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क्या राजनीतिक दबाव में हुआ है प्रतापनगर के दो हेडकांस्टेबलों का निलंबन ?

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शिकायत की जांच किए बगैर हुई निलंबन कार्यवाही विभाग में चर्चा का विषय

उदयपुर,(ARLive news)। प्रतापनगर के हेडकांस्टेबल गोविंद सिंह और सुनील विश्नोई पर जिस परिवाद में अनियमितता बरतने का आरोप है, वह परिवाद उदयपुर के दो प्रतिष्ठित परिवारों से जुड़ा हुआ है। आईजी को शिकायत करने वाला शिकायतकर्ता पूर्व एमपी का बेटा पंकज रोत है, ऐसे में यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि क्या आईजी ने शिकायत की जांच कराए बगैर थाने के दो हेडकांस्टेबल का निलंबन किसी राजनीतिक दबाव में किया है ?

इधर पंकज रोत से परेशान सरकारी अस्पताल की महिला डॉक्टर ने भी उसके खिलाफ स्त्री लज्जा भंग करने के आरोप में आईपीसी की धारा 354 ख, 354 घ, 427, 506, 509 के तहत मामला प्रतापनगर थाने में दर्ज करवा दिया है।

दोनों परिवारों की पृष्ठभूमि : दोनों परिवार ही प्रतिष्ठित 

पंकज रोत एक्स एमपी जयनारायण रोत का मंझला बेटा और महिला कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी की महासचिव शारदा रोत का देवर है। पंकज रोत की उम्र करीब 45 साल है और वह तलाकशुदा बताए जाते हैं।

महिला उदयपुर के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर है। इनके पति भी डॉक्टर हैं और बेटा विदेश में एमबीबीएस कर रहा है। बताया जा रहा है कि महिला के ससुर राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य रह चुके हैं। महिला की उम्र भी करीब 45 से 50 साल की है।

7 महीने पहले से शुरू हुआ परिवाद का घटनाक्रम

पंकज और महिला का परिचय करीब तीन-चार साल पहले हुआ था। पंकज, महिला और उसके पति तब से अच्छे परिचित थे और एक-दूसरे के घर आना जाना भी था। गत वर्ष इनके बीच झगड़ा हो गया और दोनों के बीच के रिश्ते खराब हो गए।

जानकारी के अनुसार सात महीने पहले जनवरी 2019 में एसपी ऑफिस के जरिए प्रतापनगर थाने को एक परिवाद जांच के लिए मिला था। यह परिवाद गुमनाम था और इसमें महिला के पर कई आरोप थे। उन दिनों महिला और पंकज रोत के बीच विवाद हुआ ही था, तो महिला ने संदेह जताया था कि यह परिवाद उसके खिलाफ पंकज रोत ने ही किया होगा। इसमें महिला पर कई अन्य आरोप भी लगाए गए थे। तब पुलिस ने पंकज रोत को बयान के लिए थाने बुलाया था।

परिवाद की जांच तत्कालीन प्रतापनगर थानाधिकारी हनुवंत सिंह ने हेडकांस्टेबल गोविंद सिंह को सौंपी थी। दोनों ही प्रतिष्ठित परिवार होने से इनके बीच समझाइश करने भी कुछ प्रतिष्ठित लोग थाने पहुंचे। इसके चलते तत्कालीन थानाधिकारी हनुवंत सिंह ने हेडकांस्टेबल गोविंद सिंह के साथ हेडकांस्टेबल  सुनील विश्नोई को दोनों पक्ष सुनने की जिम्मेदारी सौंपी।

हेडकांस्टेबल गोविंद सिंह और सुनील विश्नोई दोनों एक साथ दोनों पक्षों को सुन रहे थे। महिला, उसके पति और पंकज रोत को थाने पर बुलाया गया। समझाइश करने पर दोनों पक्ष ही समझौते के लिए मान गए। पंकज ने लिख कर दिया कि उसने कोई परिवाद नहीं किया था और महिला ने भी कहा कि वह भी कोई कार्यवाही नहीं चाहती। पुलिस ने दोनों पक्षों की रजामंदी से परिवाद का निस्तारण कर दिया। पंकज रोत का कहना है कि जनवरी में हुए समझौते के दौरान पंकज ने महिला को 5 लाख रूपए दिए थे। 

सात महीने बाद क्यों वापस फिर हुआ विवाद ?

सात महीने बाद गत दिनों पंकज ने फिर महिला से संपर्क करना चाहा और समझौते के समय दिए गए पांच लाख रूपए की बात वापस से आ गयी। इस पर दोनों के बीच फिर से विवाद शुरू हो गया। चार दिन पहले शनिवार को पंकज रोत आईजी बिनीता ठाकुर के सामने पेश हुआ और आरोप लगाया कि पुलिस कर्मी सुनील विश्नोई और गोविंद सिंह ने महिला के साथ मिलकर उससे 5 लाख रूपए हड़प लिए थे। आईजी बिनीता ठाकुर ने पंकज रोत की शिकायत ली और मामले को गंभीर मानते हुए तथ्यों की बिना जांच कराए ही दोनों हेडकांस्टेबलों को निलंबित कर दिया है।

इधर महिला ने सोमवार शाम प्रतापनगर थाने में पंकज रोत के खिलाफ स्त्री लज्जा भंग करने के आरोप में एफआईआर दर्ज करवा दी है। महिला का आरोप है कि पंकज रोत उसका पीछा करता है, मिलने के लिए दबाव डालता है और उसके पति व बेटे को भी मैसेज कर परेशान कर रहा है। मंगलवार को महिला भी आईजी बिनीता ठाकुर के सामने पेश हुई और उसने अपनी पीड़ा बयां की।

दोनों परिवारों के लिए ही यह ठीक नहीं हुआ : शारदा रोत

पंकज रोत की भाभी और महिला कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी महासचिव शारदा रोत ने बताया कि दोनों ही परिवार प्रतिष्ठित हैं। जो हुआ वह सही नहीं हुआ है। जब सात महीने पहले दोनों पक्षों में समझौता हो गया था तो पंकज भईया को 5 लाख रूपए वापस नहीं मांगने चाहिए थे और कोई शिकायत नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने इस संबंध में हमसे भी कोई चर्चा नहीं की। पंकज भईया से बात करूंगी कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। जब समझौता हो गया था तो महिला को भी मामला दर्ज नहीं करवाना चाहिए था। इससे दोनों ही परिवारों की प्रतिष्ठा खराब हो रही है।

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