महिला की जान पर आई, चार दिन से एमबी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती।
हाथीपोल निवासी पीड़ित महिला चंदा और उसके परिजनों की मांग है कि गर्भ होने के बावजूद नसबंदी करने वाली डॉक्टर नाजिमा के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। इधर डॉक्टर नाजिमा ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि महिला 28 दिसंबर को आई थी, “उसने कहा था कि माहवारी नहीं आई है, दस दिन चढ़ गई हूं।” दस दिन में गर्भ का पता चलता नहीं है, इसलिए हमने उसकी नसबंदी का ऑपरेशन कर दिया था।
हाथीपोल निवासी पीड़ित महिला चंदा पत्नी शंकर ने बताया कि मेरे दो बच्चे हैं। दिसंबर में माहवारी की तारीख आने के दस दिन बाद भी मासिक धर्म शुरू नहीं हुआ था। गर्भवती होने की आशंका पर मैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ 28 दिसंबर को सेटेलाइट हॉस्पिटल गई। वहां डॉक्टर नाजिमा से मिली। उनको मैंने बताया था कि दस दिन चढ़ गई हूं, तो सफाई (अबॉर्शन) और नसबंदी करवानी है। इस पर उन्होंने सफाई की जरूरत नही समझी और सीधे नसबंदी कर दी। इसके बाद मैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ ही घर आ गई थी। गत दिनों बार-बार तबियत खराब होने और उल्टियां होने पर परिजनों के साथ अस्पताल आकर चेकअप करवाया तो पता चला कि तीन महीने का गर्भ है। हम डॉक्टर नाजिमा से मिले तो उन्होंने कहा कि नसबंदी हो चुकी है तो अब बच्चे को जन्म देना होगा और बच्चा ऑपरेशन से होगा, उपचार के लिए अब कहीं और मत जाना, मैं ही नौ महीने तक चेकअप कर ऑपरेशन करूंगी। महिला चंदा ने बताया कि मेरे दो बच्चे हैं और मेरी इतनी आर्थिक स्थिति नहीं हैं कि मैं तीसरे बच्चे का लालन-पालन कर सकूं। तब डॉक्टर नाजिमा ने बताया कि अब तुम्हारा यहां ऑपरेशन नहीं हो सकता है।
चंदा ने बताया कि डॉक्टर नाजिमा से बात होने के बाद हमने थाने में रिपोर्ट दी, तो पुलिस ने कहा पहले इलाज करवा लो, इसके बाद रिपोर्ट लेंगे। इस पर परिजन मुझे एमबी हॉस्पिटल लेकर आए। यहां ऑपरेशन हुआ और चार दिन से अस्पताल में भर्ती हूं।
सुनिए पीड़िता की ननद क्या कहती है…
