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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : होम मिनिस्टर हरेन पंड्या की हत्या डीजी बंजारा ने सोहराबुद्दीन से करवाई थी

आजम ने कोर्ट में दिए बयान में किया खुलासा : सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का मोटिव और थ्योरी बदली।

लकी जैन, ARlive news। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में शनिवार को मुंबई की सीबीआई विशेष अदालत में हुए मुख्य गवाह आजम खान के बयानों में सनसनीखेज खुलासा हुआ। आजम ने कोर्ट को बताया कि गुजरात के पूर्व होम मिनिस्टर हरेन पंड्या की हत्या की सुपारी आईपीएस डीजी बंजारा ने सोहराबुद्दीन को दी थी।

आजम ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन, तुलसी उसके अच्छे दोस्त थे और सोहराबुद्दीन ने ही मुझे बताया था कि उसने बंजारा के कहने पर नयीमुद्दीन उर्फ कलीमुद्दीन और शाहिद के साथ मिलकर हरेन पंड्या की हत्या की थी। गौरतलब है कि हरेन पंड्या केस में गुजरात पुलिस ने पहले जिन भी लोगों को गिरफ्तार था, वह सभी दोष मुक्त होकर बरी हो चुके हैं।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को लेकर कोर्ट में आजम खान ने बयान दिए कि उसी ने ही सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसरबी और तुलसी को अपनी बुआ के मल्लातलाई स्थित मकान में पनाह दिलवाई थी। ये तीनों यहां रह रहे थे। फिर एक दिन सोहराबुद्दीन ने तुलसी और किसी एक अन्य व्यक्ति के जरिए अहमदाबाद के गुजरात बिल्डर के यहां फायरिंग करवाई थी। सोहराबुद्दीन को एक कंपनी से रिकवरी का काम मिला था और उसे मरीयम मार्बल वाले से रिकवरी करनी थी, इसके लिए सोहराबुद्दीन ने मरियम मार्बल वाले को धमकी दी थी, तो उदयपुर के हामिदलाल के कहने पर मरीयम मार्बल मालिक ने सोहराबुद्दीन के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया था। इस पर सोहराबुद्दीन के कहने पर तुलसी ने मुदस्सर के साथ मिलकर हामिदलाल की 31 दिंसबर 2004 को हत्या करवा दी थी। हामिदलाल की हत्या के बाद हम सभी अलग-अलग फरार हो गए थे और मैं पत्नी के साथ रिश्तेदार के यहां मोडासा चला गया था। अप्रेल 2005 में मुझे उदयपुर पुलिस ने मोडासा से हामिदलाल हत्या कांड में  गिरफ्तार कर लिया था और मुझे सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। 27 नवंबर 2005 को मुझे जेल में अखबार से पता चला कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में मारा गया है, इसके तीन-चार दिन बाद तुलसी के गिरफ्तार होने का समाचार अखबार में पढ़ा था। कुछ दिनों बाद तुलसी को भी उदयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

तुलसी मुझे सेंट्रल जेल में मिला और फूट-फूट कर रोने लगा, तुलसी ने मुझे बताया कि गुजरात पुलिस ने मुझे धोखा दिया है। एक आदमी ने मुझे बंजारा से मिलवाया था। बंजारा ने कहा था कि उपर से बहुत ज्यादा दबाव है, एक बार सोहराबुद्दीन को पकड़वा दो, छह महीने में उसकी जमानत करवा देंगे। मुझे बंजारा ने कहा था कि सोहराबुद्दीन को पकड़वा दिया तो मुझे लतीफ सेठ की जगह बैठा देंगे। गौरतलब है कि लतीफ सेठ उस समय अहमदाबाद का बड़ा डॉन था। मैं बंजारा की बातों में आ गया। मेरी सूचना पर ही गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन, कौसरबी और मुझे हम तीनों को हैदराबाद से लौटते समय सांगली के पास से बस से उतार लिया था और इस बात की उन लोगों ने बंजारा को सूचना दी थी। हम तीनों को अहमदाबाद के फार्म हाउस में लाया गया था। जहां वे लोग सोहराबुद्दीन से मारपीट करने लगे। इसका कौसरबी ने विरोध किया, तो उसके साथ भी मारपीट हुई, फिर एक फायर हुआ और कौसरबी की आवाज बंद हो गई, इसके बाद एक और फायर हुआ और सोहराबुद्दीन की आवाज भी बंद हो गई। तुलसी ने मुझे बताया था कि सोहराबुद्दीन-कौसरबी की हत्या के बाद उन लोगों ने मुझे दो-तीन दिन उसी फार्म हाउस में रखा और फिर राजस्थान पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। तुलसी सेंट्रल जेल में अक्सर बोलता था कि मेरे साथ धोखा हुआ है, मैं बंजारा को मार दूंगा। उदयपुर जेल में बंजारा का मुखबीर अहमद जाबिर बंद था, उसने तुलसी की यह सारी बातें बंजारा तक पहुंचा दीं।

बदला एनकाउंटर का मोटिव और स्थान

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का अनुसंधान कर सीबीआई ने जो चार्जशीट पेश की थी, उसमें एनकाउंटर का मोटिव अलग है। सीबीआई चार्जशीट के अनुसार सोहराबुद्दीन ने मार्बल व्यवसायी आरके मार्बल के विमल पाटनी और संगम टेक्सटाइल वाले को धमकी देकर एक्सटॉर्शन मनी मांगी थी। व्यवसायियों ने इसकी जानकारी राजनेताओं को दी थी और इसके बाद आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन ने मिलकर सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर की साजिश रची थी। लेकिन आजम ने जो बयान ट्रायल कोर्ट में दिए, उससे तो सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का मोटिव हरेन पंड्या की हत्या से जुड़ गया। चार्जशीट में एनकाउंटर पावर हाउस के पास बताया गया है, जबकि आजम ने कहा कि सोहराबुद्दीन और कौसरबी की हत्या तो फार्म हाउस में ही कर दी गई थी।

पेशी पर जाने से पहले तुलसी ने कहा था अकेले जा रहा हूं, वापस नहीं आउंगा

तुलसी एनकाउंटर को लेकर आजम ने कोर्ट में बयान दिए कि अहमदाबाद पुलिस ने तुलसी के साथ उसे भी पॉपुलर बिल्डर पर हुई फायरिंग मामले में आरोपी बनाया था। आजम ने बताया कि इस केस में हम दोनों को अहमदाबाद पेशी पर एक साथ ले जाया जाता था। राजस्थान पुलिस एक पेशी पर मुझे और तुलसी को लेकर अहमदाबाद कालूपुर स्टेशन पहुंची। वहां से एटीएस वाले हमें शाहीबाग स्थित ऑफिस और फिर कोर्ट लेकर गए। कोर्ट में हमें सोहराबुद्दीन का वकील सलीम मिला। हमने उसे कहा कि हमारी जान को खतरा है। इस पर सलीम ने हमें जज के सामने पेश करवाया और हमने जज से निवेदन किया कि हमें हथकड़ी, रस्सी से बांधकर सुरक्षित उदयपुर सेंट्रल जेल पहुंचा दिया जाए। कोर्ट पेशी के बाद राजस्थान पुलिस हमें उदयपुर ले आई और सेंट्रल जेल में जमा करवा दिया।

आजम ने कोर्ट में बयान दिए कि हम दोनों की अगली पेशी थी, इससे पहले पुलिस ने मुझे एक चोरी के मामले में प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लिया। अंबामाता थाना पुलिस मुझे लेने आई, तब तुलसी ने मुझे कहा था कि इस पेशी पर मैं अहमदाबाद अकेला जाउंगा और शायद इस बार वापस न लौटूं। अंबामाता थाना से रिमांड पूरी होने पर मैं सेंट्रल जेल लौटा तो पता चला कि तुलसी पुलिस कस्टडी से भाग गया है और अगले दिन उसके भी एनकाउंटर में मारे जाने की खबर मिली। 2009 में मुझे भी कोर्ट ने हामिदलाल हत्याकांड से बरी कर दिया और मैं जेल से बाहर आ गया।

दाउद से थे सोहराबुद्दीन के कनेक्शन

आजम ने कोर्ट को बताया कि एक बार सोहराबुद्दीन ने उसे बताया कि वह नयीमुद्दीन से मिलने हैदराबाद गया था, नयीमुद्दीन दाउद इब्राहिम से बात करना चाहता था, लेकिन मैंने उसको यह कहकर मना कर दिया था कि दाउद तो किसी से बात नहीं करता है, हां वह उसकी छोटा शकील से बात करवा सकता है। तब आजम ने सोहराबुद्दीन को चेताया था कि नयीमुद्दीन अच्छा आदमी नहीं है, तो सोहराबुद्दीन ने आजम को भरोसा दिलाया था कि नयीमुद्दीन उसके साथ धोखा नहीं कर सकता है, क्यों कि वे एक-दूसरे के राजदार है और हमने ही हरेन पंड्या की हत्या की थी और हमें सुपारी डीजी बंजारा ने दी थी।

पहले के बयानों में है अलग कहानी, फिर भी पीपी ने नहीं पूछा एक भी सवाल

गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस की जब सीबीआई जांच कर रही थी, तब सीबीआई के इंस्पेक्टर पंवार, विश्वास मीणा और एनएस राजू ने अलग-अलग तीन बार उसके सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान लिए थे और आजम इस पूरे केस का एकलौता ऐसा गवाह है, जिसके सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में दो बार बयान हो चुके हैं पांच बार हुए बयानों में आजम ने जो कहानी बताई है, वह शनिवार को ट्रायल कोर्ट में दिए बयानों से अलग है। इसके बावजूद न तो सीबीआई के स्पेशल सरकारी वकील बीपी राजू ने इस पर कोई प्रश्न पूछा और न ही उसे होस्टाइल घोषित किया। 

बचाव पक्ष के वकील ने आजम से पूछा कि हरेन पंड्या की हत्या से संबंधित यह बात तुम्हारे पूर्व में सीबीआई को दिए बयानों में कहीं नहीं है। तो आजम ने कोर्ट में बताया कि उसने सीबीआई इंस्पेक्टर एनएस राजू को बयान देते समय यह बात बताई थी, लेकिन उन्होंने यह बात लिखने से मना कर दिया था और मुझे कहा था कि इससे बहुत बड़ा बवाल मच जाएगा, यह बात बयान में मत लिखवाओ। तो मैंने एनएस राजू को कहा था कि मैं जो जानता हूं, वह बताउंगा।

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