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18वें एशियाई खेल : भारत पर हुई मेडल की वर्षा,एक ही दिन में दो गोल्ड

टेनिस :-

18वें एशियाई खेलों में टेनिस के पुरुष युगल में भारत ने टेनिस में पुरुष युगल स्पर्धा में स्वर्ण जीता । रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी ने कजाकिस्तान के डेनिस येवशेयेव और एलेक्जेंडर बब्लिक को 6-3, 6-4 से हराया । भारतीय जोड़ी ने 52 मिनट में खिताबी मुकाबला जीता ।

एशियाई खेलों में बोपन्ना का यह पहला पदक(स्वर्ण) है वहीं दिविज का यह दूसरा पदक है । बोपन्ना और दिविज ने पहले सेट में अच्छी शुरुआत की । उन्होंने कजाकिस्तान के खिलाफ 3-0 से बढ़त बनाई । कजाकिस्तान ने अच्छी वापसी की और स्कोर 5-3 कर लिया, लेकिन भारतीय जोड़ी ने अगला खेल जीतकर पहला सेट अपने नाम किया । दूसरे सेट में भारतीय जोड़ी संघर्ष करती दिखी । एक समय वह 1-2 से पिछड़ गई थी । शानदार वापसी करते हुए 4-3 से बढ़त हासिल की । और अन्त तक 6-4 से मुकाबला जीत लिया ।

टेनिस का तीसरा पदक (कांस्य) प्रजनेस गुणेश्वरन प्रभाकरण ने पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जीता । वे उज्बेकिस्तान के डेनिस स्टोमिन के हाथों हार गए । 86 मिनट तक चले मुकाबले में स्टोमिन ने प्रभाकरण को 6-2, 6-2 से हराया । जिससे प्रभाकरण कांस्य पदक से ही ससंतोष करना पङा ।

नौकायन :-

18वें एशियाई खेलों में भारत को नौकायन स्पर्धा से पहले स्वर्ण के साथ दो कांस्य पदक पदक मिले ।

नौकायन में पुरुषों की क्वाड्रपल स्कल्स टीम स्पर्धा में स्वर्ण सिंह, भोनाकल दत्तू, ओम प्रकाश और सुखमीत सिंह की टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने फाइनल में 6 मिनट 17.13 सेकेंड में पहला स्थान हासिल कर भारत को छठा स्वर्ण पदक दिलाया है  ।

नौकायन में पुरुषों की लाइटवेट युगल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में कांस्य पदक जीता । रोहित कुमार और भगवान सिंह की जोड़ी ने 7 मिनट 04.61 सेकेंड का समय लेकर स्पर्धा का फाइनल चरण पूरा कर तीसरे स्थान पर रहे और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया ।

वहीं नौकायन में लाइटवेट एकल स्कल्स स्पर्धा में दुष्यंत ने फाइनल में कांस्य पदक जीता था ।

निशानेबाजी :-

18वें एशियाई खेल में निशानेबाजी में भारतीय महिला शूटर हीना सिद्धू ने शुक्रवार को महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता । इस स्पर्धा में हीना ने 219.2 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया ।

राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता हीना ने 20 निशानों के बाद 198.8 अंक हासिल कर तीसरा स्थान पर थी लेकिन वह इससे आगे नहीं बढ़ पाईं और 22 निशानों के बाद तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक के साथ स्पर्धा से बाहर हो गयी ।

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