सीबीआई का आरोप आईओ आरके पटेल ने गवाहों को धमकाया था, वहीं गवाह कोर्ट में बयान दे चुके हैं कि सीबीआई ने धमकी देकर लिखे झूठे बयान
पीपी बीपी राजू ने कहा कि सीबीआई के पास केस का अनुसंधान पांच वर्ष बाद आया था। इससे पहले सीआईडी ने अनुंसधान किया था, सीआईडी इंस्पेक्टर आरके पटेल (सीबीआई ने आरोपी बनाया है) का हवाला देते हुए बीपी राजू ने कहा कि सीआईडी ने अनुसंधान कर इस केस को काफी खराब कर दिया था। हमारे सभी स्टार विटनेस होस्टाइल हो गए, कुछ गवाहों को हम अदालत में लाने तक ही नाकाम रहे हैं। यह चर्चा करते हुए पीपी बीपी राजू की वेदना साफ झलक रही थी, इस पर जज एसजे शर्मा ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा कि आपने अपना काम बहुत अच्छे से किया है। भले ही केस में 92 गवाह होस्टाइल हुए हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि केस हाथ से निकल गया है।
सीबीआई अधिवक्ता राजू ने रूबाबुद्दीन के वकील गौतम तिवारी की मदद से कोर्ट में कुछ रूलिंग पेश की, जो होस्टाइल विटनेस के बयानों को एवीडेंस में मान्य रखने और परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर हुए फैंसलों से संबंधित हैं।
सीबीआई ने अनुसंधान में जिसकी मदद ली, उसी को आरोपी बनाया
केस में आरोपी बनाए गए सीआईडी इंस्पेक्टर केस में पहले अनुसंधान अधिकारी रहे आरके पटेल की ओर से वकील दिनेश गज्जर ने अंतिम बहस में दलील दी कि सीबीआई के पास जब अनुसंधान आया तो उनके अनुसंधान में आरके पटेल से पूरी मदद की थी और सीबीआई ने उन्हें ही आरोपी बना दिया। सीबीआई की ओर से मेरे मुवक्किल पर यह आरोप था कि उसने गवाहों को धमका कर आरोपियों के पक्ष में बयान करवाए थे, यह आरोप पूरी तरह गलत हैं।
वकील गज्जर ने कहा मेरे मुवक्किल आरके पटेल ने अनुसंधान के दौरान तुलसी के मकान मालिक भीलवाड़ा के चंदन झा, कोमल झा और मुन्नी देवी, इनके पड़ोसी के सीआरपीसी की धारा 161 और धारा 164 के तहत कोर्ट में बयान करवाए थे, वही बयान इन गवाहों ने ट्रायल कोर्ट में दिए हैं। गज्जर ने दलील पेश की कि तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर हिम्मत सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने ट्रायल कोर्ट में बयान देते समय रोते हुए सीबीआई पर आरोप लगाया था कि सीबीआई ने उन्हें डरा-धमका कर गिरफ्तारी की धमकी देकर सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में झूठे बयान करवाए थे। अब देखना है कि गवाहों के इन आरोपों पर न्यायालय केस के फैंसले के साथ क्या निर्णय लेता है।
बिना तैयार आए वकील की जज ने की खिंचाई
तुलसी एनकाउंटर केस में उदयपुर के एएसआई नारायण सिंह, कांस्टेबल युद्धवीर सिंह और करतार सिंह की तरफ से वकील नरेन्द्र मुंदरगी ने दलीलें पेश की। इन्होंने कोर्ट में कई गलत तथ्य पेश किए तो जज ने इनकी खिंचाई की और कहा कि आप तैयारी किए बगैर ही आ गए हैं। मुंदरगी दलीलों के हर पॉइंट पर अपनी बात सही ढंग से नहीं कह पा रहे थे और कोर्ट का समय जाया हो रहा था, तब अन्य आरोपियों के वकीलों ने मुंदरगी की मदद की और उन्हें तथ्यों से अवगत कराया। इसके बाद में अपने मुवक्किलों के पक्ष को रख पाए। आखिर में मुंदरगी ने कोर्ट में सुझाव रखते हुए कहा सीबीआई अपनी पूरी तफ्तीश में तुलसी एनकाउंटर केस को सही साबित करने में नाकामयाब रही है, इस पर कोर्ट में हंसी की लहर दौड़ पड़ी, वकील मुंदरगी ने अपने कहे गलती को भांपते हुए तुरंत ही अपने वाक्य को दुरस्त किया और कोर्ट से कहा कि सीबीआई इस एनकाउंटर को फर्जी साबित करने में नाकामयाब रही है, मेरे मुवक्किल बेकसूर हैं।
सोमवार से शुरू हुआ फाइनल आर्गुमेंट बुधवार को पूरा हुआ
सोहराबुद्दीन-कौसरबी और तुलसी एनकाउंटर केस में इस 3 दिसंबर सोमवार से अंतिम बहस (फाइनल आर्गुमेंट) शुरू हुई थी। सोमवार, मंगलवार और बुधवार तीन दिनों में सीबीआई सहित 22 आरोपियों की ओर से संबंधित वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें देते हुए फाइनल आर्गुमेंट किया। आखिरी में आरोपी एनवी चौहान के वकील सचिन पंवार ने कोर्ट में जज से निवेदन किया कि वे अपना पक्ष लिखित में भी पेश करना चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने सोमवार तक का समय मांगा। इसी के साथ बुधवार को फाइनल आर्गुमेंट पूरे हो गए। अब अगली तारीख फैसला सुनाए जाने की होगी।

