जानकारी के अनुसार यह सजा आईएएस और आरएएस अधिकारी को उत्तरी सुंदरवास स्थित शिवकुंज गली के वर्धमान नगर में मकान नंबर बी-12 और बी-13 पर कथित अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के बाद मिले स्टे के बाद दोबारा उन्हीं मकानों पर जाकर सड़क चौड़ी करने के लिए के नाम से तोड़-फोड़ करने के आरोप में मिली है। स्टे के बावजूद नगर निगम के इन अधिकारियों ने मौके पर जाकर बी-12 और बी-13 के मकान में तोड़-फोड़ की थी।
ऐसे समझें पूरा मामला :
: 23 जनवरी 2004 को उक्त मकानों पर नगर निगम की टीम ने कार्यवाही की।
: 20 मई 2005 को उक्त मकान मालिकों को स्टे मिला, ताकि नगर निगम सड़क, नाली निर्माण न करे।
: 16 जुलाई 2008 को नगर निगम की टीम उक्त मकानों पर दोबारा पहुंची, आगे और तोड़-फोड़ की।
: 9 फरवरी 2009 को उक्त मकान मालिकों ने स्टे के बावजूद हुई तोड़-फोड़ पर सिविल न्यायाधीश शहर उत्तर कोर्ट में न्यायालय के आदेश के अवमानना की याचिका लगाई।
: 8 मार्च 2019 को टीम के साथ स्टे के बावजूद मौके पर तोड़-फोड़ करने गए अधिकारियों को सजा सुनाई।
: 8 मार्च 2019 को ही नगर निगम के वकील ने सजा पर रोक लगाने की याचिका लगाई।
: 8 मार्च 2019 को ही कोर्ट ने दोनों अधिकारियों की सजा पर एक महीने के लिए स्टे दिया है।
प्रकरण विस्तार :
प्रकरण के अनुसार चंदर सिंह नाहर का बी-12 और महेन्द्र कुमार मेहता का बी-13 मकान है। 23 जनवरी 2004 को नगर निगम के उक्त अधिकारियों ने मौके पर टीम के साथ जाकर इन दोनों मकानों की 6 फीट की बाउंड्री वॉल और लोहे का मेन गेट तोड़ दिया था। नगर निगम तोड़-फोड़ के बाद उक्त जमीन पर कोई सड़क या नाली निर्माण न करे इसलिए दोनों प्रार्थी चंदर सिंह और महेन्द्र कुमार कोर्ट में गए थे। जहां 20 मई 2005 को इन्हें कोर्ट से स्टे मिल गया। स्टे के बावजूद 16 जुलाई 2008 को नगर निगम के उक्त अधिकारी कर्मचारियों को लेकर दोबारा मौके पर पहुंचे और बी-12 व बी-13 के मकान की पूर्व में ध्वस्त की गई बाउंड़ी वॉल से चार फीट अंदर तक जाकर तोड़-फोड़ कर सेफ्टी टैंक भी ध्वस्त कर दिया। मौके पर प्रार्थी ने अधिकारियों को स्टे के दस्तावेज दिखाए, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी और कार्यवाही जारी रखी और कहा कि उन्हें रोड 15 फीट चौड़ी करनी है। इस पर दोनों मकान मालिकों ने स्टे होने के बावजूद मौके पर तोड़-फोड़ की कार्यवाही कर कोर्ट अवमानना करने के आरोप में उक्त अधिकारी और इनकी टीम के खिलाफ 9 फरवरी 2009 को सिविल न्यायाधीश शहर उत्तर कोर्ट में याचिका लगाई। इस पर कोर्ट ने सुनवाई कर कोर्ट के आदेश की अवमानना के आरोप में नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त हाल प्रोटोकॉल अधिकारी महावीर खराड़ी और तत्कालीन सीईओ जोगाराम जांगीड़ को 8 मार्च 2019 को आज एक माह के सिविल कारावास की सजा सुनाई और प्रार्थियों को दोनों अधिकारियों के कारावास के दौरान जीवन का जीवन निर्वाह भत्ता जाम करवाने के आदेश दिए।
नगर निगम के वकील अशोक सिंघवी ने इस आदेश के बाद सजा पर रोक लगाने और अग्रिम कार्यवाही के लिए मौका दिए जाने का प्रार्थनापत्र इसी कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आज ही यह प्रार्थना स्वीकार किया और एक महीने के लिए सजा पर स्टे दिया है।
