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आरटीडीसी के नाम का उपयोग करने पर दर्ज हो सकती है एफआईआर.? जयपुर मुख्यालय गया मामला

udaipur fraud with tourist private handicraft showroom is going on name of RTDCudaipur fraud with tourist private handicraft showroom is going on name of RTDC

उदयपुर,(ARLive news)। सहेलियों की बाड़ी के सामने स्थित निजी हेंडीक्राफ्ट शो रूम राजस्थली टेक्सटाइल के आरटीडीसी (राजस्थान टूरिज्म डवलपमेंट कोरपोरेशन) का नाम यूज करने के मामले में शोरूम संचालक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। इस संबंध में उदयपुर के आरटीडीसी जनरल मैनेजर सुनील माथुर ने आरटीडीसी मुख्यालय से दिशा-निर्देश मांगे हैं।

आरटीडीसी जनरल मैनेजर सुनील माथुर ने बताया कि राजस्थली टेक्सटाइल ने अपने शो रूम पर आरटीडीसी लिखा है, जो सही नहीं है। उसके खिलाफ क्या कार्यवाही करनी चाहिए, इस संबंध में फोटो और डिटेल जयपुर मुख्यालय भेजी है। वहां से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी। पहले जयपुर में भी ऐसा ही एक मामला आया था, तब उस संचालक के खिलाफ निगम ने एफआईआर दर्ज करवायी थी।

यहां सवाल यह है कि विभाग और निगम के अधिकारियों की मर्जी और जानकारी  के बगैर क्या कोई उसके नाम का उपयोग कर सकता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आरटीडीसी और पर्यटन विभाग की उदासीनता के कारण ही पर्यटक इस तरह से ठगे जा रहे हैं..?

सरकार को हो रहा है आर्थिक नुकसान..!

सरकार के हेंडीक्राफ्ट शो रूम उदयपुर में चेतक सर्किल और जगदीश चौक पर स्थित हैं। लेकिन इसकी प्रोपर जानकारी और प्रचार न तो आरटीडीसी और पर्यटन विभाग करते हैं और न ही ऑनलाइन इसकी जानकारी उपलब्ध है। पर्यटकों को इसकी जानकारी ही नहीं होती है। पर्यटक मुख्य पर्यटन स्थल सहेलियों की बाड़ी के सामने स्थित निजी शोरूम पर बड़ा-बड़ा आरटीडीसी लिखा देख उसी को सरकार का हेंडीक्राफ्ट शो रूम समझकर वहां से शॉपिंग करते हैं। इससे सरकार को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

पुलिस-पर्यटक बूथ पर पर्यटन, आरटीडीसी के ब्रॉशर तक नहीं

उदयपुर में पर्यटन विभाग और आरटीडीसी के यह हालात हैं कि इनके ब्रॉशर और जानकारी मुख्य पर्यटन स्थलों पर भी मौजूद नहीं हैं। पर्यटन स्थलों पर मौजूद पुलिस कांस्टेबल ने बताया कि पुलिस ने पर्यटन स्थलों पर पर्यटक बूथ बनाए। खासकर विदेशी पर्यटक यहां आकर अक्सर हमसे पूछते हैं, जो पर्यटन विभाग और आरटीडीसी को प्रचारित करना चाहिए या ब्रॉशर के जरिए बताना चाहिए। पर्यटन विभाग और आरटीडीसी चाहे तो आवश्यक जानकारी व नंबर के ब्रॉशर यहां रख सकते हैं, ताकि देशी-विदेशी पर्यटकों को परेशानी नहीं हो। लेकिन शायद इन विभाग के अधिकारी भी नहीं चाहते हैं कि देशी और खासकर विदेशी पर्यटकों तक ज्यादा जानकारी पहुंचे।

AR Live News ने उठाया है यह मुद्दा

https://arlivenews.com/udaipur-fraud-with-tourist-private-handicraft-showroom-is-going-on-name-of-rtdc-opposite-saheliyon-ki-badi/

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