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हनी ट्रैप मामला : पत्रकारों को थाने से जाने दो, फिर दोनों वकीलों को छोड़ देंगे…!

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पुलिस के इस रवैये से यह भी अंदेशा कि कहीं इस मामले की आग की लपटें पुलिस तक तो नही आ रहीं ?

उदयपुर,(ARLive news)। उदयपुर में हनी ट्रैप मामले का खुलासे के चंद घंटों बाद ही पुलिस ने मौके से पकड़े गए दोनों वकीलों को मात्र एक नोटिस जारी कर छोड़ दिया है। दोनों वकील अशोक टांक और देवेन्द्र कुमावत के सपोर्ट में बार एसोसिएशन के कई वरिष्ठ वकील थाने पहुंच गए थे। दो घंटे वकीलों और एडि.एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा के बीच बातचीत हुई।

इस बातचीत के दौरान यह तय हुआ कि “थाने में अभी काफी पत्रकार मौजूद हैं, इन्हें थाने से जाने दो, फिर वकीलों को छोड़ देंगे। इसके बाद थाने में मौजूद सभी वकील नाटकीय ढंग से थाने से चले गए। फिर पुलिस ने मीडिया को ब्रीफ किया। वकीलों से हुई बातचीत के अनुसार ही पुलिस ने थाने में मीडिया को दिए स्टेटमेंट में वकीलों को नोटिस जारी कर छोड़ने की बात नहीं कहीं थी। जैसे ही मीडिया थाने से गयी पुलिस ने दोनों वकीलों को थाने से छोड़ने की प्रक्रिया नोटिस जारी कर की। “यह जानकारी भी थानाधिकारी के चैंबर में मौजूद बार एसोसिएशन के वरिष्ठ वकीलों में से किसी एक ने दी है।” 

पुलिस ने दोनों वकीलों को सीआरपीसी की धारा 41 के तहत नोटिस जारी कर दिया है। पुलिस का कहना है कि तफ्तीश में इन दोनों की भूमिका पायी गयी तो आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया जाएगा। वकीलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस अधिकारी इस मामले में पकड़ी गयी महिलाओं का रिकार्ड खंगाले तो इनमें से एक लड़की का बांसवाड़ा में इसी प्रकार का हनी ट्रेप केस मिल सकता है। बांसवाड़ा में तब पुलिस ने इस महिला के साथ वकील को भी गिरफ्तार किया था। हांला कि अभी तक पुलिस ने दोनों महिलाओं के किसी भी पुराने रिकॉर्ड की जानकारी नहीं दी है और रिकॉर्ड पता करवाने की बात कही है।

ऐसा क्या हुआ कि पकड़ने वाली पुलिस ही पक्ष में आ गयी ?

दोनों वकीलों को रात को ही थाने से छोड़ देने पर यह तथ्य भी उजागर होता है कि इस पूरे मामले में पुलिस शुरूआत से ही वकीलों के पक्ष में खड़ी थी। लेकिन सवाल बार-बार यही आता है कि ऐसा क्या हुआ कि वकीलों को पकड़ने वाली पुलिस ही उनके पक्ष में आ गयी। खुद एसपी कैलाश चन्द्र विश्नोई के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इन दोनों वकीलों को ब्लैकमेलिंग कर रही महिलाओं के साथ मौके से व्यवसायी से 11 लाख रूपए लेते पकड़ा था।

पुलिस मौके से दोनों महिलाएं और दोनों वकील को सीधे थाने लेकर आयी थी और व्यवसायी ने पुलिस को रिकॉर्डिंग भी पेश की थी। जब यहां तक सब ठीक था, तो वरिष्ठ वकीलों से हुई मीटिंग में ऐसा क्या हुआ कि पुलिस बैकफुट पर आ गयी ? कहीं ऐसा तो नहीं है कि इस हनी ट्रैप रैकेट मामले की आग पुलिस तक आ रही हो ? कहीं ऐसा तो नहीं है कि पुलिस अधिकारी अपने विभाग का नाम बचाने के लिए वकीलों को छोड़ने के लिए मजबूर हो गए ?

जयपुर में ब्लैकमेलर महिलाओं सहित वकील भी हुए थे गिरफ्तार

खैर दो साल पहले जयपुर में भी ऐसे ही गिरोह का खुलासा हुआ था। पुलिस विभाग के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने ऐसे ही हनी ट्रैप गिरोह का खुलासा किया था। खासबात है कि इसमें वही मॉडस ऑपरेंडी अपनायी गयी थी, जो  उदयपुर में हुए इस मामले में सामने आ रही हैं। जयपुर के मामले में तो पुलिस अधिकारियों ने ब्लैकमेलर महिलाओं सहित वकील को भी आरोपी बना गिरफ्तार किया था और कुछ थानाधिकारी की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उनको लाइन हाजिर कर दिया गया था। लेकिन यहां पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया, बल्कि मौके से पकड़े जाने के बावजूद दोनों वकीलों को मात्र नोटिस देकर छोड़ दिया।

अब क्या कोई शिकायत कने की हिम्मत जुटा पाएगा ?

कुछ पुलिस अधिकारियों और कुछ वकीलों इस रवैये से शहर शर्मिंदा हुआ है। अंदेशा है कि इससे अब ऐसे दूसरे गिरोहों को उदयपुर में पनपने की खुली छूट मिलेगी, क्यों कि उन्हें यह भरोसा होगा कि पुलिस अधिकारी उनका कुछ नहीं बिगाड़ेंगे। इस पूरे मामले में वह पेट्रोल पंप मालिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा होगा, जिसने इनके खिलाफ खड़े होने और इसकी शिकायत करने की हिम्मत जुटायी।

जानकारो के अनुसार ऐसा गिरोह शहर में पिछले करीब डेढ़ साल से सक्रिय है, लेकिन कभी किसी व्यवसायी ने आगे आकर शिकायत करने की हिम्मत नहीं दिखाई। अब जिसने दिखाई उसके मामले में क्या हुआ, यह सबके सामने आ ही गया। ऐसे में अब भविष्य में शायद ही कोई हिम्मत कर पाएगा, इन जैसे अवैध वसूलियां करने वाले गिरोह के खिलाफ खड़े होने की। यही हालात रहे तो शहर में बहुत जल्द अवैध वसूलियों का धंधा चरम पर पहुंच जाएगा।

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