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विधानसभा चुनाव 2018 : रघु की बसंती, कांग्रेस के झाला सहित 14 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज

कितने प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे, 22 नवंबर को होगा स्पष्ट।

उदयपुर(ARlive news)। विधानसभा चुनाव 2018 के लिए दाखिल हुए नामांकन पत्रों की मंगलवार को निर्वाचन अधिकारियों ने जांच की। सभी नामांकन पत्रों की कानूनी, तकनीकी स्तर पर जांच कर उदयपुर जिले की 8 विधानसभा सीटों से 14 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज कर दिए गए हैं, इसके बाद अभी मैदान में 74 प्रत्याशी डटे हुए हैं।

कुछ प्रत्याशियों के नामांकन वापस लेने की संभावना है। ऐसे में चुनाव कितने प्रत्याशी लड़ेंगे, यह स्थिति 22 नवंबर को स्पष्ट होगी। 19 नवंबर नामांकन दाखिल करने की आखिरी दिन तक जिले में 88 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था।

इनमें सलूम्बर से कांग्रेस प्रत्याशी रघुवीर सिंह मीणा की पत्नी बसन्ती मीणा ने डमी के रूप में फार्म भरा था, जिसे जांच में निरस्त कर दिया गया। ग्रामीण सीट से कांग्रेस की पूर्व विधायक सज्जन कटारा ने डमी के रूप में नामांकन भरा था, वो भी जांच में निरस्त कर दिया गया।

मावली से कांग्रेस से नामांकन दाखिल करवा चुके लालसिंह झाला की जगह पुष्कर को अधिकृत प्रत्याशी बनाने के कारण जांच में सिम्बल के अभाव में झाला का नामांकन निरस्त हुआ है। इसी तरह सलूम्बर में रेशमा मीणा ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में फार्म भरा था मगर उनको पार्टी का सिम्बल नही मिला और जांच में नामांकन निरस्त कर दिया गया।

जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी नामांकन पत्रों की जांच की गई है। गोगुंदा सीट से 9 प्रत्याशियों में से 2, उदयपुर ग्रामीण सीट से 11 प्रत्याशियों में से 4, उदयपुर शहर सीट से 17 प्रत्याशियों में से 2, मावली सीट के 14 प्रत्याशियों में से 01, वल्लभनगर सीट से 11 प्रत्याशियों में से 2 और सलूंबर के 11 प्रत्याशियों में से 3 के नामांकन खारिज कर दिए गए हैं।

झाड़ोल के 8 प्रत्याशियों और खेरवाड़ा के 7 प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया था और ये सभी मैदान में डटे हुए हैं। इनमें से किसी का नामांकन खारिज नहीं हुआ है।

नामांकन निरस्त होने के डर से एक प्रत्याशी ने दो-दो बार पर्चे दाखिल किया

आठों विधानसभा सीट पर प्रत्याशी तो 88 खड़े हुए थे, लेकिन इन्होंने 124 नामांकन पत्र दाखिल किए। जिला निर्वाचन कार्यालय से पता चला कि गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने ही दो बार नामांकन दाखिल किया था। ऐसे में कई ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्होंने दो-दो बार नामांकन दाखिल किया। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्याशियों को डर होता है कि पहले नामांकन पर्चे में कोई गलती रह गई हो तो दूसरा पर्चा भर देते हैं। एक पर्चा निरस्त होगा तो दूसरा स्वीकार हो जाएगा। सिर्फ एक पर्चा दाखिल करने के बाद यह संभावना भी रहती है कि इसमें कोई गलती रह गई और नामांकन निरस्त हो गया तो प्रत्याशी चुनाव की दौड़ से ही बाहर हो जाएगा।

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