गोगोई उन चार जजों में एक थे, जिन्होंने सेवानिवृत हुए सीजेआई के खिलाफ प्रेस काॅन्फ्रेंस की थी।
पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गोगोई के सीजेआई बनने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। जस्टिस दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में बोलते हुए जस्टिस गोगोई ने कहा था कि उनका सबसे बड़ा योगदान ‘सिविल लिबर्टी’ के मामले में है और उनके कई अच्छे फैसलों का ज़िक्र किया।
जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में भी शामिल रह चुके हैं, जिन्होंने सेवानिवृत हुए सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ इस वर्ष की शुरूआत में प्रेस काॅन्फ्रेंस की थी। देश की लोकतंत्र के मजबूत पिलर न्यायपालिका की स्थिति को लेकर नाराजगी जताई थी, तब इन चार न्यायाधीशों ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे जज बीएच लोया की हुई संदिग्ध मौत की जांच कराने की याचिका के खारिज होने के आदेश पर भी नाराजगी जताई थी। जज बीएच लोया की मौत के बाद केस की सुनवाई के लिए आए दूसरे न्यायाधीश ने बीजेपी के अमित शाह को केस से बरी करने का फैंसला दिया था।
जस्टिस गोगोई असम के रहने वाले हैं और उन्होंने एनसीआर पर सुनवाई के लिए बने स्पेशल बेंच की अध्यक्षता भी की है। सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों में वह शामिल रहे हैं। सार्वजनिक विज्ञापन के जरिए राजनेताओं के महिमामंडन के खिलाफ भी जस्टिस गोगोई फैसला दे चुके हैं। जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल रहे हैं।
