उदयपुर,(ARLive news)। पीछोला नदी के जल स्त्रोत अमरजोक नदी पेटे की जमीन पर अरावली रिसोर्ट का सड़क बना देना और इस नदी पेटे की जमीन का ताज अरावली के लिए 90-ए कर देने का मामला अब एसीबी में दर्ज हो गया है। एसीबी यूआईटी के उन सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी जिन्होंने ताज अरावली के लिए नदी पेटे की जमीन का 90-ए किया और ताज अरावली को स्वीकृति दे दी। एसीबी मुख्यालय ने मामला दर्ज कर जांच एसीबी की उदयपुर यूनिट को सौंपी है।
गत महीनों में शहर में बूझड़ा स्थित ताज अरावली रिसोर्ट का मामला उजागर हुआ था, जिसमें रिसोर्ट की परमीशन लेने के लिए रिसोर्ट संचालकों ने पास में गुजर रही अमरजोक नदी पेटे में सड़क बना दी। आरोप है कि इस मामले में सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार की शुरूआत तब हुई जब यूआईटी के अधिकारियों ने मिलीभगत कर नदी पेटे की जमीन की 90-ए तक कर दी।
गौरतलब है कि यूआईटी में ताज अरावली रिसोर्ट को अनुमति और नदी पेटे की जमीन का 90-ए करने की प्रक्रिया तत्कालीन यूआईटी सचिव उज्जल राठौड़ और वर्तमान कार्यकारी सचिव बाल मुकुंद असावा के दौरान हुई है। तत्कालीन पटवारी ने इसकी रिपोर्ट यूआईटी को सौंपी है। इसमें ताज अरावली रिसोर्ट की परमीशन के लिए ईशान क्लब एंड होटल्स के निदेशक राजीव आनंद और कार्यकारी निदेशक साहिल आनंद ने यूआईटी में एप्लीकेशन लगायी थी। ऐसे में एसीबी इन सभी अधिकारियों, इनके अधिनस्थ कर्मचारियों और ईशान क्लब एंड होटल्स के निदेशक और कार्यकारी निदेशक की भूमिका और इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों की गहनता से जांच करेगी।
फैक्ट: जो फाइल यूआईटी में तीन बार रिजेक्ट हुई, वह यूआईटी सचिव बदलते ही आनन-फानन में कैसे पास हो गयी..?
: अक्टूबर 2014 में ताज अरावली रिसोर्ट ने ईशान क्लब एंड होटल्स के निदेशक राजीव आनंद ने परमीशन के लिए सबसे पहले यूआईटी में एप्लीकेशन लगायी थी।
: 26 फरवरी 2015 को यूआईटी ने नियमों का हवाला देकर एप्लीकेशन खारिज कर परमीशन देने से मना कर दिया था और तर्क दिया था कि रिसोर्ट की अनुमति के लिए 40 फीट का पहुंच मार्ग होना जरूरी है, जो कि नहीं है।
: ताज अरावली रिसोर्ट के प्रबंधकों ने तहसीलदार के यहां फाइल लगायी।
: अप्रेल 2015 में तहसीलदार ने भी फाइल रिजेक्ट कर दी थी।
: 2015 में ताज अरावली के प्रबंधकों ने मूल खातेदारों भाई-बहन खेमराज, केसरीबाई पिता दीता गमेती से तहसीलदार के फैसले के खिलाफ संभागीय आयुक्त न्यायालय में अपील करवाई।
: सितंबर 2015 में संभागीय आयुक्त न्यायालय ने निर्णय किया और आदेश दिए कि पूर्व भू प्रबंध अनुसार एवं साबिक आराजी के नक्शा अनुसार रास्ते की भूमि का राजस्व रिकॉर्ड में अंकन किया जाए। मार्गाधिकार को सुरक्षित एवं जनोपयोगी बनाने और नदी प्रवाह को निर्बाध रूप में रखने के लिए यूआईटी और जल संसाधन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों को बताए अनुसार गुणवत्तापूर्ण कराया जाए।
संभागीय आयुक्त के आदेश के बाद भी रिजेक्ट हुई रिसोर्ट की फाइल
: इस आदेश के बाद फरवरी 2017 में ताज अरावली के ईशान क्लब एंड होटल्स के कार्यकारी निदेशक साहिल आनंद ने संभागीय आयुक्त के फैसले का हवाला देकर फिर से यूआईटी में परमीशन की फाइल लगायी।
: अप्रेल 2017 में यूआईटी सचिव ने इस मामले में अग्रिम कार्यवाही के लिए तहसीलदार को पत्र लिखकर मार्गदर्शन चाहा।
: जुलाई 2017 में यूआईटी ने ईशान क्लब एंड होटल्स प्रबंधन को पत्र लिखकर सूचित किया कि खसरा संख्या 106 ग्राम बूझड़ा अमरजोक नदी का ही खसरा होने से इसके पेटे से विधिक व तकनीकी एवं सुरक्षा की दृष्टि से बारहमासी रास्ता दिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में वर्तमान स्थिति में आपका आवेदन निरस्त किया जाता है।
: 2018 में ईशान क्लब की ओर से कोई फाइल नहीं लगायी जाती है।
यूआईटी सचिव मेहता के ट्रांसफर होने के बाद पास करवा ली फाइल
: रिसोर्ट की फाइल का बार-बार रिजेक्शन 2014 से जुलाई 2018 तक यूआईटी सचिव रहे रामनिवास मेहता के कार्यकाल के दौरान हुआ। विधानसभा चुनाव से पहले हुए तबादलों में तत्कालीन यूआईटी सचिव रामनिवास मेहता का ट्रांसफर हो गया। नए यूआईटी सचिव उज्जल राठौड़ ने पदभार ग्रहण किया।
: विधानसभा चुनाव के बाद मार्च 2019 में ईशान क्लब एंड होटल्स की ओर से यूआईटी में फिर एक बार “2015 में हुए संभागीय आयुक्त के आदेश” का हवाला देकर फाइल लगायी जाती है।
: ताजुब्ब की बात है कि अब 2019 में यूआईटी के अधिकारी (“इस फाइल के 2017 में खारिज होने के आदेश को अनदेखा कर”) आनन-फानन में इसे स्वीकृति देने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं और नदी पेटे की जमीन का 90ए तक कर देते हैं।

