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दामिनी की मौत के लिए टाइगर कुमार नहीं, अधिकारी जिम्मेदार : रेंजर के भरोसे चल रहा बायोलॉजिकल पार्क

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उदयपुर,(ARLive news)। सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में एनक्लोजर में टाइगरस दामिनी की मौत का पूरा ठीकरा अधिकारियों ने बड़ी सफाई से टाइगर कुमार पर डाल दिया। लेकिन क्या वाकैय टाइगर कुमार ही दामिनी की मौत का जिम्मेदार है, या वो अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने ये परिस्थिति आने दी कि टाइगर कुमार दामिनी के एनक्लोजर में जाली तोड़कर घुस सके।

दामिनी के मौत के बाद गठित कमेटी ने बायोलॉजिकल पार्क के सभी एनक्लोजर्स की जालियों की जांच शुरू कर दी है। इसमें पहले दिन बड़े वन्यजीव टाइगर, लॉयन, पैंथर के एनक्लोजर्स की जांच की जा रही है, जांचा जा रहा है कि एनक्लोजर्स की जालियां मजबूत हैं या नहीं। इस कारण दो दिन ये सभी वन्यजीव नॉन डिस्प्ले एरिया में रहेंगे और पर्यटक इन्हें दो दिन नहीं देख सकेंगे। इसके बाद सभी वन्यजीवों के एनक्लोजर्स में लगी जालियों की जांच कर मजबूती परखी जाएगी। यहां सवाल यह है कि अधिकारी अब जालियों की मजबूती परख रहे हैं तो इस काम को करने में पहले लापरवाही क्यों बरती गयी, क्यों कागजी खानापूर्ति हुई।

रेंजर के भरोसे चल रहा है बायोलॉजिकल पार्क

सज्जनगढ़ पर करोड़ों का खर्च कर बनाए भवन में क्यों नहीं बैठते अधिकारी

सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के उद्घाटन के बाद से डीएफओ वाइल्ड लाइफ का ऑफिस रानी रोड से सज्जनगढ़ गेट पर करोड़ों की लागत से बने भवन में शिफ्ट हो गया था। यह व्यवस्था इसलिए की गयी थी कि आईएफएस स्तर का अधिकारी डीएफओ पूरे समय सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क की गतिविधियों पर नजर रख सकेगा और हर दिन विजिट भी कर सकेगा।

बायोलॉजिकल पार्क के उद्घाटन के समय डीएफओ टी. मोहनराज ने अपना कार्यालय सज्जनगढ़ के गेट पर बनाए भवन में शिफ्ट कर लिया था और उनके साथ पूरा स्टाफ भी वहीं आ गया था। लेकिन गत वर्ष डीएफओ हरिणी वी. ने सज्जनगढ़ से अपना कार्यालय वापस शिफ्ट कर दिया और रानी रोड स्थित वन विभाग के पुराने कार्यालय में पहुंच गए। उनके साथ एसीएफ सहित अन्य स्टाफ भी चला गया। बायोलॉजिकल पार्क पर मॉनीटरिंग के लिए वहां सिर्फ रेंजर बचे।

जहां देश के विभिन्न बायोलॉजिकल पार्क के लिए अलग से डीएफओ लगाए जाते हैं, वहीं उदयपुर का सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क रेंजर के भरोसे चल रहा है। जबकि यहां देश के विभिन्न हिस्सों से लाए गए 30 से अधिक प्रतिजातियों के 80 से 90 वन्यजीव यहां हैं।

एक साल से नहीं हो रही प्रोपर मॉनीटरिंग

इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर थानेदार को उसके क्षेत्र के बजाए एसपी की जिम्मेदारी देकर पूरे जिले की व्यवस्था सौंप दी जाए तो क्या होगा..? हर पद पर अधिकारी-कर्मचारी का चयन उसकी योग्यता के अनुसार होता है और हर पद का कार्य, पद की कार्य क्षमता, अधिकार अलग-अलग होते हैं। बायोलॉजिकल पार्क में अव्यवस्थाओं का आलम इसलिए हुआ कि पिछले एक साल से यहां अधिकारियों की मॉनीटरिंग कम होती चली गयी। रेंजर साहब अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहे होंगे, लेकिन जैसे डीएफओ रेंजर का काम नहीं कर सकता, वैसे ही रेंजर साहब से यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वे डीएफओ के अधिकार क्षेत्र जितना काम करें।

एक और बात पिछले दिनों से वर्तमान डीएफओ वाइल्ड लाइफ अजीत उचोई विवाह के चलते अवकाश पर चल रहे हैं। ऐसे में पिछले दिनों से यहां एक भी डीएफओ नहीं हैं। डीएफओ की जिम्मेदारी भी एसीएफ संभल रहे हैं, उनके अधिनस्थ अधिकारी एसीएफ के कंधो पर है।

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