सरकार की ओर से इन मांगों को लेकर कहा गया कि उच्च स्तरीय समिति द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट राज्य स्तर पर परीक्षणाधीन है और प्रशासनिक आवश्यकता एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर यथोचित निर्णय लिया जा जाएगा।
प्रदेश में नए जिलों के गठन की मांग हर सरकार में उठती रही है, लिहाजा 15वीं विधानसभा के पहले दिन के प्रश्न काल में नए जिलों के गठन के बारे में विधायकों ने सरकार से सीधे सदन में सवाल जवाब किए। फुलेरा से बीजेपी विधायक निर्मल कुमावत नें सांभर को जिला बनाने की मांग सरकार के सामने रखी और कहा कि साल 2008 और 2013 में कांग्रेस के मेनिफेस्टों में जिले बनाने की बात कही थी। कुमावत ने सरकार से सवाल किया की जिले बनाने के मामले में जो रिपोर्ट सरकार को मिली है उसे मानेंगे या नहीं? सांभर जिला बनने की पात्रता रखता है या नहीं!
सवाल पर फलौदी विधायक पब्बा राम विश्नौई ने राजस्व मंत्री से सवाल कर उन्हें मुश्किल में डाल दिया। विश्ननोई ने सरकार से सवाल किया कि बीजेपी और कांग्रेस शासन में कितने कितने जिले बनाए गए, वहीं विधायक मदन प्रजापत ने बालोतरा को जिला बनाने की मांग रखी और कहा की बीजेपी सरकार ने इसी ठंडे बस्ते में डाल दिया। विधायक हमीर सिंह भायल नें भी बालोतरा को जिला बनाने की मांग की। इसके अलावा ब्यावर से विधायक शंकर सिंह रावत ने ब्यावर को जिला बनाने की मांग सरकार के सामने सवाल के जरिए रखी। वर्तमान गहलोत सरकार की मंशा पर फिर से प्रश्न चिन्ह लग गया है। 2008 और 2013 के कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में कहा था कि नए जिले बनाएंगे। लेकिन कमेटी भी नहीं बनाई। जब बीजेपी सरकार आई तो 2014 में कमेटी बनी और 2018 में कमेटी की रिपोर्ट सरकार को मिल गई है। राजस्व मंत्री इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। मेरी मांग के बाद फलौदी, बालोतरा, ब्यावर को जिला बनाने की मांग उठी है और मैंने सांभर को जिला बनाने की मांग की है, जिस पर कोई सन्तोष जनक जवाब नहीं मिल पाया।
इधर, राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने नए जिलों के गठन के सवाल पर सदन में कहा कि प्रदेश में नवीन जिलों के गठन एवं पुनर्गठन के लिए उच्च स्तरीय समिति द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रशासनिक आवश्यकता एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर यथोचित निर्णय लिया जाएगा।
सोर्स : जीएनएस न्यूज एजेंसी
