शादियों में हो रही इस प्रकार की चोरियों को नियंत्रित करने में पुलिस असफल साबित हो रही।
बच्चों को भी पकड़ नहीं पा रही पुलिस।
सबसे बड़ी बात है कि बदमाश इस गिरोह को बच्चों के जरिए संचालित कर रहे हैं और पुलिस बच्चों को भी पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है।
पिछले एक महीने में शहर में स्थित गार्डन में हो रहे शादी समारोहों के दौरान ऐसी चार से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ घटनाएं तो ऐसी भी हैं जो पुलिस रिपोर्ट में तो आईं, लेकिन ये दबा दिए गए। गत महीने सुखेर स्थित गार्डन में पुलिस अधिकारी के भांजे के शादी समारोह से 10 लाख रूपए तक के जेवर और नकदी चोरी हुए थे।
अच्छे-फैंसी कपड़े पहन कर बच्चे गार्डन में घुसे, पहले तो खाते-पीते उन महिला को देखा जिसके पास व्यवहार के लिफाफे आ रहे थे और जेवर रखे थे। ये बच्चे चंद सैकंड्स में महिला के पास रखा पर्स चोरी कर ले गए थे। इसके बाद सुखेर में ऐसी ही एक और घटना हुई, पुलिस तफ्तीश में आया कि इसे भी बच्चों के जरिए अंजाम दिया गया था। करीब चार-पांच दिन पहले सुखाड़िया सर्किल के पास गार्डन से भी 20 से 25 लाख रूपए तक के जेवर-नकदी इसी प्रकार चोरी हुए थे।
35 लाख रूपए की चोरी का पता चलते ही खुशियां हुई काफूर
महाकाल गार्डन में दुल्हन पक्ष ठहरा हुआ था। यहीं पर सभी जेवर-नकदी रखे थे। बारात सूरजपोल से आ रही थी। शादी के माहौल से मंगलवार रात दुल्हन के 30 तोला सोने के जेवर और ढाई लाख रूपए चोरी हो गए। दुल्हन पक्ष ने थाने में सूचना दी। पुलिस पहुंची, शादी के माहौल में बेटी के पिता ने पूरी घटना बताई, हर बार की तरह पुलिस ने मौका देखा और रिपोर्ट ले ली। इतनी बड़ी चोरी के बाद परिवार में शादी की रस्म-अदायगी तो हुई, लेकिन खुशियां मानो काफूर सी हो गई।
सावे आते ही सक्रिय हो जाता है गिरोह, पुलिस बेबस
जानकारी के अनुसार अब तक हुई वारदातों में खुलासा हुआ है कि अधिकतर वारदातें बदमाश गिरोह में बच्चोें के जरिए करवा रहे हैं। बच्चों पर एकदम से किसी का शक नहीं जाता है और पकड़े भी जाएं तो कानूनी तौर पर भी बच्चों को काफी रियायतें मिल जाती हैं। आरोपी बच्चे होने से पुलिस को रिकवरी करने में भी काफी समस्या आती है। हर वर्ष ऐसी वारदातें हो रही हैं। सावों के आते ही ये गिरोह तो सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन पुलिस इनकी रोकथाम में बेबस साबित हो रही है।
