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ब्रेकिंग : शराब के तीन ट्रक छोड़ने की एवज में राजस्थान पुलिस ने गुजरात पुलिस से लिए 20 लाख रूपए ?

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पुलिस के बीच हुई इस सौदोबाजी का क्षेत्र “आबूरोड से पालनपुर बॉर्डर” बताया जा रहा है ?

प्रशांत दयाल (राजस्थान/अहमदाबाद, ARLive news)। पुलिस का नाम अक्सर तस्करी के लिए ले जाए जा रहे अवैध शराब से भरे ट्रकों को पकड़ने के लिए लिया जाता है, लेकिन इस बार ऐसा वाक्या हुआ है, जिसने राजस्थान और गुजरात दो राज्यों की पुलिस का नया चेहरा सामने किया है।

हुआ यूं कि 23 मई (जिस दिन लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो रहे थे), गुजरात पुलिस ने राजस्थान की महंगी शराब तीन ट्रकों में भरकर गुजरात मंगवाई। शराब के तस्करी होने की सूचना राजस्थान के बॉर्डर एरिया की पुलिस को लग गयी और उसने तीनों ट्रक पकड़ लिए। इन ट्रकों में गुजरात पुलिस के दो जवान बैठे थे। ट्रकों में बैठे पुलिस के जवानों को देखकर राजस्थान पुलिस अधिकारी और जवान सकते में आ गए। फिर शुरू हुआ सौदेबाजी का खेल। गुजरात पुलिस के एक इंस्पेक्टर के कहने पर राजस्थान पुलिस की टीम तीनों ट्रक छोड़ने के लिए तैयार तो हो गयी, लेकिन 40 लाख रूपए की मांग की। हालां कि सौदा 20 लाख रूपए में तय हुआ और जैसे-तैसे गुजरात पुलिस इंस्पेक्टर ने राजस्थान पुलिस के संबंधित अधिकारी को 20 लाख रूपए देकर तीनों ट्रक छुड़वा लिए।

राजस्थान पुलिस बच रही, गुजरात में चर्चा का विषय

मामला तब खुला जब इसकी भनक गुजरात पुलिस के मुख्यालय में लग गयी। बताया जा रहा है कि गुजरात पुलिस के अधिकारी इस मसले की जांच कर रहे हैं। दो ट्रक शराब तो मार्केट में जा चुकी है, हालां कि एक ट्रक गुजरात पुलिस ने बरामद कर लिया है और राजस्थान पुलिस को भी इस संबंध में सूचना दी गयी है। हालां कि पुलिस अधिकरी इस मसले से बचने का प्रयास कर रहे है।

राजस्थान पुलिस भले ही इससे बचने का प्रयास कर रही हो, लेकिन गुजरात के पुलिस महकमे में यह चर्चा का विषय बना हुआ है। सभी कह रहे हैं कि गुजरात पुलिस खुद दारू के धंगे में लिप्त है, शराब बंदी तो सिर्फ आम आदमी पर लागू है।

आबू-रोड से पालनपुर बॉर्डर एरिया का यह वाक्या ?

सूत्रों के अनुसार यह पूरा वाक्या राजस्थान के सिरोह जिले स्थित आबू रोड से गुजरात के पालनपुर बॉर्डर एरिया का बताया जा रहा है। हालां कि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। सिरोही के एसपी कल्याणमल मीणा से जब इस संबंध में बात की गयी तो “23 मई और शराब के ट्रक सुनते ही बिना पुरी बात सुने, “जानकारी नहीं होना” कहकर फोन काट दिया”। मानो वे इस बात से बचने का प्रयास कर रहे हों।

पहले भी उदयपुर में हो चुके हैं ऐसे मामले

तस्करी के लिए ले जाए जा रहे अवैध शराब से भरे ट्रक को पकड़कर छोड़ने की एवज में राजस्थान पुलिस द्वारा लाखों रूपए मांगने के वाक्ये पहले भी हो चुके हैं। करीब चार साल पहले गोवर्धन विलास थाना क्षेत्र में दो जवानों ने ट्रक को रोका था और सूनसान क्षेत्र में खड़ा करवाकर छोड़ने की एवज में सौदेबाजी की थी।

इससे पहले 2012-13 में इस संबंध में उदयपुर में एसीबी ट्रेप तक हो चुका है। उदयपुर पुलिस के दो जवानों ने अवैध शराब से भरे ट्रक को रोका था और छोड़ने की एवज में रूपए मांगे थे। ट्रक मालिक ने इसकी सूचना एसीबी को दी थी और एसीबी ने पुलिस जवान को तस्करों से रूपए लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसमें जवानों को संरक्षण देने में उच्च अधिकारियों के नामों का भी खुलासा हुआ था।

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