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सोहराबुद्दीन का फर्जी एनकाउंटर हुआ था, ये एफिडेविड गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया था

मामले की गवाह तुलसी की माँ नर्मदा बाई को कोर्ट ने किया ड्रॉप।
19 को चीफ आईओ के बयान होना तय।

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में शनिवार को आखिरकार रुबाबुद्दीन के बयान हो ही गए। हालांकि की बयानों के दौरान तबीयत खराब होने पर जज के आदेश पर कोर्ट आये डॉक्टर ने रुबाबुद्दीन को चेक किया। बयान बीच में रोक कर कोर्ट की आखिरी बैैंच पर रुबाबुद्दीन ने आधा से पौन घण्टा आराम किया और इसके बाद अपने बयान पूरे किए।

सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि 27 जनवरी 2007 को मैंने सुप्रीम कोर्ट में रिट लगाई थी और सोहराबुद्दीन कि फर्जी एनकाउंटर में हत्या करने और कौसरबी को गायब कर देने की जांच की मांग की थी। इस रिट पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में गुजरात सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविड पेश किया था कि सोहरबुद्दीन का फर्जी एनकाउंटर हुआ था,  कौसरबी को भी मार दिया गया है। इसके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद 24 अप्रैल 2007 को सीआईडी गुजरात ने एनकाउंटर में शामिल गुजरात आईपीएस डीजी बंजारा, राज कुमार पांडियन और राजस्थान आईपीएस दिनेश एमएन को गिरफ्तार कर लिया था।

रुबाबुद्दीन ने बयान पूरे करते हुए कोर्ट को कहा कि सीबीआई ने केस में ढंग से जांच नहीं कि है, केस में जो गवाह होस्टाइल हुए है और जो आरोपी बरी हो चुके है, उनके खिलाफ अग्रिम कार्यवाही की जाए। इस पर जज ने कहा कि होस्टाइल गवाहों की कार्रवाई के संबंध में केस के आखिरी में निर्णय किया जाएगा। हालांकि जज एसजे शर्मा ने बरी हो चुके आरोपियों के संबंध में कुछ नहीं कहा।

कौसरबी का रैप कर उसे भी मार दिया था

रुबाबुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन की हत्या और कौसरबी के गायब होने के बाद मैं एक बार तुलसी से उज्जैन जेल जाकर मिला था, तब तुलसी ने बताया था कि गुजरात एटीएस और राजस्थान एसटीएफ ने सोहरबुद्दीन को फर्जी एनकाउंटर में मारा है। मेरे सामने टीम ने सोहरबुद्दीन को 8 गोलियां मारी थीं। मैंने उससे पूछा कि तुमको टीम में जिंदा क्यों छोड़ दिया था तो उसने बताया कि वह हिन्दू है और इस एनकाउंटर को आतंकवाद से जोड़ने के लिए उस समय मुझे जिंदा छोड़ दिया गया था और सोहरबुद्दीन को लश्कर ए तैयबा का आतंकवादी बताकर मार दिया था। लेकिन मैं चश्मदीद गवाह हु, ऐसे में मेरी जान को भी खतरा है। पुलिस मुझे भी पेशियों से लाते लेजाते समय भागा हुआ कैदी बताकर कभी भी मार सकती है। जब मैं तुलसी से मिला था उसकी माँ नर्मदा बाई, भाई पवन और भांजा कुंदन भी मौजूद थे।

हालांकि की बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर रुबाबुद्दीन ने बताया कि हां ये बात सही है कि मैंने कभी सीआईडी, सीबीआई को दिए बयान में या सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिकाओं में ये कभी नहीं बताया कि तुलसी ने कहा था कि सोहरबुद्दीन को उसके सामने गोली मारी गयी थी।

रुबाबुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि तुलसी को आईपीएस विपुल अग्रवाल ने और डीजी बंजारा ने षड्यंत्र कर फर्जी एनकाउंटर में मारा था, क्यों कि वह सोहराबुद्दीन के फर्जी एनकाउंटर का चश्मदीद गवाह था। सोहराबुद्दीन की हत्या और कौसरबी के गायब होने के बाद मैंने एक बार जब भाई नैयाबुद्दीन से बात की थी तब उसने बताया था जी कौसरबी को भी रैप कर मार दिया गया था। लेकिन उसे कब कहाँ मारा गया, इसका कभी पता नहीं चला। कौसरबी के माता पिता से पता चला था कि कौसरबी उस समय गर्भवती भी थी।

तुलसी की माँ के नहीं हुए बयान

कोर्ट में शनिवार को तुलसी की मां नर्मदा बाई के बयान भी होने थे। लेकिन पिछली पेशियों की तरह इस बार भी वे कोर्ट नहीं आयी। इस पर जज एसजे शर्मा ने गवाह तुलसी की माँ के बयानों को ड्राप कर दिया। अब तुलसी की माँ के बयान तो हुए नहीं और 19 नवम्बर को चीफ आईओ सीबीआई एसपी अमिताभ ठाकुर के बयान होंगे।

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