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प्रकृति ने मनाया ‘पलाश महोत्सव’ : कोरोना के कहर के बीच मन को सुकून देती “जंगल की ज्वाला”

Udaipur palash mahotsav flame of the forestUdaipur palash mahotsav flame of the forest

उदयपुर,(ARLive news)। में होने वाला राजस्थान का पहला पलाश महोत्सव भले ही लॉकडाउन में नहीं हो सका, लेकिन प्रकृति ने पालश महोत्सव मना ही लिया। प्रकृति ने पलाश के पेड़ों को फूलों से लकदक कर क्षेत्र और पहाड़ियों को पलाश के फूलों से ऐसा भर दिया कि मानों प्रकृति की ज्वाला पहाड़ियों पर धधक रही हो।

कोरोनास के कहर के बीच उदयपुर में मन को सुकून देतीं प्रकृति के सौंदर्य की तस्वीरें

पलाश महोत्वस उदयपुर शहर से मात्र 20 किलोमीटर दूर अहमदाबाद मार्ग स्थित ग्राम पंचायत दईमाता में 4 अप्रेल से होने वाला था। सेवानिवृत सीसीएफ राहुल भटनागर ने बताया कि पलाश महोत्वस ‘ग्रीन पीपल सोसायटी’, वन विभाग और डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ-इंडिया के सहयोग से होना था, लेकिन लॉक डाउन के कारण इसे स्थगित करना पड़ा।ख्यातनाम पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. सतीश शर्मा बताते हैं कि पलाश के फूलों को “फ्लेम ऑफ दी फॉरेस्ट” या “जंगल की ज्वाला” भी कहा जाता है और इन दिनों जब पूरा का पूरा जंगल सिर्फ पलाश के सुर्ख लाल रंग के फूलों से भरा हुआ है तो यह क्षेत्र जंगल की ज्वाला की उपमा को सार्थक कर रहा है।

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