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सीबीआई के बाद अब आरबीआई में मोदी सरकार का हस्तक्षेप

जीएनएस एजेंसी। सीबीआइ में चल रहा विवाद अभी थमा नहीं है और महत्वपूर्ण संस्थान रिज़र्व बैंक से भी सरकारी हस्तक्षेप की आवाज उठने लगी है। उच्च अधिकारी उनके कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप होने से परेषान हैं। भारत की इस सेन्ट्रल बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने सार्वजनिक मंच से गुहार लगाईं की आरबीआई के कामकाज में सरकार हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने मोदी सरकार पर संगीन आरोप लगाया कि सरकार अपनी केन्द्रीय बैंक का सम्मान नहीं करती और जो सरकार अपनी बैंक का सम्मान नहीं करतीए उसे बाजार की नाराजगी का भी सामना करना पड़ता है।

विरल ने केन्द्रीय बेंक की स्वतंत्रता की मांग की। नीतिगत मुद्दों पर केंद्र और केन्द्रीय बेंक के बीच उभरते मतभेद इस बात का गवाह है की दोनों के बीच सबकुछ ठीकठाक नहीं। इनसे पहले सीबीआइ के मुखिया आलोक वर्मा ने भी सुप्रीम कोर्ट में जो अपनी याचिका लगाईं हैए उस में कहा है की सरकार का हस्तक्षेप हो रहा है। तीसरी एक और जांच एजन्सी इडी में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है।

जहां देखो वहाँ सरकार के हस्तक्षेप की फ़रियाद उठ रही है। आरबीआई में तो इस साल कम से कम आधा दर्जन नीतिगत मामले में दोनों के बीच मतभेद उभरकर सामने आ चुके है। सीबीआइ का मामला सुप्रीम में पहुँच चूका है। कही ऐसा न हो की आरबीआई भी अदालत में न जाए।

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