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सीएम ममता ने कहा – सत्ता में आएंगे तो होगी नोटबंदी की जांच

mamta benrjiकोलकाता,(ARLive news)। तृणमूल प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि युनाइटेड इंडिया फ्रंट केंद्र की सत्ता में आता है तो नोटबंदी की जांच कराई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में नोटबंदी की जांच होगी। ममता ने बुधवार को अपने कालीघाट आवास से लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी का 67 पेज वाले चुनावी घोषणा पत्र जारी किया। जिसमें ममता ने कई चुनावी वादे किए हैं।

यह घोषणा पत्र बांग्ला, अंग्रेजी व हिंदी के बाद छह अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में जारी किया गया है। तृणमूल के घोषणा पत्र में केंद्र की मोदी सरकार की नाकामियों और बंगाल सरकार की उपलब्धियों को जमकर गिनाया गया है। घोषणा पत्र में 12 अहम काम को अलग से प्रेस विज्ञप्ति के रूप में जारी किया गया है।

तृणमूल प्रमुख ने कहा कि योजना आयोग की खत्म कर दिया गया। युनाइटेड इंडिया फ्रंट सत्ता में आता है तो नीति आयोग को खत्म कर योजना आयोग को बहाल किया जाएगा और जीएसटी की भी समीक्षा की जाएगी। मनरेगा के तहत सौ दिनों के काम को दो सौ दिन कर दिए जाएंगे ताकि गरीबों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके। उनका जीवन स्तर सुधारने के लिए मजदूरी भी बढ़ाकर दोगुनी कर दी जाएगी। एससी व एसटी के सभी रिक्त पदों को भरा जाएगा।

युनाइटेड इडिया फ्रंट चुनाव बाद अपना साझा न्यूनतम कार्यक्रम तय करेगा। तृणमूल कांग्रेस उसमें संघीय ढांचा को मजबूत करने वाले कदम उठाने का प्रस्ताव देगी। योजना आयोग पहले बैठकों में राज्यों के प्रतिनिधियों को बुलाता था। राज्यों की समस्याएं सुनी जाती थी। लेकिन अचानक जिस तरह योजना आयोग को खत्म किया गया उससे संघीय ढांचा का आघात पहुंचा है। सभी को साथ लेकर चलना और संघीय ढांचा को मजबूत करना उनका मुख्य लक्ष्य होगा।

स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाया जाएगा ताकि लोगों का जीवन स्तर सुधर सके। घोषणा पत्र में पश्चिम बंग सुशासन नजीर शीर्षक से 47 से लेकर 67 पृष्ठों तक सरकार की उपलब्धियां गिनाई गई है।

मुख्यमंत्री ममता ने 67 पृष्ठ के चुनाव घोषणा पत्र में अधिकांश हिस्सा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की विफलता को दर्शाने और भाजपा की आलोचना करने में खर्च किया है। मोदी सरकार की पांच वर्ष की विफलता शीर्षक अध्याय में 20 से 28 यानी कुल लगभग 9 पृष्ठों में केंद्र सरकार की खामियों को उजागर करने में खर्च किया गया है। किसानों की दुर्दशा बयान करते हुए कहा गया है कि मोदी के पांच सालों के शासन में 36 हजार 420 किसानों ने आत्महत्या की है। बैंकों की एनपीए बढ़ा है। नोटबंदी से आम लोगों की परेशानी बढ़ी है और बेरोजगारी में वृद्धि हुई है।

सोर्स: जीएनएस न्यूज एजेंसी

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