐसे में संभावना है कि इंडिया में टेस्ट अनुपात अमेरिका, इटली, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, यूके के जितना भी होता, तो शायद यहां स्थिति वैसी ही भयानक दिख रही होती, जैसी इन देशों में हैं, क्यों कि यहां संक्रमण की वास्तविक स्थिति का पता चल गया होता।

वर्ल्ड मीटर से प्राप्त कोरोना संक्रमण के ग्लोबल आंकड़ों में गौर करने वाली बात एक और है कि जहां संक्रमित मामलों में इंडिया दुनिया के 215 देशों में 17वें स्थान पर है, वहीं 10 लाख पर होने वाले टेस्ट की संख्या के अनुपात में 170 देशों की तुलना में 146 वें स्थान पर है। मतलब 145 देशों ऐसे हैं, जहां कोरोना टेस्ट की दर इंडिया से ज्यादा है। इस लिंक पर जाकर आप खुद भी इंडिया की स्थिति का आंकलन कर सकते हैं। https://www.worldometers.info/coronavirus/#countries

क्या यह कम टेस्ट दर का नतीजा है..?

अभी इंडिया के विभिन्न राज्यों के जिलों में 30 दिन के लॉकडाउन के बाद अब कोरोना संक्रमण के मामले विस्फोटक तरीके से बढ़ रहे हैं। जिन जिलों में लॉकडाउन के 30 दिन के दौरान एक-दो केस की पुष्टि हुई थी, वहां अब एक-एक दिन में 40-50 केस आ रहे हैं। इसका बड़ा कारण माना जा रहा है कि इंडिया में जरूरत के अनुसार टेस्ट नहीं हो रहे हैं, इससे यहां संक्रमण लोगों के बीच है और फैल रहा है, लेकिन टेस्ट कम होने से संकमित लोगों की पुष्टि नहीं हो रही है। अब सवाल है कि जब तक संक्रमण का पता नहीं चलेगा, तो संक्रमितों को आईसोलेट नहीं किया जा सकेगा और इससे संक्रणम फैलता रहेगा। संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार लॉक डाउन की अवधि तो बढ़ा रही है, लेकिन टेस्ट कर संक्रमण की रोकथाम के स्थाई समाधान की तरफ कोई मजबूत कदम नहीं उठा रही है।

सरकारें दावा कर रही हैं कि देश में कोरोना संक्रमण और संक्रमण से मरने वालों की संख्या अन्य विकसित देशों की तुलना में कम है, तो यहां सवाल यह भी है कि टेस्ट दर कम होने से जब ज्यादा से ज्यादा लोगों में संक्रमण का ही पता नहीं चलेगा तो मरने वालों की मौत के कारणों का पता कैसे चलेगा..?

स्क्रीनिंग की नीति अब फेल साबित हो रही..!

अभी तक इंडिया में स्क्रीनिंग की नीति अपनायी जा रही थी, कि घर-घर स्क्रीनिंग में जिस घर के सदस्य में खांसी या कोरोना के गंभीर लक्षण दिखे, उसी का ही कोरोना टेस्ट कर रहे थे। आंगनवाड़ी की आशा ससहयोगिनी आयीं और लिख ले गयीं कि किसी को खांसी बुखार तो नहीं है। इसी स्क्रीनिंग से मान लिया गया कि देश में संक्रमण कम है, सब ठीक है।mलेकिन बीते सप्ताह से ऐसे लोगों में कोरोना की पुष्टि हो रही है, जिनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे। इससे इस बात की संभावना भी बढ़ गयी है कि हमारे बीच कोरोना संक्रमित लोग पहले से ही मौजूद हैं, चूंकि उनमें लक्षण नहीं दिखे, तो उनके टेस्ट नहीं हुए और इसलिए उनके संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई और संक्रमण उनके जरिए फैलता रहा। जो अब लॉकडाउन के 30 दिन बाद विस्फोटक आंकड़ों के साथ सामने आ रहे हैं।

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