गौरतलब है कि सीबीआई के अलग-अलग अनुसंधान अधिकारी वीएल सोलंकी के चार बार अलग-अलग तारीखों पर बयान ले चुके हैं। सीआईडी के सेवानिवृत डीएसपी वीएल सोलंकी ही वह पहले अनुसंधान अधिकारी है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की प्रारंभिक जांच की थी और इन्ही की रिपोर्ट को आधार बनाते ही बाद में सीआईडी और सीबीआई ने इस केस का अनुसंधान किया था और इसे फर्जी एनकाउंटर बताया था। सोलंकी के बयान के आधार पर ही सीबीआई ने सीआईडी की डीआईजी रहीं गीता जौहरी, डीजीपी पीसी पांडे को भी मुख्य आरोपी बनाया था।
मुझे सुरक्षा अहमदाबाद से मुंबई कोर्ट तक की मिली
सोलंकी का कहना है कि मुझे जान का खतरा है, ऐसे में मेरे निवेदन पर कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने सुरक्षा तो उपलब्ध करा दी, लेकिन ये सुरक्षा अहमदाबाद से मुंबई कोर्ट लाने तक के लिए ही है। 5 अक्टूबर तक मुझे ये सुरक्षा मिल गई थी, लेकिन समन नहीं मिला था तो 5 अक्टूबर की पेषी पर नहीं पहुंचा था। जबकि इस केस के अनुसंधान के बाद अदालत के निर्देष पर 2009 से इस वर्ष जुलाई 2018 तक हर समय दो कांस्टेबल मेरी सुरक्षा में साथ रहते थे। लेकिन सरकार ने जुलाई के बाद इन जवानों को सुरक्षा से हटा दिया। सोलंकी ने पिछले दिनों पेशी पर नहीं आकर जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मांगी थी और अंदेशा जताया था कि जब जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत हो चुकी है, तो मैं तो सीआईडी से सेवानिवृत अधिकारी ही हूं।
आईओ ही नहीं सीबीआई का अहम गवाह है सोलंकी
सोलंकी ने सीबीआई को दिए बयानों में बताया है कि उसने सीआईडी डीआईजी गीता जौहरी के सुपरविजन में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर और पत्नी कौसरबी के गायब हो जाने के मामले की प्रारंभिक जांच की थी। वह अनुसंधान के लिए हैदराबाद, नागदा, सांगली, उज्जैन और झिरनिया गया था, वहां कई संबंधित लोगों के बयान लिए थे और दस्तावेज इकट्ठे किए थे। सोलंकी ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की न सिर्फ प्रारंभिक तफ्तीश की थी, बल्कि वह सीबीआई का अहम गवाह भी रहा है। सोलंकी के बयानों के आधार पर ही सीबीआई ने सीआईडी की डीआईजी गीता जौहरी, डीजीपी पीसी पांडे, एडीजी ओपी माथुर को आरोपी बनाया था।
