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प्रधानमंत्री ने उद्घाटन का समय नहीं दिया तो बदलना पड़ा ट्रेन का नाम : ट्रेन-18 से हुई वंदे भारत

यह रेलवे की पहली स्वदेशी ट्रेन है।

नई दिल्ली,(ARlive news)। भारत की अब तक की बेहतरीन बताए जाने वाली ट्रेन-18 का नाम अब वंदे भारत रख दिया गया है। इस नाम के बदलने के पीछे भी एक कहानी है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक ट्रेन 2018 में ही चलने के लिए तैयार थी। जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी को करना था। लेकिन रेलवे द्वारा लगातार उद्घाटन की तारीख मांगने के बावजूद प्रधानमंत्री 2018 में समय नहीं दे पाए।

जिसकी वजह से ट्रेन-18 सन् 2018 में नहीं दौड़ पायी। जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने तारीख मुहैय्या कराई तब तक 2019 लग चुका था।। इसलिए इसका नाम वंदे मातरम रखना पड़ा। अब  15 फरवरी को नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन से वंदे भारत एक्सप्रेस रवाना होगी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएंगे। यह भारत की पहली इंजनरहित ट्रेन होगी। रेलवे द्वारा यह जानकारी दी गयी है। यहां यदि यह कहा जाए कि प्रधानमंत्री कार्यालय की वजह से इस ट्रेन-18 का नाम बदलना पड़ा तो गलत नहीं होगा।

प्रधानमंत्री 15 फरवरी की सुबह दस बजे इस ट्रेन को रवाना करेंगे और एक कार्यक्रम भी होगा जहां वह भाषण देंगे। यह रेलवे की पहली स्वदेशी ट्रेन है। 16 डिब्बे वाली यह ट्रेन 30 साल पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेगी तथा दिल्ली एवं वाराणसी के बीच चलेगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रेन 18 को वंदे भारत एक्सप्रेस नाम दिया था। उसे चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है। यह दिल्ली राजधानी मार्ग के एक खंड पर परीक्षण के दौरान 180 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार हासिल कर भारत की सबसे तीव्र ट्रेन बन गयी। फिलहाल रेलवे के पास दिल्ली से कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी का इस ट्रेन से सफर करने का किराया कितना इसकी जानकारी नहीं है।

सोर्स: जीएनएस न्यूज एजेंसी

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