पर्स स्नेचिंग : बदमाश पर्स लूट कर ले गए, 10 हजार रूपए और दस्तावेज थे।
यहां ताजुब्ब यह रही कि महिला ने एफआईआर में जो हालात बताए वे लूट और छीना-झपटी के हैं, लेकिन पुलिस ने एफआईआर लूट या छीना-झपटी से संबंधित धाराओं में दर्ज करने बजाए इसे मात्र धमकाने की धारा आईपीसी की धारा 384, 34 के तहत ही दर्ज किया है।
यह है वारदात का घटनाक्रम
अरनोद प्रतापगढ़ निवासी आयुषी पुत्री निरंजन कोठारी मरूधरा बैंक में मैनेजर है। वह बीती शाम को अपने भाई के साथ शौभागपुरा चौराहा स्थित कनोट पैलेस गई थी। वे कनोट पैलेस के बाहर रूके ही थे कि पीछे से बाइक पर दो बदमाश आए और आयुषी पर झपट्टा मारकर उसका पर्स छीन कर ले गए। आयुषी के पर्स में 10 हजार रूपए, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज थे। महिला ने पुलिस को सूचना दी और एफआईआर दर्ज करवाई।
महिला ने बताया कि एक बदमाश ने मुंह पर कपड़ा बांधा हुआ था और दूसरा हेलमेट पहने था। दोनों 20-25 साल के युवक लग रहे थे और एक ने पीले रंग का टीशर्ट पहना हुआ था।
यह स्पष्ट लूट का मामला है, पुलिस ने गलत धारा लगाई
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वकील भरत जोशी ने बताया कि जो घटनाक्रम युवती ने एफआईआर में लिखवाया है, उसके अनुसार यह स्पष्ट लूट का मामला है और इसमें आईपीसी की धारा 392 में मामला दर्ज होना चाहिए। पुलिस ने इसमें आईपीसी की धारा 384 गलत लगाई है। धमकाने से संबंधित मामला (किसी ने किसी को धमकी दी) हो तो वह धारा 384 के तहत दर्ज होता हैं।
कहीं थाना क्षेत्र के अपराध के आंकड़े बेहतर करने का प्रयास तो नहीं ?
पुलिस विभाग में अलग-अलग अपराधों को वर्गों में बांटा गया है। इसमें लूट गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इससे पुलिस का रिकॉर्ड भी खराब होता है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि थानाधिकारी थाना क्षेत्र में लूट की वारदात आंकड़ों में लेकर नहीं आना चाहते हों ? ताकि आंकड़ों में उनकी परफोरमेंस बेहतर दिखे। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी कारण से थाना पुलिस ने लूट की वारदात को धमकाने की धाराओं में दर्ज कर लिया हो ?
पुलिस के इस प्रयास का अपराधियों को मिलता फायदा
आईपीसी की धारा 384 : इस धारा के तहत अपराधी को 3 वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है।
आईपीसी की धारा 394 : इस धारा के तहत अपराधी को अधिकतम 10 वर्ष के कारावास का प्रावधान है।
