टीके पटेल ने बताया कि उन्होंने अनुसंधान के दौरान मालदे ओडिडोरा से वह क्वालिस गाड़ी जब्त की थी और बयान लिए थे, जिसका उपयोग एनकाउंटर से पहले सोहराबुद्दीन-कौसरबी के अपहरण में किया गया था। इसके अलावा नाथूबा जडेजा, गुरूदयाल और भाईलाल के बयान लिए थे, ये तीनों उस क्वालिस गाड़ी के चालक थे, जिसमें सोहराबुद्दीन-कौसरबी का अपहरण किया गया था और नरेश भाई दिनेश भाई, गिरीश भाई पटेल के बयान लिए थे, ये तीनों उस फार्म हाउस से संबंधित हैं, जिसमें अपहरण के बाद सोहराबुद्दीन-कौसरबी को रखा गया था। गौरतलब है कि गाड़ी से संबंधित चालक और फार्म हाउस से संबंधित ये सभी ट्रायल कोर्ट में हुए बयानों के दौरान होस्टाइल हो चुके हैं।
क्रॉस में बचाव पक्ष के पूछने पर टीके पटेल ने कोर्ट को बताया कि उसने जिन गवाहों के बयान लिए थे, उनकी सूची उसे सुपरवाइजरी अधिकारी रजनीश रॉय ने दिए थे। वह सीआईडी में इस केस के अनुसंधान के लिए गठित हुई एसआईटी मेंबर तो नहीं था, लेकिन रजनीश रॉय ने जब उसे इन नामों की सूची सौंपी और बयान लेने के लिए कहा तो मैंने इन सभी के बयान लिए थे। बयान लेने के लिए मैंने किसी भी गवाह को कोई नोटिस नहीं दिया था, उन्हें पूछताछ के हिसाब से बुलाया था और बयान लिख लिए थे।
अहम गवाहों के सीआईडी, सीबीआई को दिए गए बयान के कुछ अंश:
नाथूबा जडेजा और गुरूदयाल दोनों गुजरात पुलिस कर्मी हैं। इन्होंने बयान दिए थे कि हैदराबाद से अहमदाबाद के लिए दो गाड़ियां एक क्वालिस और एक टाटा सूमा रवाना हुई थी, गाड़ी में एटीएस एसपी राजकुमार पांडियन भी थे। सांगली के पास हमने एक बस रूकवाई थी और उसमें से सोहराबुद्दीन और कौसरबी को उतारकर हमारी गाड़ियों में अलग-अलग बैठाया था। बाद में सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर कर दिया गया था। नाथूबा जडेजा ने सीबीआई को दिए बयान में बताया था कि कौसरबी को मार दिया गया था और उसके शव को एटीएस डीआईजी डीजी बंजारा गाड़ी में ले गए थे। नाथू बा जडेजा उस समय उनके साथ था। बंजारा कौसरबी के शव को अपने गांव इलोल ले गए थे, वहां शव को जलाया था और चिता ठंडी होने पर राख-अस्थियां पास स्थिति नदी में बहा दी थी।
जबकि गत महीनों में कोर्ट में हुए बयानों के दौरान ये दोनों होस्टाइल हो गए थे और इन्होंने इस तरह की किसी भी घटना से इनकार किया था और सीआईडी व सीबीआई पर आरोप लगाया था कि उन्होंने इन्हें पकड़ कर टॉरचर किया था और उनके कहे अनुसार बयान देने का दबाव डाला था। दबाव में आकर इन दोनों ने सीआईडी और सीबीआई को गलत बयान दिए थे।
तुलसी एनकाउंटर की पहली एफआईआर दर्ज करने वाले एसएचओ के बयान
कोर्ट में 2006 में अंबाजी थाने के तत्कालीन एसएचओ एएम पटेल के बयान हुए। इन्होंने बताया कि 28 दिसंबर 2006 सुबह पौने छह बजे थाने पर सूचना आई कि हॉस्पिटल एसओजी के इंस्पेक्टर आशीष पांडिया और एक अन्य व्यक्ति घायलावस्था में लाए गए हैं। मैं हॉस्पिटल पहुंचा तो वह दूसरा व्यक्ति तुलसीराम प्रजापति की मौत हो चुकी थी और एसओजी के इंस्पेक्टर आशीष पांडिया के गोली लगने से वह घायल थे। उन्होंने तुलसी के राजस्थान पुलिस कस्टडी से भागने और तलाष के दौरान उसका एनकाउंटर होने का पूरा घटनाक्रम बताया।
एएम पटेल ने कोर्ट को बताया कि आशीष पांडिया की ओर से रिपोर्ट लेकर एफआईआर दर्ज की गई। तुलसी के शव से तीन जिंदा कारतूस और कुछ अन्य सामान बरामद किया, वहीं एनकाउंटर स्पॉट से देषी कट्टा, चला हुआ कारतूस, चप्पल, खूनालूदा मिट्टी सहित अन्य एफएसएल सैंपल लिए। बाद में जांच सीआईडी को सौंपी गई तो समस्त दस्तावेज सीआईडी अधिकारी आरके पटेल को सौंप दिए थे। गौरतलब है कि आरके पटेल इस केस के पहले अनुसंधान अधिकारी और सीबीआई द्वारा बनाए गए आरोपी भी हैं।
