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पहली बार “राज-पासा” में दो बदमाश हुए गिरफ्तार : आलम ऐसा कि 23 साल की उम्र में ही बना हिस्ट्रीशीटर

first time udaipur police arrest two criminals in raj pasa act 2006first time udaipur police arrest two criminals in raj pasa act 2006

उदयपुर,(ARLive news)। जिले में कुख्यात बदमाशों के नियंत्रण के लिए पहली बार दो बदमाशों को राजस्थान प्रिवेंशन ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटी एक्ट-2006 (राज पासा) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इनमें एक बदमाश कुख्यात हथियार तस्कर विष्णु सेन और दूसरा मादक पदार्थ तस्कर आलम खान है। आलम खान 23 साल की उम्र में ही हिस्ट्रीशीटर बन गया था।

2008 में राज-पासा एक्ट बनने के बाद उदयपुर में इस एक्ट के तहत किसी बदमामें की गिरफ्तारी पहली बार की गयी है।

एडि.एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने बताया कि भूपालपुरा मठ निवासी आलम खान पुत्र अखलाख उर्फ बंटी के खिलाफ मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखना, लड़ाई-झगड़ा करने के आरोपों में 19 मामले दर्ज हैं। आलम भूपालपुरा थाने का हिस्ट्रीशीटर है और आदतन अपराधी है। दूसरा बदमाश भरतपुर हाल ब्रह्मपोल, अंबामाता निवावी विष्णु सेन पुत्र सुरेश चन्द्र सेन अंबामाता थाने का हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ हथियार तस्करी, मादक पदार्थ तस्करी, लड़ाई-झगड़े, नकबजनी और डकैती की योजना के आरोप में 25 मामले दर्ज हैं।

दोनों का आपराधिक रिकॉर्ड देखते हुए एसपी कैलाश चन्द्र विश्नोई के निर्देश पर हेडकांस्टेबल सुनील विश्नोई ने दोनों थानों से इनकी जानकारी और आपराधिक रिकॉर्ड की फाइल लेकर इन्हें राज पासा एक्ट के तहत निरूद्ध करने का इस्तगासा तैयार किया गया।

कलेक्टर को राज पासा में निरूद्ध करने की स्वीकृति देने का अधिकार

किसी भी बदमाश पर राजस्थान प्रिवेंशन ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटी एक्ट 2006 लगाने की स्वीकृति का अधिकार सिर्फ जिला कलेक्टर को होता है। एसपी ने दोनों बदमाशों के रिकॉर्ड सहित इस्गासा कलेक्टर के समक्ष प्रेषित किया गया। कलेक्टर को यह अधिकार भी कुछ सीमित समय के लिए राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है। एसपी के यहां से राज पासा के इस्तगासे आने पर कलेक्टर यह अधिकार प्राप्त करने के लिए इस्तगासा राज्य सरकार को भेजा। 22 जनवरी को राज्य सरकार ने कलेक्टर को अधिकार दिया कि वे राज-पासा के तहत बदमाश को निरूद्ध करने की स्वीकृति दे सकती हैं। इस पर कलेक्टर ने इन दोनों बदमाशों आलम खान और विष्णु सेन को राज पासा एक्ट 2006 की धारा 3 (1) के तहत अधिकतम अवधि के लिए निरूद्ध करने के आदेश दिए। इस पर पुलिस ने दोनों बदमाशों को गिरफ्तार किया और न्यायिक अभिरक्षा में सेंट्रल जेल भेज दिया है।

एक साल तक नहीं होगी जमानत

इस एक्ट के तहत प्रावधान है कि इसके तहत जेल गए बदमाश की एक साल तक जमानत नहीं हो सकती है। वह एक साल बाद भी जमानत के लिए हाईकोर्ट में ही आवेदन कर सकेगा।

 

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