समन तामील होने के बाद भी बयान देने नहीं पहुंचे सीबीआई के अनुसंधान अधिकारी
कोर्ट में सीबीआई के तीन अनुसंधान अधिकारी एस. वीणुगोपाल, एस. कालैमणी और एस. दीपावत के आज बयान होने थे। इनमें से एस. वीणुगोपाल तो कोर्ट पहुंचे, लेकिन कालैमणी और दीपावत के नहीं पहुंचने पर सीबीआई के स्पेशल पीपी ने कोर्ट को बताया कि इनके समन तामील हो चुके हैं, लेकिन वे किसी दूसरे कार्य में व्यस्त हैं, इसलिए नहीं आ सके। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और दोनों के खिलाफ गिरफतारी वारंट जारी कर दिया।
गौरतलब है कि इससे पहले भी दस अनुसंधान अधिकारी ऐसे हैं जो कोर्ट द्वारा दी गई नियत तारीख पर बयान देने कोर्ट नहीं पहुंचे हैं। 5 सितंबर को मामले में अनुसंधान अधिकारियों के बयान शुरू हो गए थे। अब तक सीआईडी के 4 और सीबीआई के 5 अनुसंधान अधिकारियों के बयान हो सके हैं, वहीं सीआईडी के 6 अनुसंधान अधिकारी और सीबीआई के आज के मिलाकर कुल 4 अनुसंधान अधिकारी कुल 10 अनुसंधान अधिकारी नियत तारीख पर कोर्ट बयान देने नहीं पहुंचे हैं।
इनमें से सीआईडी के एक अनुसंधान अधिकारी वीएल सोलंकी ने कोर्ट को समन तामील के बाद जवाब में जान का खतरा होना बताकर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करवाने का निवेदन किया था। वीएल सोलंकी ने कोर्ट को पत्र के जरिए बताया था कि उन्हें कोर्ट के आदेश पर 2009 से लगातार सुरक्षा मिल रही थी, लेकिन पुलिस ने बिना किसी जानकारी के इस वर्ष जुलाई से मेरी सुरक्षा में लगे दो कांस्टेबल हटा लिए। इस मामले में बयान देने को लेकर मेरी जान को खतरा है, ऐसे में मैं बिना सुरक्षा के कोर्ट में बयान देने नहीं आ सकूंगा। इस पर कोर्ट ने वीएल सोलंकी को सुरक्षा उपलब्ध करवाने के सीबीआई को निर्देश जारी किए थे।
तीन बयान लिए थे, तीनों ही हुए थे होस्टाइल
कोर्ट में सीबीआई के अनुसंधान अधिकारी निरीक्षक एस. वीणुगोपाल के बयान हुए। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से संबंधित तीन गवाह बस चालक मिस्पा हैदर, क्लीनर यासुद्दीन और एमजे ट्रेवल्स के मालिक मोहम्मद अहमद के बयान लिए थे। ये तीनों उस बस से सम्बंधित है, जिसके लिए सीबीआई ने चार्जशीट में दावा किया है कि सोहराबुद्दीन, कौसरबी और तुलसी के साथ इसी बस से हैदराबाद से सांगली आ रहा था और गुजरात एटीएस टीम से इनको जहानाबाद के पास बस से उतारा था और अपहरण किया था। गौरतलब है कि ट्रायल के दौरान तीनों गवाह के बयान हुए है और तीनों ही होस्टाइल हो चुके हैं।

