Site iconSite icon AR Live News

रफाल के आरोपों से घिरे पीएम मोदी : रफाल सौदे से क्यों हटाया गया “एंटी करप्शन क्लॉज”

द हिंदू समाचार पत्र में दस्तावेजों के साथ हुए खुलासे के बाद राहुल गांधी ने मोदी पर साधा निशाना। 

नई दिल्ली,(ARlive news)। रफाल सौदे में मोदी सरकार पर लग रहे आरोपों के बीच एक नया खुलासा हुआ है, इसमें स्पष्ट हुआ है कि रक्षा खरीद प्रक्रिया (डिफेंस प्रिक्योरमेंट प्रोसीजर) के मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाले इंटीग्रिटी क्लॉज मतलब भ्रष्टाचार विरोधी शर्त को रफाल सौदे में तय की गई शर्ताें से हटा दिया गया था।

इसका खुलासा द हिंदू समाचारपत्र 11 फरवरी के अंक में दस्तावेजों के साथ किया है। समाचार पत्र में खबर के साथ वे दस्तावेज भी छापे गए हैं, जो यह बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त आदेशों के आधार पर सबसे महत्वपूर्ण शर्त इंटीग्रिटी क्लॉज को खरीद प्रक्रिया से हटा दिया गया था। इस पर इंडियन नेगोशिएशन टीम ने आपत्ति भी जताई थी।

रफाल सौदे को लेकर द हिंदू अखबार के 8 फरवरी को हुए खुलासे के बाद 11 फरवरी की इस खबर में नए खुलासे हुए हैं, जिससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि रफाल सौदे में सब कुछ ठीक नहीं था। इससे पहले 8 फरवरी को द हिंदू ने खबर प्रकाशित कर खुलासा किया था कि रफाल सौदे में फ्रांस की कंपनियों के साथ इंडियन नेगोशिएशन टीम के अलावा प्रधानमंत्री कार्यलय की एक दूसरी टीम भी समानांतर नेगोशिएशन कर रही थी और इस पर भी आईएनटी की टीम ने आपत्ति की थी। एक के बाद एक हो रहे नए खुलासों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फिर एक बाद प्रधानमंत्री को रफाल सौदे पर घेरा है और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया है।

“राहुल का कहना है कि राफेल सौदे से जुड़ा एक ईमेल सामने आया है। इस ईमेल में अनिल अंबानी का जिक्र है। राहुल ने आरोप लगाया कि राफेल सौदे से पहले अनिल अंबानी फ्रांस के रक्षा मंत्री से मिले। राहुल गांधी ने ईमेल की कॉपी भी दिखाई।

प्रधानमंत्री मोदी अनिल अंबानी के मिडिल मैन की तरह काम कर रहे थे। राहुल गांधी ने कहा कि अनिल अंबानी ने फ्रांस के रक्षा मंत्री को सौदे की जानकारी दी। यानी उन्हें पहले ही पता था। जबकि एचएएलए डिफेंस मिनिस्टर और विदेश सचिव को भी यह नहीं पता था। पीएम को यह बताना चाहिए कि आखिर अनिल अंबानी को डील से 10 दिन पहले ही कैसे सब पता चल गया।” 

जानिए कौन सी शर्त हटाई

द हिंदू की खबर के मुताबिक रफाल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में रक्षा मामले की मंत्री मंडल समिति खरीद प्रक्रिया में कुछ शर्तों को शामिल किया था, जिसमें इंटीग्रिटी क्लॉज भी शामिल था। लेकिन रक्षा मंत्रालय की ही दूसरी समिति ने इंटीग्रिटी क्लॉज की शर्तों को हटा दिया।

रक्षा खरीद प्रक्रिया 2013 के तहत हर तरह की रक्षा खरीद के लिए तय किया गया था कि प्रक्रिया में इंटीग्रिटी क्लॉज होगा, लेकिन इसे बाद में हटा दिया गया था। सवाल है कि आखिरकार सरकार ने क्यो एक ऐसी शर्त को हटाया, जो प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को होने से रोकती।

इंटीग्रिटी क्लॉज भ्रष्टाचार विरोधी शर्त है। इस शर्त के प्रक्रिया में शामिल होने से अगर इसमें कोई भी भ्रष्टाचार होता या कोई रिश्वत ली या दी जाती तो भ्रष्टाचारी इसमें दंडित हो सकते थे। लेकिन भारत सरकार ने खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार विरोधी शर्त को खरीद प्रक्रिया से हटाकर फ्रांस की दोनों कंपनियों दासो और एमबीडीए को इस शर्त से छूट दे दी थी।

इस शर्त को हटाने पर रफाल सौदे में डील कर रही इंडियन नेगोशिएशन टीम आईएनटी के तीन बड़े अधिकारी एमपी सिंह, एआर सुले और राजीव वर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि भ्रष्टाचार विरोधी शर्त हटाने से जो कमर्शियल सप्लायर है, उनसे सीधे बिजनेस का रास्ता खुल जाएगा, इन तीन अधिकारियों ने आपत्ति में स्पष्ट लिखा था कि जब खरीद दो सरकारों के बीच हो रही है, तो फ्रांस सरकार इन कंपनियों पर इसे कैसे टाल सकती हैं, जब फ्रांस सरकार जवाबदेही नहीं लेगी तो दो सरकारों के बीच डील का क्या मतलब रह जाता है। यही नहीं ऐसा करना वित्तीय ईमानदारी की बुनियादी शर्ताें से समझौता करना है, जो उचित नहीं होगा।

Exit mobile version