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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : सोलंकी ने कहा मेरे पूछताछ की अनुमति मांगने के बाद हुआ था तुलसी का एनकाउंटर

सीबीआई में हुए सोलंकी के बयानों के बारे में सरकारी वकील ने तक नहीं किए कोई सवाल।

मुम्बई से रिपोर्टर लकी जैन की स्पेशल रिपोर्ट। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में सच को कोर्ट में बताने के लिए लंबे समय से पेशी का इंतजार कर रहे सबसे पहले अनुसंधान अधिकारी और सीबीआई के गवाह रहे सीआईडी इंस्पेक्टर वीएल सोलंकी के बयान हुए। सोलंकी ने बुधवार को मुंबई स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में बताया कि सोहराबुद्दीन की प्रारंभिक जांच के लिए उसे उदयपुर सेंट्रल जेल में तुलसी प्रजापति से पूछताछ करनी थीं, 20 दिसंबर 2006 को उसने सीआईडी आईजी गीता जौहरी को लिखित में एप्लीकेशन देकर उदयपुर जाकर तुलसी से पूछताछ की अनुमति मांगी, उसे अनुमति तो नहीं मिली, लेकिन इसके बाद तुलसी भी एनकाउंटर में मारा गया।

कोर्ट में सोलंकी की यह बयान सुनकर जज एसजे शर्मा ने कहा कि आपने तुसली का अनुसंधान नहीं किया, तो उसके बारे में आपको कुछ नहीं बोलना है। आपको बस इतना ही बताना है कि आपने अनुमति मांगी, जो नहीं मिली। तुलसी केस की सुनवाई भी चल रही है।

पीपी ने भी नहीं निभाई जिम्मेदारी

बुधवार को जब सोलंकी कोर्ट में पहुंचे तो जज ने उन्हें कहा कि उन्हें बयान में उन 22 आरोपियों से संबंधित बात ही बोलनी है, जो ट्रायल फेस कर रहे हैं। सोलंकी ने जज की यह बात को उस समय तो अनसुना कर दिया, लेकिन सीबीआई को दिए बयानों के बारे में कोर्ट में कुछ नहीं बताया। खासबात यह रही कि पीपी (सरकारी वकील) बीपी राजू ने भी इन बयानों के संबंध में कुछ नहीं पूछा। जबकि यह पीपी की जिम्मेदारी थी कि वह सीबीआई को दिए बयानों के बारे में उससे पूछते और अगर सोलंकी पूर्व में दिए बयान नहीं देता तो उसे होस्टाइल भी घोषित किया जा सकता था। लेकिन पीपी ने न तो उसके पूर्व में सीबीआई को दिए गए बयानों के बारे में पूछा और न ही गवाह ने इस संबंध में कुछ भी बताया। जबकि इसी कोर्ट में कुछ गवाहों को पूर्व में दिए बयानों से सिर्फ एक लाइन अलग बोलने पर भी होस्टाइल किया जा चुका है।

गौरतलब है कि सोलंकी के सीबीआई को दिए इन्हीं बयानों के कारण आईजी गीता जौहरी, एडीजी ओपी माथुर और डीपीजी पीपी पांडे को सीबीआई ने तुलसी एनकाउंटर में मुख्य आरोपी बनाया था। क्रॉस में बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर सोलंकी ने यह तो कहा कि सीबीआई ने उसके एक बार बयान लिए हैं, लेकिन उसने क्या बयान दिए थे, इस संबंध में कोर्ट में कुछ नहीं बताया।

मैं उनकी टांग खींचता तो मेरी टांग भी खींची जाती

कोर्ट रूम के बाहर सोलंकी से जब यह पूछा गया कि उसने कोर्ट में उसके सीबीआई को दिए सीआरपीसी की धारा 161 के तहत हुए बयान क्यों नहीं बताए, तो उसने कहा कि मैं उनकी टांग खींचता, तो मेरी टांग भी खींची जाती। इससे पहले भी सोलंकी खुद की जान को खतरा बता चुके हैं और आशंका जता चुके हैं कि जब केस में जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत हो चुकी है, तो मैं तो एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर ही हूं। उन्होंने कोर्ट में होस्टाइल हो रहे गवाहों और आईओ के बयानों को लेकर भी कहा था कि कोर्ट में पपेट्री शो चल रहा है। अब ये तो सोलंकी ही बता सकते हैं कि वे पपेट्री शो का हिस्सा बने या नहीं !

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के मौके पर थे तीनों आईपीएस

सोलंकी ने कोर्ट को बताया कि उसने तफ्तीष में एसपी एटीएस राजकुमार पांडियन के साथ लगे कांस्टेबल अजय परमार के बयान लिए थे, जिसमें उसने बताया था कि वह राजकुमार पांडियन के निर्देश पर उनकी जगह फ्लाइट से हैदराबाद से अहमदाबाद आया था। सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर स्पॉट पर भी आईपीएस दिनेश एमएन, एटीएस डीआईजी डीजी बंजारा, एसपी राजकुमार पांडियन टीम के साथ मौके पर थे। अजय परमार ने मुझे यह भी बताया था कि इनके सामने गुजरात पुलिस के एमएल परमार और चौबे एक फ्रंटी कार में सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर स्पॉट पर लेकर आए थे, वहां राजस्थान के एसआई एक बाइक लेकर पहुंचे थे और चलती हुई बाइक से कूदे थे और फिर सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर में मार दिया गया था। गौरतलब है कि अजय परमार केस में आरोपी है।

सोलंकी ने बताया कि उसने फार्म हाउस जहां सोहराबुद्दीन-कौसरबी को अपहरण के बाद रखा गया था, उससे संबंधित सतीश शर्मा के बयान लिए थे, उसने बताया था कि उसे एमएल परमार ने कहा था कि सोहराबुद्दीन तत्कालीन सीएम को मारने आया था, तो इसके साथ मुठभेड़ हुई और यह मारा गया। सती के दोस्त नरे पटेल ने सोहराबुद्दीन के शव की इनक्वे रिपोर्ट के पंचनामे पर साइन भी किए थे। सोलंकी ने बताया कि उसने एमजे ट्रेवल्स के मालिक, बस ड्राइवर, क्लीनर और आपटे परिवार के बयान लेकर सोहराबुद्दीन, कौसरबी सहित एक अन्य आदमी के हैदराबाद से सांगली जा रही बस से हुए अपहरण की कहानी भी स्थापित की थी।

वह बयान जो सोलंकी ने सीबीआई को दिए थे

सीबीआई 25 मई 2010 को दिए बयान में सोलंकी ने बताया था कि उसने हैदराबाद, सांगली, झिरनिया, उज्जैन जाकर अनुसंधान किया था। विभिन्न गवाहों के आधार पर उसने पाया था कि यह एनकाउंटर फर्जी हुआ था और कौसरबी की भी हत्या हुई थी। वीएल सोलंकी के सीबीआई को दिए बयानों में लिखा है कि मेरे अनुसंधान में आया था कि सोहराबुद्दीन और कौसरबी के साथ बस में तीसरा आदमी तुलसीराम प्रजापति ही था। मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए तुलसी से पूछताछ करना जरूरी था। मैंने 18 दिसंबर 2006 को लिखित में डीआईजी गीता जौहरी से उदयपुर जाकर तुलसी से पूछताछ करने की अनुमति मांगी। अनुमति तो नहीं मिली थी, लेकिन ठीक दस दिनों बाद तुलसी की भी एनकाउंटर में मौत हो गई थी। परिस्थितियों के अनुसार तुलसी की मौत भी बेहद संदिग्ध एनकाउंटर में हुई थी। सोलंकी के इसी बयान के कारण सीआईडी आईजी गीता जौहरी, एडीजी ओपी माथुर और डीजीपी पीपी पांडे को सीबीआई ने आरोपी बनाया था।

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