जहाँ आम जनता भ्रष्टाचार के दंस से ञाही ञाही कर रही है , वहीं भ्रष्टाचार की एक और कहानी जग-जाहिर हुयी ।
अजमेर जिले के ब्यावर नगर परिषद की सभापति बबीता चौहान अपने पति नरेन्द्र चौहान के साथ 2.25 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार की गई हैं । इनके अलावा एसीबी ने एक अन्य बिचौलिए को भी धरदबोचा ।
एसीबी ने एक अन्य मामले में भी रिपोर्ट दर्ज की है जिसमें सभापति बबीता चौहान और उसके पति नरेन्द्र ने बिचौलिए के जरिए मॉल के कन्वर्जन के लिए 50 लाख कीमत की दुकान की रजिस्ट्री भी करवाई थी।
अजमेर एसीबी के एसपी कैलाश चंद्र बिश्नोई ने बताया कि सभापति बबीता चौहान के खिलाफ लगातार भ्रष्टाचार करने की शिकायतें मिल रही थी । इसके तहत इस पर नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान बबिता द्वारा किया गया भ्रष्टाचार का मामला सामने आया ।
जिसमें ब्यावर के कॉलेज रोड स्थित जैन फर्टिलिटी हॉस्पिटल के संचालक डॉ राजीव जैन ने सभापति चौहान के खिलाफ परिवाद पेश किया जिसमें बताया कि उसके आवासीय भूखण्ड को व्यावसायिक में रूपान्तरित करने के लिए फाइल लगाई तो नगर परिषद के बाबू जुंजार ने सभापति के घर जाकर मिलने की बात कही । जब वह सभापति चौहान व उसके पति से मिला तो भू रूपान्तरण के लिए 2.25 लाख रुपये की मांग की तथा साथ ही रुपए 4-5 दिनों में देने को भी कहा ।
डॉ जैन की शिकायत का सत्यापन करवाकर सभापति चौहान को रंगे हाथो पकङने के लिए आज सुबह लगभग 9.15 बजे बबीता चौहान के घर पर ही रिश्वत की रकम भिजवाई गई। जैसे ही रकम चौहान ने प्राप्त की और डाॅ जैन का इशारा मिला । एसीबी की टीम ने धावा बोलकर चौहान दम्पति को दबोचना चाहा । ऐसे में चौहान दम्पति ने चालाकी दिखाते हुए बिचौलिये शिवप्रसाद नामक व्यक्ति को रिश्वत की रकम लेकर भगाने का प्रयास भी किया लेकिन वह इसमें भी सफल नहीं हुए ।
चौहान दम्पति के खिलाफ भ्रष्टाचार की एक अन्य शिकायत मिली
एसपी बिश्नोई ने बताया कि सभापति बबिता चौहान के खिलाफ ब्यावर नगर परिषद के पार्षद गुरू बच्चन सिंह ने एसीबी को शिकायत दी कि हॉस्पिटल मार्ग पर कॉम्पलेक्स की स्वीकृति के लिए फाइल लगाई जिसमें सभापति चौहान और उसका पति नरेन्द्र चौहान स्वीकृति के लिए कॉम्पलेक्स में मनपंसद दुकान की फरमाइश कर रहे हैं । तय बातचीत के अनुसार शिकायतकर्ता गुरू बच्चन सिंह ने चौहान के कहे अनुसार एक दुकान की रजिस्ट्री किसी बिचौलिए के नाम भी करवा दी । जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 78 लाख रुपये है। हालांकि नरेन्द्र चौहान ने दुकान की रजिस्ट्री सविता कांकाणी के नाम करवाई थी । इससे पहले शिकायतकर्ता से 5 लाख रूपए लेकर सविता के खाते में जमा करवाए गए और यही रकम वापस शिकायतकर्ता के खाते में डाली गई जिससे कि स्पष्ट हो सके कि दुकान की रजिस्ट्री क्रयविक्रय के द्वारा हुई है ।
बिश्नोई ने कहा कि शिकायतकर्ता गुरू बच्चन सिंह ने अपना काम हो जाने की वजह से ट्रेप कार्यवाही करने से मना कर दिया । दूसरे परिवादी डॉक्टर जैन की शिकायत पर गिरफ्तारी के दौरान मूल इकरारनामा बरामद हुआ ।
भाजपा से जीतकर पार्षद बनी बबीता चौहान चुनाव प्रभारी व स्थानीय विधायक की मेहरबानी से सभापति भी बना दी गई। सभापति बनने के बाद से ही बबीता चौहान के पति नरेन्द्र चौहान ने पूरा साम्राज्य ही जमा लिया और हर फाइल पर रिश्वत लेना शुरू कर दिया । कई ऐसे मामले भी हुए कि सड़क बनी नहीं और उसकी राशि भी स्वीकृत हो गई । अब चौहान की प्रॉपर्टी की जांच चल रही है जो भी कई राज खोलेगी।
