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बच्चों के दूध पर चल रहा कमीशन का खेल, स्कूल प्रिंसीपल 8500 रूपए रिश्वत लेते गिरफ्तार

अन्नपूर्णा योजना के तहत बच्चों के लिए स्कूल में होता है दूध सप्लाई।
दूध सप्लायर से वसूला जा रहा 20 से 25 प्रतिशत कमीशन। 

उदयपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस वर्ष खुद अपने हाथ से स्कूल के बच्चों को दूध पिलाकर जिस अन्नपूर्णा दूध योजना को शुरू किया था, उसी में एसीबी ने कमीशन के बड़े खेल का खुलासा किया है। कमीशन भी इतना ज्यादा कि बच्चों को बिना मिलावट का पौष्टिक दूध मिलना संभव नहीं लगता। मंगलवार सुबह एसीबी ने उदयपुर शहर के टेकरी इलाका स्थित सरकारी स्कूल के प्रिंसीपल गमेर लाल को 8500 रूपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। प्रिंसीपल यह राशि स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले दूध सप्लायर से बतौर कमीशन ले रहा था।

एसीबी डीएसपी राजीव जोशी ने बताया कि प्रार्थी हीरालाल श्रीमाली अन्नपूर्णा योजना के तहत सरकारी स्कूलों में दूध सप्लाई करता है। दूध के बिल प्रिंसीपल के साइन से ही स्वीकृत होते हैं। टेकरी स्थित सरकारी स्कूल के प्रिंसीपल गमेर लाल ने दूध के बिल पास करवाने की एवज में हीरालाल से कमीषन की मांग की। हीरालाल पहले भी दूध बिल पास करवाने की एवज में प्रिंसीपल हीरालाल को कमीशन दे चुका था। हर बिल पर कमीशन देना हीरालाल को अखरा। हीरालाल का दूध का करीब 25 हजार रूपए का बिल था और इस पर 25 प्रतिशत के अनुरूप प्रिंसीपल गमेर 8500 रूपए रिश्वत मांग रहा था।

दूध सप्लायर हीरालाल ने प्रिंसीपल के रिश्वत मांगने की शिकायत एसीबी ऑफिस में दी। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया। मंगलवार को प्रिंसीपल से हुइ बात के अनुसार दूध सप्लायर हीरालाल स्कूल पहुंचा और प्रिंसीपल के चैंबर में गया। प्रार्थी ने प्रिंसीपल गमेर लाल को रिश्वत के 8500 रूपए दिए और इसी दौरान घात लगाकर बैठी एसीबी टीम ने प्रिंसीपल को रंगे हाथों रिश्वत राशि के साथ दबोच लिया।

बच्चे कक्षाओं में ईमानदारी का पाठ पढ़ रहे थे और प्रिंसीपल रिश्वत लेते पकड़े गए

एसीबी टीम ने बताया कि जब प्रिंसीपल को रिश्वत लेते पकड़ा गया, तब स्कूल में कक्षाएं चल रही थीं और बच्चे भी स्कूल में ईमानदारी का पाठ पढ़ रहे थे। प्रिंसीपल के पकड़े जाने का बच्चों पर कोई गलत असर नहीं हो, इसलिए मौके पर आवश्यक कार्यवाही करने के बाद एसीबी टीम प्रिंसीपल को तत्काल एसीबी ऑफिस ले आई। अग्रिम पूछताछ एसीबी ऑफिस में जारी है।

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