जयपुर भाजपा और आरएसएस का गढ माना जाता है, इसके बावजूद भाजपा का दिसम्बर में हुए विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार का सामना करना पडा था। जयपुर शहर की आठ में से भाजपा पांच सीट हार गई थी।
मेयर उप चुनाव के लिए भाजपा ने डिप्टी मेयर मनोज भारद्वाज को मैदान में उतारा था। भाजपा के अधिकांश पार्षद भारद्वाज के विरोध में थे। इसके बावजूद भाजपा ने भारद्वाज को मेयर प्रत्याशी घोषित किया। पार्टी के निर्णय से नाराज विष्णु लाटा ने भारद्वाज के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। मेयर उप चुनाव के लिए दोपहर 2़30 बजे से शाम पांच बजे तक वोटिंग हुई। नगर निगम के 90 पार्षदों ने वोट कास्ट किया। शाम पांच बजे रिर्टनिंग अधिकारी एडिशनल कलक्टर थर्ड अरविंद सारस्वत ने लाटा को निर्वाचित घोषित किया। लाटा को 45 और भारद्वाज को 44 वोट मिले। जबकि एक वोट निरस्त घोषित किया गया।
भाजपा के 21 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की
जयपुर नगर निगम में 91 वार्ड है। अशोक लाहोटी ने सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित होने के बाद मेयर पद और वार्ड 43 से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उप चुनाव में 90 पार्षदों ने वोट किया। नगर निगम में भाजपा के 63, कांग्रेस के 18 और निर्दलीय 9 पार्षद है। भाजपा को तीन निर्दलीय पार्षदों को भी समर्थन प्राप्त था। इसलिए भाजपा के पास करीब 73 फीसदी (66 वोट) बहुमत था। लाटा को 90 में से 45 वोट मिले। इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा के 21 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की।
भाजपा ने किया नजर अंदाज
भारद्वाज को लेकर भाजपा में पहले से विरोध था। अशोक लाहोटी के इस्तीफा देने के बाद भारद्वाज को एक्टिंग मेयर बनाया गया। इस दौरान भाजपा पार्षदों ने भारद्वाज को मेयर की कुर्सी पर नहीं बैठने दिया। भाजपा ने अजमेर रोड स्थित एक रिसोर्ट में भाजपा पार्षदों की बाडाबंदी की। जयपुर जिला प्रभारी राजेंद्र गहलोत और विधायक सतीश पूनिया ने सोमवार को भाजपा पार्षदों के सामने भारद्वाज का नाम प्रस्तावित किया। इस दौरान भी भाजपा पार्षदों ने विरोध किया। भाजपा पार्षदों ने भारद्वाज के खिलाफ ज्ञापन भी तैयार किया था। इस ज्ञापन पर 33 पार्षदों ने साइन किए थे। हालांकि भाजपा शहर अध्यक्ष संजय जैन ने यह ज्ञापन फडवा दिया था।
लाटा जयपुर के पहले निर्दलीय मेयर
जयपुर नगर निगम इतिहास में मंगलवार को दो अध्याय जुड गए। पहली बार नगर निगम के एक बोर्ड के पांच साल के कार्यकाल में तीन मेयर बने। साथ ही लाटा जयपुर के पहले मेयर है, जो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए। लाटा जयपुर के दूसरे गैर भाजपा मेयर है। जयपुर नगर निगम का गठन 1994 में हुआ था। पिछले 24 साल में नगर निगम में भाजपा का बहुमत रहा है। पिछली अशोक गहलोत सरकार ने नगर निगम चुनाव 2009 में मेयर के डायरेक्ट इलेक्शन का प्रावधान लागू किया था। इस दौरान कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल मेयर चुनी गई।
