जानकारी के अनुसार संभाग में स्वाइन फ्लू से होने वाली यह दूसरी मौत है। तीन दिन पहले प्रतापगढ़ के एक बुजुर्ग की भी उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान हुई थी। स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों के कारण स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन ने संभाग के सभी जिलों में अलर्ट जारी किया हुआ है और किसी भी डॉक्टर को अभी छुट्टी भी नहीं दी जा रही है।
संक्रमण बढ़ने के बाद आ रहे हैं मरीज, इसलिए हुई मौतें
डॉक्टर्स ने बताया कि उदयपुर संभाग में स्वाइन फ्लू से जो दो मौतें हुई हैं, उसका एक बड़ा कारण उनका अस्पताल आने में बहुत देर कर देना भी है। ग्रामीण स्वाइन फ्लू के लक्षणों के प्रति ज्यादा जागरूक नहीं होते हैं। जुकाम, बुखार होने पर वे आमतौर पर एंटी-बायोटिक लेकर ठीक होेने का इंतजार करते हैं। इससे स्वाइन फ्लू का संक्रमण बढ़ जाता है। मरीज संक्रमण की चपेट में आने के 10-10 दिन बाद जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है तब एमबी हॉस्पिटल इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है।
ऐसे में लोगों से अपील हैं कि तेज जुकाम और बुखार को सामान्य न लें और हॉस्पिटल आकर डॉक्टर को दिखाएं। सामान्य जुकाम हुआ तो भी इलाज से ठीक हो जाएगा और स्वाइन फ्लू हुआ तो समय पर उपचार होने से मरीज को बचाया जा सकेगा।
