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पेटीएम से फास्टटैग ऑर्डर करने पर हुई धोखाधड़ी : यहां का फास्ट टैग चेन्नई में एक्टिव

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उदयपुर,(ARLive news)। फास्टटैग को लेकर आमजन टोल नाकों पर तो परेशान हो रही रहा है, अब फास्ट टैग खरीदने में भी उसके साथ धोखाधड़ी हो रही है। उदयपुर के ही गायरियावास निवासी रमेश सुथार के साथ धोखाधड़ी हुई है। रमेश सुथार के पास फास्ट टैग नहीं है, और वे उनकी कार से किसी हाईवे या टोल तक गए भी नहीं हैं, लेकिन उनके खाते से टोल राशि कट रही है। क्यों कि उनकी गाड़ी नंबर और पेटीएम अकाउंट से जुड़ा फास्टटैग किसी और को अलॉट कर दिया गया है और वह अब चेन्नई में एक्टिव है।

यहां गड़बड़ी बड़ी होने का अंदेशा इसलिए भी है क्यों कि जब उदयपुर के रमेश का फास्ट टैग किसी चेन्नई की गाड़ी को ईशू हुआ तो चेन्नई वाले का फास्ट टैग भी किसी के पास पहुंचा होगा और उस तीसरे का फास्ट टैग किसी चौथे के पास। ऐसे में यह गड़बड़ी कितनी बड़ी है इसका अंदाजा तो पेटीएम प्रबंधन को ही होगा।

गायरियावास निवासी रमेश ने बताया कि उन्होंने 24 नवंबर को पेटीएम पर फास्ट टैग खरीदने के लिए ऑर्डर किया था। ऑर्डर करते समय फास्ट टैग से जोड़ने के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी नंबर RJ27-CF6210, पेटीएम अकाउंट डिटेल सहित सभी जरूरत की जानकारी दी थी। पेटीएम की ओर से फास्ट टैग उनको 29 नवंबर को मिलना था। फास्ट टैग नहीं आया तो उन्होंने पेटीएम कस्टमर केयर पर बात की, तो उन्होंने अग्रिम तारीख दी, उन तारीखों पर भी जब फास्ट टैग नहीं आया तो रमेश ने 11 दिसंबर को अपना पेटीएम पर फास्ट टैग ऑर्डर कैंसल कर दिया और पेटीएम ने उनके खाते में रूपए भी वापस कर दिए। इसके बाद वे नेगड़िया स्थित टोल नाके पर बैंक प्रतिनिधि से फास्ट टैग खरीदने पहुंचे तो उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया में पता चला कि उनकी गाड़ी नंबर से फास्ट टैग पहले से ही ईशू हो रखा है।

शिकायत के बाद भी कट रही टोल राशि, पेटीएम पर नहीं हो रही सुनवायी

इस पर रमेश ने पेटीएम कस्टमर केयर पर बात की तो पता चला कि उनका फास्ट टैग किसी अन्य को डिस्पेच कर दिया था। 18 दिसंबर को रमेश ने पेटीएम कस्टमर केयर पर शिकायत की तो जवाब आया कि अगले चार वर्किंग डे में वो फास्ट टैग बंद हो जाएगा। इसके बाद 20 दिसंबर को रमेश के खाते से चैन्नई के वानाग्राम टोल प्लाजा पर दो बार में 40 रूपए और 20 रूपए कुल 60 रूपए का टोल कट चुका है। रमेश 21 दिसंबर से रेगुलर हर दिन पेटीएम पर शिकायत कर रहे हैं और मेल भी कर चुके हैं, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बावजूद उनकी गाड़ी नंबर से किसी और को अलॉट हुआ फास्ट टैग अभी तक बंद नहीं हुआ है और उनके खाते से टोल कट रहा है।

दुरूपयोग का डर

पीड़ित रमेश सुथार को चिंता इस बात की भी है कि कहीं उनकी गाड़ी नंबर और अकाउंट से जुड़े फास्ट टैग का उपयोग किसी गैर कानूनी गतिविधि में न हो जाए। उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, पेटीएम या फास्ट टैग बनाने वालों की गलती के कारण वे किसी परेशानी में न आ जाएं।

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