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बेजुबानों का आशियाना खतरे में : नगर निगम ने तो आशियाना उजाड़ने भेज दी थी टीम

udaipur cattle egretudaipur cattle egret

उदयपुर,(ARLive news)। देश-दुनिया में तो पर्यावरण संरक्षण के कई प्रयास हो रहे हैं, तो उदयपुर में इसे उजाड़ने से किसी को कोई गुरेज नहीं हैं। सार्वजनिक पार्क में लगे एक हरे-भरे बबूल के पेड़ को कुछ लोग इसलिए कटवाना चाहते हैं कि उस पर सैंकड़ों बगुले, उनके घौसलें और अंडे हैं और इससे पार्क में गंदगी हो रही है। कॉलोनी के कुछ लोगों ने सैकड़ों पक्षियों का आशियाना उजाड़ने के लिए नगर निगम में शिकायत एप्लीकेशन भी दे दी, हद तो तब हुई जब अक्सर कई-कई एप्लीकेशन के बाद भी हरकत में नहीं आने वाले नगर निगम ने मात्र एक एप्लीकेशन पर पेड़ कटवाने के लिए टीम को भेज दिया।

हालां कि सैकड़ों पक्षियों, उनके घौंसले और अंडों को देखकर पेड़ काटने या छंगाने गयी टीम को रहम आ गया और वह वापस लौट गयी। यह स्थिति तब है जब पक्षियों ने अपना आशियाना सार्वजनिक स्थान पर लगे हरे-भरे पेड़ को बनाया है। लेकिन पक्षियों के आशियानों पर अब मनुष्य रूपी गिद्धों की नजर पड़ चुकी है और यह आशियाने कब तक सुरक्षित रह सकेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता है।

लोगों ने फैलाया कचरा, पक्षियों का उजड़ रहा आशियाना

पक्षी प्रेमी विनय दवे ने बताया कि सेक्टर 4 स्थित जैन मंदिर के पास एक उजाड़ सार्वजनिक पार्क है। यहां लोगों ने गंदगी का ढेर बनाया हुआ है। इसी पार्क में एक बबूल का पेड़ है। ब्रीडिंग सीजन के चलते इस पेड़ पर कई बगुलों (कैटल इग्रेट) ने अपने घौंसले बनाए हैं और यहां अंडे भी दिए हुए हैं। पेड़ के नीचे इन पक्षियों की बीट भी गिरती है। गत दिनों हुई बारिश से लोगों द्वारा फैलाया गया कचरा और बीट वहां कीचड़ बन गया और बदबू आने लगी। अब कॉलोनी के कुछ लोगों का कहना है कि इन पक्षियों की बीट के कारण यहां बदबू आ रही है, ऐसे में इस पेड़ को कटवाओ, ताकि ये पक्षी यहां से चले जाएं।

कॉलोनीवासियों ने न तो खुद के स्तर पर उस पार्क की सफाई करने का प्रयास किया और न ही नगर निगम को उस पार्क में फैले कचरे को साफ करने की एप्लीकेशन दी। कॉलोनीवासियों ने नगर निगम में पेड़ की कटाई की एप्लीकेशन जरूर दे दी, ताकि पेड़ कट जाएगा तो पक्षी भी यहां नहीं रहेंगे। नगर निगम की टीम मौके पर पहुंच भी गयी, लेकिन उसे पक्षियों के घौंसले, अंडे देखकर रहम आ गया।

डूंगरपुर में ऐसे ही पेड़ कटा था तो एनजीटी ने दिए थे कार्यवाही के आदेश

करीब तीन साल पहले डूंगरपुर में भी ऐसा ही वाक्या हुआ था। वहां रोड साइड बबूल के पेड़ थे, मानसून में ब्रीडिंग सीजन होने से सैकड़ों बगुलों ने अपना आशियाना बनाया था। वहां कई घौंसले थे और अंडे थे। पीडब्ल्यूडी ने रोड निर्माण के दौरान बिना सोचे-समझे उन पेड़ों को काट दिया था, जिससे कई पक्षी मर गए थे और उनके अंडे नष्ट हो गए थे। पक्षी प्रेमियों ने इस मुद्दे को उठाया। मुद्दा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक पहुंचा था। जहां एनजीटी ने ठेकेदार के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही के आदेश दिए थे। इसके बाद कलेक्टर ने पुराने पेड़ों को मदर ट्री घोषित किया था।

जब मछली पकड़ना प्रतिबंधित तो इनके घौंसले कैसे तोड़ सकते हैं

मानसून सीजन के चार महीनों में मछलियों का आखेट करना प्रतिबंधित होता है, अगर ऐसा कोई करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही होती है। यह इसलिए होता है कि मानसून मछलियों का ब्रीडिंग सीजन है। जब मछलियों के लिए कानून है, तो पक्षियों के ब्रीडिंग सीजन के दौरान उनके घौंसलों और अंडों को कोई कैसे नष्ट कर सकता है।

नगर निगम को सूचित कर दिया है, पेड़ नहीं काटा जाएगा

मामला ध्यान में आया है। पेड़ पर अभी कई पक्षियों के घौंसले और अंडे हैं। नगर निगम और यूआईटी दोनों को इस बारे में अवगत करवा दिया गया है कि इस पेड़ को नहीं काटा जाए।

राहुल भटनागर, सीसीएफ वाइल्ड लाइफ

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