प्रकरण के अनुसार 19 जुलाई 2012 को खेमराज पुत्र दुधाजी डांगी ने सुखेर थाने में रिपोर्ट दी थी कि मेरे घर के सामने उदयलाल डांगी के घर का काम चल रहा था। घर पर बाहर मिट्टी का काफी भराव डाला हुआ था, इससे उदयलाल डांगी के पुत्र भरत और जगदीश मेरे काका शंकरलाल से रंजिश रखते थे। 19 जुलाई की शाम शंकरलाल डांगी शौभागपुरा सौ फीट रोड से होकर घर की तरफ जा रहे थे। तब रास्ते में जगदीश और भरत ने मेरे काका शंकर को रोका और उन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उनकी हत्या कर दी, इसके बाद दोनों खून भरे चाकू के साथ मेरे घर पर आए और हमें धमकाया और परिवार के अन्य सदस्यों के आने पर दोनों घर से भाग गए थे।
पुलिस ने मामले की तफ्तीष कर चार्जशीट पेश की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने जगदीश और भरत डांगी को आजीवन कारावास और दोनों पर अलग-अलग 1 लाख 5 हजार 500 रूपए के अर्थदंड और प्रवीण डांगी को आजीवन कारावास और एक लाख रूपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आदेश दिया कि अभियुक्तों से प्राप्त अर्थदंड की राशि में से 2 लाख 70 हजार रूपए मृतक के परिवारजन को बतौर क्षतिपूर्ति दिया जाए और शेष राशि को अभियोजन व्यय के रूप में जमा कराई जाए।
