नई दिल्ली,(ARLive news)। सर्वोच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्यायालयों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एक प्रणाली विकसित करने की संभावना है, यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि न्याय मिलने में होने वाली देरी को रोका जा सके। बोबडे ने अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित मामलों की पृष्ठभूमि को देखते हुए मुकदमेबाजी पूर्व मध्यस्थता करने पर जोर दिया। उन्होंने इसे समय की मांग बताया।
उन्होंने यह बातें न्यायिक अधिकारियों के 19वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन मे कहीं, जिसका की उन्होंने उद्घाटन भी किया।
सीजेआई ने कहा कि अदालतों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि न्याय देने में कोई देरी न हो। उन्होंने कहा, ‘हमें हर प्रतिभा को रोजगार देना चाहिए, हमारे पास मौजूद हर कौशल के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय उचित समयसीमा के भीतर मिल जाए। न्याय में देरी किसी के लिए भी कानून हाथ में लेने का कारण नहीं हो सकती। यह हमारे लिए बहुत जरूरी है कि अदालतें इस बात को सुनिश्चित करें कि न्याय देने में कोई देरी न हो।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमारे पास अदालत प्रणाली के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विकसित करने की संभावना है, केवल यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि न्याय में होने वाली अनुचित देरी को रोका जा सके। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि कि एआई मानव न्यायाधीशों की जगह नहीं लेगा। इस कांफ्रेस का शीर्षक न्यायिक प्रक्रिया पुनरभियांत्रीकरण और न्यायिक कौशल निर्माण’ था। जिसमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मोहन एम शांतनगौदर, एस अब्दुल नजीर और अजीकुट्टिरा सोमैया बोपन्ना और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनीवास ओका सहित अ्य लोग मौजूद थे।

