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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर : चीफ आईओ ने कहा राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए हुआ था एनकाउंटर

मुम्बई(ARlive news)। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में सोमवार को मुम्बई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में चीफ अनुसंधान अधिकारी सीबीआई एसपी अमिताभ ठाकुर के बयान हुए। ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए किया गया था। यह फायदा अमित शाह, डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन, अभय चूडास्मा और दिनेश एमएन को हुआ था।

चीफ आईओ ठाकुर ने यह भी बताया कि एनकाउंटर के तुरंत बाद पॉपुलर बिल्डर के मालिक रमन पटेल और दशरथ पटेल से डीजी बंजारा ने 60 लाख व अमित शाह ने 80 लाख लिये थे।

बचाव पक्ष के ये पूछने पर कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से इसका क्या ताल्लुक है तो ठाकुर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। बचाव पक्ष के पूछने पर ठाकुर ने कहा कि राजनीतिक या आर्थिक फायदा मिलने का इन पांचों के खिलाफ स्पेसिफिक कोई एविडेंस नहीं था।

बचाव पक्ष के पूछने पर ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि इस केस का मोटिव पॉलिटिकली और आर्थिक फायदा था। अभी कोर्ट में जो 22 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहै है इनमे से किसी को भी सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से कोई राजनीतिक और आर्थिक फायदा नहीं मिला।

सीबीआई ने उस रिवॉल्वर की तफ्तीश नही की जो सोहराबुद्दीन के पास थी

बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर ठाकुर ने बताया कि सोहराबुद्दीन के शव के पास से जो रिवॉल्वर बरामद हुई थी वह कहाँ से खरीदी या लायी गयी थी इसकी तफ्तीश नही हुई और न ही इससे संबंधित कोई साक्ष्य है। यह पड़ताल भी नही किया गया कि रिवॉल्वर इससे पहले कभी उपयोग हुआ था या नही।

ठाकुर ने यह खुलासा भी किया कि इस बात की कोई पड़ताल नहीं हुई, कि सोहराबुद्दीन के शरीर से मिली गोली राजस्थान पुलिस की सर्विस रिवॉल्वर से चली हो।

दर्ज एफआईआर पर नहीं है प्रार्थी के हस्ताक्षर

सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के बाद उसके खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज की गई  एफआईआर किसके द्वारा लिखी गयी थी इस सम्बंध में ठाकुर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि एफआईआर लिखने वाले के सम्बंध में सीबीआई ने कोई तफ्तीश नहीं की थी, न ही यह पड़ताल की गई कि इस पर हस्तक्षर क्यों नहीं है।

सीबीआई के लिए बयानों में ही आया विरोधाभास

सीबीआई चाजर्शीट के अनुसार सोहराबुद्दीन के अपहरण के बाद पुलिस ने तुलसी को वलसाड से उदयपुर ले जाकर 3 दिन अवैध हिरासत में रखा था, इस संबंध में बचाव पक्ष के वकील के पूछे जाने पर ठाकुर ने बताया कि तफ्तीश में यह बात आजम के बयानों में आई थी। इस पर वकील ने इन्ही के द्वारा लिए गए पुलिस अधिकारी भंवर सिंह हाड़ा और सुधीर जोशी के बयान कोर्ट को दिखाए, जिसके अनुसार तुलसी को 29 नवम्बर 2005 को मुखबीर की सूचना पर भीलवाड़ा से गिरफ्तार किया गया था। गवाहों के बयानों में आये इस विरोधाभास का वे कोई जवाब नहीं दे पाए।

बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में चीफ आईओ ठाकुर पर आरोप लगाया कि आपने व अपने सुपरवाईजरी अधिकारी पी कंडा स्वामी ने अधीनस्थ अधिकारियों की मदद से गवाहों को डरा धमका कर उनके कोर्ट में झूठे सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान करवाए और बिना तथ्यों और गवाह, सबूतों के झूठी चार्जशीट कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ दाखिल की थी।

गौरतलब है कि पूर्व में आये गवाह पुलिस डीएसपी भंवर सिंह हाड़ा, रणविजय सिंह, हिम्मत सिंह ने ट्रायल के दौरान इसी कोर्ट में यह बयान दिए है कि सीबीआई के इन अधिकारियों ने गिररफ्तारी का डर दिखाकर और डरा धमका कर आरोपियों के खिलाफ 164 के झूठे बयान कोर्ट में देने के लिए मजबूर किया था

कई सवालों के जवाब में ठाकुर ने कहा मुझे याद नहीं

बचाव पक्ष के वकीलों ने ठाकुर से चार्जशीट में बताई गई सोहराबुद्दीन, कौसर बी के अपहरण करने, बंधक बना कर रखने और एनकाउंटर में मार देने से सम्बंधित सवाल किए, लेकिन कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब में केस के मुख्य आईओ ठाकुर ने सिर्फ एक जवाब दिया “I don’t remember”। इस जवाब पर बचाव पक्ष के वकीलों ने आपत्ति भी जताई और कहा कि इन्होंने पूरी चार्जशीट पढ़कर कोर्ट में पेश की थी।

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