उदयपुर,(ARLive news)। मादड़ी स्थित पंजाब नेशनल बैंक में 19 लाख 72 हजार रूपए की डकैती डालने वाले गिरोह के ईनामी बदमाश देचू जोधपुर निवासी मगदान पुत्र राणीदान चारण को उदयपुर पुलिस ने पूणे से गिरफ्तार कर लिया है। डकैती में उपयोग हुई कैंपर गाड़ी मगदान केे नाम पर ही रजिस्टर्ड है और यही गाड़ी लेकर आया था। वारदात के बाद मगदान ने यह गाड़ी जोधपुर-बाड़मेर बॉर्डर स्थित एक गांव में छुपा दी थी और फिर आगे फरार हुआ था। मगदान की निशानदेही पर टीम इस कैंपर गाड़ी तक पहुंच गयी है।
: खासबात यह है कि गिरोह इतना शातिर और खतरनाक है कि पुलिस को देखकर उस पर फायरिंग या हमला करने से गुरेज नहीं करता। डकैती में मौके पर मौजूद बदमाश मगदान चारण को पकड़ने वाले कांस्टेबल कुलदीप को मगदान ने कई जगह बरी तरफ से काट लिया। कुलदीप की पकड़ से निकलने के लिए मगदान ने उसकी पीठ, हाथों पर कई जगह ऐसा काटा कि मांस तक नोंच लिया। हालां कि कुलदीप ने उसे पुलिस जाब्ता के आने तक मजबूती से पकड़े रखा।
: इससे पहले थानाधिकारी हनुवंत सिंह को बदमाश प्रदीप गुर्जर की गोलियों का सामना करना पड़ा था। मुख्य बदमाश प्रदीप गुर्जर को पकड़ने पुलिस टीम जब अलवर गयी थी, तब थानाधिकारी हनुवंत सिंह ने अपनी कार से प्रदीप गुर्जर की जीप का 20 किलोमीटर तक पीछा किया था। इस दौरान प्रदीप गुर्जर ने थानाधिकारी हनुवंत सिंह पर तीन राउंड फायर किए थे, जवाब में हनुवंत सिंह ने भी प्रदीप पर 8 राउंड फायर किए थे। हालां कि तब प्रदीप गुर्जर बाजरे के खेतों में घुस गया था और बड़ी-बड़ी फसल के बीच छुपकर फरार हो गया था। तब पुलिस ने प्रदीप के साथी को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने दिखायी सतर्कता नहीं तो भाग जाता कर्नाटक्
पुलिस अधीक्षक कैलाश चन्द्र विश्नोई ने बताया कि मगदान पीएनबी बैंक में हुई डकैती में मौके पर वारदात करने वाले बदमाशों में शामिल था। पुलिस वारदात में शामिल बदमाशों की तलाश कर रही थी, तभी बदमाशों को भागने में मदद करने और शरण देने वाले आरोपियों से पूछताछ और मोबाइल लोकेशन के आधार पर मगदान के बड़ौदा में होने का पता चला। थानाधिकारी हनुवंत सिंह के नेतृत्व में टीम बड़ौदा पहुंची, तब तक मगदान पूणे फरार हो चुका था। इस पर टीम पूणे पहुंच गयी। जिस रात मगदान पकड़ा गया, उसी रात वह पूणे से धारवाड़, कर्नाटक रवाना होने वाला था। लोकल सोर्स, पुलिस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस मगदान तक पहुंच गयी और उसे गिरफ्तार कर लिया।
एसपी ने बताया कि मामले में अब तक गिरफ्तार हुए आरोपियों और बदमाश मगदान चारण की गिरफ्तारी में थानाधिकारी हनुवंत सिंह के नेतृत्व में कांस्टेबल कुलदीप, उपेन्द्र सिंह, किरण और राजेन्द्र सिंह की सराहनीय भूमिका रही है। इनको पुरस्कृत करवाने के लिए जयपुर मुख्यालय डीजीपी को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पुलिस को लुटेरा बता भागने का प्रयास किया
पुलिस ने बताया कि मगदान की तलाश में जुटी पुलिस टीम में सबसे पहले उदयपुर कांस्टेबल कुलदीप उस तक पहुंचा था। पूणे में एक ब्रिज के नीचे कुलदीप ने उसे पकड़ लिया। पुलिस सादा वस्त्रों में मगदान का पीछा कर रही थी, तो मगदान भी सादा वस्त्रों में था। इस पर मगदान ने कुलदीप को लुटेरा बताकर भीड़ इकट्ठी कर ली और बच कर भागने का प्रयास किया। भीड़ मगदान को छुड़ाती, इससे पहले कांस्टेबल कुलदीप ने भीड़ को बताया कि वह पुलिस वाला है और यह बदमाश है और बैंक डकैती में वांछित। भागने के लिए मगदान ने कुलदीप के हाथों में कई जगह काट खाया। हालां कि वह कांस्टेबल कुलदीप के चंगुल से खुद को छुड़ा नहीं पाया। कुछ देर बाद स्थानीय पुलिस और उदयपुर की पुलिस टीम भी वहां पहुंच गयी।
डकैती में दस बदमाश, हिस्से में डेढ़ से दो लाख रूप्ए आए
जानकारी के अनुसार मादड़ी में हुई बैंक डकैती में करीब दस बदमाश शामिल थे। इसमें एक जोधपुर की दयाल गैंग और दूसरी गुर्जर की 6161 गैंग है। इनमें 6 बदमाश बैंक के अंदर गए थे, दो बदमाश गाड़ी में थे और तीन ने इन बदमाशों के डकैती के बाद भागने और शरण देने के इंतजाम करवाए थे।
बदमाश डकैती के दो दिन तक उदयपुर ही रहे थे। वारदात कर ये मुख्य बदमाश मांगीलाल के साथ ग्रामीण रास्तों से होते हुए कुराबड़ और फिर मंदसौर पहुंचे थे। मंदसौर में दस बदमाशों के बीच लूट की 19 लाख 72 हजार रूपए राशि का बंटवारा किया था। सभी बदमाशों को डेढ से दो लाख रूपए उनके वारदात में रिस्क लेवल के आधार पर मिले थे।
मंदसौर से सभी बदमाश अलग-अलग हो गए थे। गुर्जर की 6161 गैंग के जयपुर निवासी प्रदीप गुर्जर, भिवाड़ी निवासी विनोद गिरोह के अन्य बदमाशों के साथ जयपुर चले गए, वहीं दयाल गैंग का जोधपुर निवासी दयाल सिंह पुत्र मनोहर सिंह और मगदान सिंह जोधपुर पहुंचे थे। गिरफ्तार हो चुका उदयपुर के कुराबड़ का मांगीलाल इन दोनों गैंग के बदमाशों से जेल में मिला था।

