एसीबी यूनिट और एसीबी स्पेशल यूनिट की दो अलग-अलग कार्यवाहियां।
पहली कार्यवाही : एसीबी डीएसपी राजीव जोशी ने बताया कि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानुवाड़ा, ऋषभदेव के प्रिंसीपल दिलीप जैन को स्कूल में उसे ऑफिस में 15 हजार रूपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। प्रार्थी इंदूशेखर चौबीसा ने एसीबी ऑफिस में प्रिंसीपल दिलीप जैन के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत की थी और बताया था कि स्कूल भवन निर्माण के बिल पास करने की एवज में 2 प्रतिशत के अनुसार 60-65 हजार रूपए पहले ले चुके हैं। 40 लाख रूपए का ठेका हुआ था और प्रार्थी ने 4 लाख रूपए सिक्योरिटी राशि का चेक ठेका लेने की शुरूआत में ही जमा कर दिया था। काम पूरा होने के बाद प्रार्थी इंदूशेखर सिक्योरिटी राशि वापस मांग रहा था तो प्रिंसीपल दिलीप जैन ने सिक्योरिटी राशि का चेक लौटाने की एवज में 20 हजार रूपए की रिश्वत मांगी। काफी निवेदन के बाद प्रिंसीपल दिलीप जैन 15 हजार रूपए पर तैयार हुआ। एसीबी टीम ने शिकायत का सत्यापन किया। सत्यापन होने के बाद बुधवार को टीम ने ट्रेप कार्यवाही की। प्रार्थी ठेकेदार ने स्कूल में प्रिंसीपल ऑफिस में ही दिलीप जैन को 15 हजार रूपए दिए।
दिलीप जैन ने प्रार्थी से रूपए लेकर शर्ट की जेब में रख लिए। तभी एसीबी टीम की गाड़ी परिसर में आई तो घबराहट में रूपए कमरे में रखे डस्टबीन के पास फेंक दिए और नोट जूतों के नीचे छुपा दिए। एसीबी टीम ने जूतों के नीचे से रिश्वत के नोट बरामद किए। प्रिंसीपल के हाथ, कमीज और फर्श से नोटों पर लगे रंग के सैंपल लिए और प्रिंसीपल को 15 हजार रूपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। कार्यवाही डीएसपी राजीव जोशी के निर्देशन में निरीक्षक हरीशचन्द्र सिंह और रोशनलाल सामरिया की टीम ने की है।
दूसरी कार्यवही : एसीबी एसयू के एडिएसपी सुरेन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि बावलवाड़ा निवासी प्रफुल कुमार पुत्र दीताराम फनात को दो हजार रूपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। प्रफुल एमबीजीएच की लेखा शाखा में वरिष्ठ सहायक है। इसके खिलाफ अजमेर के जवाहरलाल चिकित्सालय के द्वितीय ग्रेड मेल नर्स मनीष तासीवाल ने एसीबी एसयू यूनिट में रिश्वत मांगने की शिकायत दी थी।
रिपोर्ट में लिखा था कि प्रार्थी मनीष का फरवरी 2016 में मेल नर्स द्वितीय ग्रेड पर एमबीजीएच में तबादला हुआ था। तब से वह यहां पर कार्यरत था। 21 सितंबर 2018 को उसका तबादला अजमेर के जवाहरलाल चिकित्सालय में हो गया, इस पर उसने 22 सितंबर को एमबीजीएच से रिलीव होकर 24 सितंबर को जवाहरलाल चिकित्सालय में जॉइंन कर लिया। तबादला के बाद अभी तक वेतन नहीं बनने पर प्रार्थी ने पता किया तो जानकारी मिली कि प्रार्थी की एलपीसी अजमेर हॉस्पिटल प्रबंधन में आई ही नहीं है। इस पर प्रार्थी ने एमबी हॉस्पिटल के लेखा शाखा के वरिष्ठ सहायक प्रफुल से संपर्क किया। प्रफुल ने एलपीसी जारी करने की एवज में 2 हजार रूपए रिश्वत की मांग की।
शिकायत मिलने पर टीम ने बुधवार को पहले इसकी पुष्टि कराई। लेखा कार्यालय में सत्यापन के दौरान प्रफुल ने दो हजार रूपए की मांग रखी और 500 रूपए सत्यापन के दौरान ही ले लिए। प्रफुल ने प्रार्थी मनीष को कहा कि बचे हुए 1500 रूपए मिलने के बाद ही वह एलपीसी ऑनलाइन जारी करेगा। सत्यापन के कुछ देर बाद ही टीम ने ट्रेप कार्यवाही की। वरिष्ठ सहायक प्रफुल ने प्रार्थी से 1500 रूपए लिए और एलपीसी ऑनलाइन जारी कर प्रार्थी ने रिसीप्ट दे दी, तभी एसीबी टीम मौके पर पहुंची और 1500 रूपए लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा और इससे पहले लिए 500 रूपए भी प्रार्थी की जेब से बरामद किए। इस प्रकार एसीबी ने एमबीजीएच के वरिष्ठ सहायक को दो हजार रूपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।
कार्यवाही एडिएसपी सुरेन्द्र सिंह भाटी के निर्देषन में निरीक्षक दिलीप सिंह झाला, एसआई लक्ष्मण सिंह, हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार, कांस्टेबल नंदकिशोर, नारायण सिंह, प्रदीप भंडारी, सुरेश कुमार और मगनलाल ने की।
