आईओ विश्वास मीणा नहीं दे सके अपनी बात का साक्ष्य
क्रास में बचाव पक्ष के वकील ने पूछा कि ये सभी गवाह उदयपुर और राजस्थान मूल निवासी थे और सीबीआई कोर्ट जोधपुर और जयपुर में भी है, तो इनके बयान उदयपुर के सीजेएम के समक्ष या राजस्थान की किसी भी कोर्ट में क्यों नहीं कराए। इस सवाल का मीणा के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। मीणा ने कोर्ट को बताया कि उदयपुर सीजेएम को बयान लेने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था,लेकिन उन्होंने बयान लेने से इनकार कर दिया था। हालां कि मीणा न तो कोर्ट में वह प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सके, जो सीजेएम को दिया था, न ही कोर्ट का रिकार्ड प्रस्तुत कर सके, जिसमें यह साक्ष्य साबित होता हो कि उन्होंने सीजेएम उदयपुर को कोई प्रार्थना पत्र दिया था। ताजुब्ब की बात यह है कि इस संबंध में कोई दस्तावेज सीबीआई की चार्जशीट में तक शामिल नहीं हैं। यहां तक कि मीणा इसका भी कोई स्पष्ट कारण, रिकार्ड या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके कि क्यों उन्होंने अलग-अलग तारीखों में अलग-अलग गवाहों के 164 के बयान नवी मुंबई के सीजेएम के समक्ष करवाने के बजाए सीबीआई कार्यालय परिसर स्थिति एक ही कोर्ट में करवाए थे।
गौरतलब है धारा 164 के तहत बयान दे चुके पुलिस अधिकारी रणविजय सिंह,हिम्मत सिंह, भंवर सिंह हाड़ा ने गत दिनों ट्रायल के दौरान हुए उनके बयानों में सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी कंडा स्वामी, एसपी अमिताभ ठाकुर, इंस्पेक्टर एनएस राजू और विश्वास मीणा पर आरोप लगाते हुए कोर्ट को बताया था कि सीबीआई ने उन्हें मुंबई लाकर टारचर किया था, गिरफ्तारी का डर बताकर कोर्ट में 164 के गलत बयान देने पर मजबूर किया था। रणविजय सिंह ने तो कोर्ट को यह तक बताया था कि उसकी बेटी की सगाई से ठीक पहले सीबीआई इंस्पेक्टर एनएस राजू और विश्वास मीणा उन्हें जबरन मुंबई लेकर गए थे, मारपीट, टाॅरचर करने के साथ ही दबाव बनाया था कि हमारे बताए बयान कोर्ट में दोगे, तभी छोड़ेंगे, नहीं तो गिरफ़्तार कर लेंगे, बेटी की सगाई में भी नहीं जा सकोगे।
90 गवाहों के बयान लिए थे, जो 38मुल्जिमानों से संबंधित थे
कोर्ट में विश्वास मीणा ने बताया कि वे 2010-11 में सीबीआई सब इंस्पेक्टर थे और सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर की अनुसंधान टीम में शामिल थे। उन्होंने मामले में कुल 38 मुल्जिमानों से संबंधित कुल 90 लोगों के बयान लिए थे। इनमें 30गवाह सोहराबुद्दीन और 60 तुलसी एनकाउंटर से संबंधित थे। ट्रायल 22मुल्जिमानों पर चल रही है, ऐसे में ट्रायल के दौरान इनसे संबंधित 24 गवाहों के बयान हुए हैं। इनमें 17 गवाह होस्टाइल हो चुके हैं, वहीं वकील सलीम खान,आईपीएस हिंगलाज दान, सुधीर जोशी, दिनेश गुर्जर, कोमल झा, चंदन झा, रणविजय सिंह आदि होस्टाइल नहीं हुए हैं।
मुल्जिमानों से कभी नहीं की पूछताछ
विश्वास मीणा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने कभी भी किसी भी आरोपी से पूछताछ नहीं की और न ही उनसे कोई साक्ष्य बरामद किया। उन्होंने कहा मैंने किसी भी मुल्जिम के कभी कोई हस्ताक्षर या हैंडराइटिंग सैंपल नहीं लिए। मीणा ने बयानों में माना कि तुलसी को अहमदाबाद और उज्जैन ले जाने वाली एस्कार्ट पार्टी में जो भी पुलिसकर्मी जाते थे, वे आफीशियल ड्यूटी पर थे और उनकी ड्यूटी उनके इमीजिएट अधिकारी ही लगाते थे। एस्कार्ट पार्टी में जाने वाले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कभी कोई विभागीय कार्यवाही भी नहीं हुई है।
